आपाणी मायड़ भाषा सोशल मीडिया पर छायगी

आज रे मायड भाषा पेज दैनिक युग पक्स में छपियौडो डिंगळ री डणकार रे बारे में म्हारौ इन्टरव्यू। सगळा हेताळुवां रो आभार जिका इण ग्रुप ने एक सार्थक ग्रुप बणायौ है। आभार खास कर आदरणीय डा गजादान सा शक्तिसुत, आदरणीय गिरधर सा रतनू दासोडी, आदरणीय नवल जी जोशी, आदरणीय मोहन सिंह जी रतनू, आदरणीय राजेन्द्र स्वर्णकार साहब, आदरणीय चंदन सिंहजी भाटी, आदरणीय मोरारदान जी सुरताणिया, आदरणीय मनोज सा मीसण अर दूजा सारां सदस्य मित्र, सुभ चिंतकां रो पण आभार। सारां आदर जोग सदस्यां रो पण अंतस रे ऊंडाण सूं आभार। — नरपत आसिया “वैतालिक” […]

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महाकवि हिंगलाज दान कविया

हिंगलाज दान कविया सेवापुरा के रामप्रताप जी कविया के दो पुत्रो में ज्येष्ठ थे। उनका जन्म माघ शुक्ला १३ शनिवार सम्वत १९२४ को सेवापुरा में हुआ था। तब उनके दादा नाहर जी कविया विद्यमान थे और उन्ही से इन्होने अपनी आरंभिक शिक्षा पाई। जब वे साढ़े तीन वर्ष के थे तो पिता बारहठ रामप्रताप कविया ने उन्हें बांडी नदी के बहते हुए जल में खड़ा करके जिव्हा पर सरस्वती मन्त्र लिख दिया था। बांडी सेवापुरा के पास हो कर ही बहती है और इस में बरसात में ही पानी आता है। बहता पानी निर्मल गंगा की तरह ही पावन माना जाता है। बांडी नदी के प्रवाह के प्रति भावना व आस्था के साथ पिता ने जो मन्त्र दिया, उसने अपना चमत्कारिक प्रभाव दिखाया। पांच वर्ष की अल्पायु में ही हिंगलाज दान की कवित्व-शक्ति प्रस्फुटित हो गयी और अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति तथा वंशानुगत संस्कारों के फलस्वरूप वे डिंगल के सर्वश्रेष्ठ महाकवि के रूप में प्रतिष्ठित और मान्य हुए।[…]

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🍄शिवाष्टक🍄- श्री जोगी दान जी कविया सेवापुरा

शिवा आवड़ा रूप ते सृष्टि जाणी,
शिवा ऊगतै भाण पै चीर ताणी।
शिवा सोखियो हाकड़ो नाम सिन्धू,
शिवा प्राण दे सोखियो मृत्त बन्धू।१।
शिवा बैचरा रूप तू दुष्ट मारे,
शिवा कूकड़ा रूप तू पेट फारे।
शिवा अधर्मी नराँ नै सीख दीनी,
शिवा बात विख्यात तैं विश्व कीनी।२।[…]

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महर कर मामड़जा माई – कविवर श्री शुभकरण जी देवल

अरज म्हारी साँभल़जो आई, महर कर मामड़जा माई।टेर।

जिण पुल़ बीच जवन जुलमाँ सूँ अघ बधियो अणपार।
महि अघ हरण सदन मामड़ रै आवड़ लिय अवतार।
सगत नित भगताँ सुखदाई।1।[…]

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🌺घूंघर छम छम छम छम बाजै🌺

घूंघर छम छम छम छम बाजै!
रसन पटांगण रमै चारणी, सबद बीण कर साजै!

उजळआनन, हार अनुपम, स्फटिक धवल सुभधारी!
आई नाचै रसन अखाडै, वसन स्वेत वरदा री!
घम घम घम घम पद रव गूंजै, जाणक घन नभ गाजै!
घूंघर छम छम छम छम बाजै![…]

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दो गजलां -गिरधरदान रतनू दासोड़ी

एकर म्हारै गाम आवजै।
साथै थारी भाम लावजै।।
चांदो तारा बंतल़ करता।
हंसतो रमतो धाम पावजै।।
मिरच रोटियां मन मनवारां
काल़जियै रो ठाम पावजै।।
स्नेह सुरां री बंशी सुणजै।
तल़ खेजड़ आराम पावजै।।
फोग कूमटा जूनी जाल़ां।
परतख वांमे राम पावजै।।
विमल़ वेकल़ू धवल़ धोरिया।
कलरव मोर ललाम पावजै।।[…]

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इसड़ी म्हारी राम कहाणी

खावण नै फगत उबास्यां है,
पीवण नै आंख्यां रो पाणी।
दुख जा दुख नै दुख सुणावै,
इसड़ी म्हारी राम-कहाणी।।

कूंपळ कूंपळ मगसी मगसी,
पत्तो पत्तो सूखो सूखो।
तितली तितली तिसी तिसी सी,
भंवरो भंवरो भूखो भूखो।।
कोयल री पांखां सा पाटा
आळां मंडराता सण्णाटा।
स्यात म्हारड़ै खातै लिख दी,
विधना जग री सकळ विराणी।। 01।।[…]

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क्रांतिवीर बारहठ केशरी सिंह

वक्त आने पर वतन पे वार दी जिसने जवानी।
और उसके खून में भी थी रवानी ही रवानी।।
बंधु के बलिदान की मां भारती खुद ले बलैयां।
क्रांतिकारी केसरी के त्याग की अद्भुत कहानी।।01।।[..]

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जय तेमड़ेराय – चिरजा – कवि सोहनदान जी सिढायच

तेमडाराय
भाकरीयो मन भावणो ,जठे आवङ माँ रो थान रे |
जठे आई माँ रो धाम रे, ङुगरीयो रलियावणो ||

ऊँचे ङुगर ओर लो ज्यारी धजा उङे असमान रे |
जोत जगामग जगमगे माँ रा नामी धूरत निशान रे ||1||
ङुगरियो रलियावणो………..

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अमर सहीद कुंवर प्रतापसिंह बारठ – प्रहलादसिंह “झोरड़ा”

जद जैळ हुई तो हरख उठ्यो
फांसी रे फंदे झूलण नैं।
ज्यूं प्राण पीव सूं मिलणे रो
घण कोड हुवे है दुल्हण नैं।
केसर रे लाडेसर माथे
हो मोद धरा रे कण कण नैं।
फूलां सूं लदी सहादत भी
साम्ही बैठी ही बण ठण नैं।।

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