वीर प्रसूता चारणी

….कहते हुये उनकी आँखें भर आयी, सुनते हुये मेरी भी। फिर कहा, “तुम जानती हो, उसे वीर चक्र मिला। उसने अपना वादा तब भी निभाया। जिस सम्मान का हकदार वो था, मेरे ही हाथों से लिया गया। पीएम के हाथों मेडल लेते हुये मुझे गहरा खालीपन भी दिखता तो गर्व कर जाती। पर मैं क्या करूँ बेटा …तब मुझे देपाल का चेहरा दिख गया …याद आ गया ..सब सूना था ….सब कुछ ही खाली ..। शहीद होकर भी मेरी जिम्मेदारी उम्रभर की उसने ही ले रखी है। पेंशन के पैसे जब भी हाथ में उठाती हूँ, तब-तब गला रुँध जाता है। […]

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पांडव यशेन्दु चन्द्रिका – स्वामी स्वरुपदास

| कड़ी – १७८  | षोड़श मयूख | अंतिम पर्व
| धारावाहिक श्रंखला – प्रत्येक मंगल, शुक्र एवं रविवार को प्रेषित।
| व्याख्या: डा. चन्द्र प्रकाश देवल


।।अथ षोड़श मयूख।।

अंतिम पर्व

वैशंपायन उवाच
दोहा
धृतराष्टर आदेश, धर्मपुत्र शिर पर धर्यो।
यथा सुयोधन लेश, कबहुँ न अंगीकृत कर्यो।।१।।
वैशंपायन मुनि आगे कहने लगे कि हे राजा जन्मेजय! धृतराष्ट की एक-एक आज्ञा को जिस प्रकार राजा युधिष्ठिर ने शिरोधार्य किया, उसी प्रकार दुर्योधन ने उनकी एक भी आज्ञा को नहीं माना था।[…]

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जलंधरनाथ सुजस

।।छंद – रूपमुकंद।।
बजियो धर चारणनाथ बडाऴिय,
रंग सदामत रीझ रखी।
सबऴै दलसाह रु भीमड़(भीमड़ै) सांप्रत,
आपरि कीरत कांन अखी।
तद तोड़िय दाऴद तूठ तिणां पर,
बात इऴा पर आज बहै।
जय नाथ जऴंधर जोगिय जाहर, राज रातैगिर थांन रहै।।
जिय राज रातै गिर वास रहै।।1[…]

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सैणी-सुजस

।।छंद – रेंणकी।।
लाळस कव लूण एक ही लिवना,
रात दीह हिंगळाज रटी।
वीदग रै घरै बेकरै बाई,
पह निज देवी तूं प्रगटी।
सकळापण जांण आंण ले सरणो,
नत हुय सुर नाग नमै।
जुढिये इळ विमळ सैणला जोगण, रंग सोनथळ मात रमै।।
जिय रंग सोनथळ मात रमै।।१[…]

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रँग शीलां रखवाल़िया,जोर झिणकली झाड़!!

एक जमानो हो जद अठै रा नर-नारी मरट सूं जीवण जीवता अर सत रै साथै पत रै मारग बैवता। हालांकै धरती बीज गमावै नीं आज ई ऐड़ा लोग है जद ई तो ओ आकाश बिनां थांभै ऊभो है पण उण दिनां री बातां बीजी।

बीसवैं सईकै री बात है भाडली(जैसल़मेर) रा भाटी रुघजी मानसिंहजी रा (रुघराजजी /रुघनाथजी) धाट रै गांम छौल़ रै सोढां रै अठै परण्योड़ा हा। उणां री जोड़ायत सोढीजी, जापो करावण सारू आपरै पीहर छौल़ गयोड़ा हा। जापो हुयो। सोढीजी बेटे री मा बणिया। दोनां जागा बधाइयां बंटी। हरख हुयो।[…]

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चिड़कली

तूं तो भोल़ी भाऴ चिड़कली।
दुनिया गूंथै जाऴ चिड़कली।।

धेख धार धूतारा घूमै।
आल़ै आल़ै आऴ चिड़कली।।

मारग जाणो मारग आणो
हुयगी अब तो गाऴ चिड़कली।।

बुत्ता दे बस्ती भरमावै।
वै ई पैरै माऴ चिड़कली।।[…]

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