आवड़ वंदना – जय सिंह सिंढायच मण्डा (राजसमन्द)

।।दोहा।।
जग मावड़ आवड़ जयो,सगत सरब सिरमौड़।
आगै बड़पण आपरै, हुवै न किण सूं होड़।।१
बडा बडी भुजबीस हो, राज तैमड़ाराय।
क्रोड़ वखत पद कमल में, नमन करूं सिर नाय।।२

।।छंद रोमकंद।।
कलिकाल महाविकराल़ हल़ाहल़,धीर कुजोर बढै जवनां।
भव भार उतारण दास उबारण, कारण याद करे वचना।
बिसरी नहि अंब दयाल़ अजू, गण चारण ने वर आप दयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।१

उपहास सहे सुत बंश बिना,घण मामड़ चित्त उदास भये।
शरणे जद मामड़ सात समे,घण आस लिया हिंगल़ाज गये।
अरदास सुणी उर आंण दया,हरसाय हिये वरदाण दयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।२

अवतार धरूं धर सात सरूपम,पूरण तो सब आस करूं।
लिय साथ में भैरव भ्रात महीरख, बंश बधारण तोय सरू।
उतरूं तव आंगण बैठ विवाण में, श्री मुख ऐम उवाच कयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।३

धिन आठ सदी धिन आठ ही संवत, मास मधू नवरात मही।
अवतार धरे नवमी शुभ वासर,थावर आण सुभोर थही।
निज भैरव भ्रात महीरख साथ में,धारण सात सरूप कयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।४

दुसकाल़ महाविकराल़ लखी जद माड धरा मझ आप मया।
कर मात दया जन संग सभी गढनानण सिंध प्रदेश गया।
चरखा बिन पाण चलाय लखी जन, कातत सूत अचंभ कयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।५

हद कोड़ किया नद नीर नहावत, साथ मिल़ी निज बैन सभी।
छिपियौ नृप म्लेच्छ तणो सुत छूवत, पैरण के पट आय तभी।
तन नागण रूप सु धार सभी, नद नावत नीर पयाण कयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।६

जवनापति नीत अनीत लखी, सब मात क साथ पयाण कियो।
मझ मारग मांय महानद मात नें होय अजांण न जांण दियो।
कर कोप घणो नद.हेक चल़ू भर, सोख मया मझ मग्ग कियो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।७

थट पूरण कोस कई लग हाकड़,नीर अथाह बहै भरियो।
मदमाय बहै मरियाद मिटाय’र ,कष्ट बढ़ा जन चैन कियो।
करुणानिधि कष्ट मिटावण कारण, हेक चल़ू भर चाख लयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।८

नद हाकड़ सीर समेत निठा, कर आनन पान अलोप करे।
उगडै दल़ मोतिय मांय अमोलक,कोड़ सभी कर ठांम भरे।
कर क्रोड़धजा निज दास कई, दुख दारिद मात नसाय दयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।९

धर माड सिधावत जांण जदे मन म्लेच्छ महीपत क्रोध जगे।
मग रोकण मात तणो सठ आतुर,फौज चढायर लार भगे।
कर कोप हुँकार भरंत हि आवड़, सैन समेत भसम्म कियो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।१०

कुल़ सेन समेत नसाय खल़ां,अवनी अघ आप उथाप तभी।
थिर राज सुथाप समा जदु भाटिय , सिंध धरा बगसाय सभी।
जस कीरत आप अमाप दशोदिश, छावत मोद उछाव छयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।११

जन जांण जदे जगमात ने आवत,होड़ हिये हद मोद भरे।
पग मंडण मग्ग बिछायर मोतिय, स्वागत चौक पुराय करे।
सरसै सुख सातहि सात सरूप में, लाभ अमोलक लोक लयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।१२

रण कंकण रात रुके मग जावत, पन्नग पीवण भ्रात डसे।
जद जाणिय हाणिय प्राण सहोदर, लोवड़ ताणिय प्राचि दिसे।
झट लोवड़ ओट लुकाय रवी रथ, ऊगत भांण रुकाय दयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।१३

पद दाब दिराय थिरा गति थामिय, सामिय लोवड़ तांण रवी।
अनुजा निज खोडल़ भेज पयाल़ सु,पायस बेग मंगाय तभी।
झट भ्रात जिवाय पिलाय अमी,रवि शोड़स पोर रुकाय लयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।१४

विनती सुणके घण राव तणू,किरपा उर आप अती विकसे।
धन संपत आप समाप मया, मन भावन माड़ धरा बगसे।
बणके कुल़देविय सांग बिराजिय, भाटिय वंश सनाथ कयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।१५

लख माड़ धरा मझ त्रास महा,झट मेटण आप उपाय करे।
निज पांण त्रिशूल़.हि तांण दयानिधि,तैमड़ दांणव प्रांण हरे।
गिरि कंदर अंदर देय शिला, निज पाण सुं थाऔण महाण थयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।१६

कर धार त्रिशूल़ महा सुख मूल़ सबै विध सेवक साय खड़ी।
जुग आद अनाद सरूप नमो सुरराय सुशोभित सिंह चढ़ी।
वरदा वरदाय सदा सुखदाय निभाय मया निज दास लयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।१७

विनती वरदाय करूं पड़ पाय सुणों सुखदाय मया श्रवणां।
तन मानुष पाय गमाय वृथा गुणगान न.गाय सक्यो रसना।
भगती बगसाय सदा सुखदा, शरणै “जय ‘बाल़” नें राज लयो।
जय मावड़ आवड़ बीसभुजा बड, लाखिय लोवड़वाल़ जयो।
जिय माड धिराणिय माय जयो।।जिय मामड़ियाल़िय मात जयो१८

।।दोहा।।
प्रणत शरण निज पात नें, सरसावण सुख सात।
सात सरूपम सोहणी, जय आवड़ जग मात।।१
शोभित दिव्य सरूप में,सातूं.बहिनां साथ।
भल़कै आभा भांण सम, जय आवड़ जग मात।।२

।।छप्पय।।
जय आवड़ जग मात,धजाबंध मात धिराणी।
जय आवड़ जग मात,कल़ा पूरण कतियांणी।
जय आवड़ जग मात,सकल़ कुल़ भांण सुहांणी।
जय आवड़ जग मात, प्रगट तिहुलोक पुजांणी।।
तुंहि राय तखत मढ़ तैमड़ै,तुहिं आस पूरणी डावड़ां।
जुग पांण जौड़ शिशु “जय “जपै जयति मात जय आवड़ा।।१

जय आवड़ जग मात,बावन मेख विड़ारै।
जय आवड़ जग मात,नांम बावन निज धारै।
जय आवड़ जग मात,बावन धांम विराजै।
जय आवड़ जग मात,वीर बावन संग साजै।
प्रिय धांम परम राजै प्रसन, तुंहि प्रणत हेत मढ तैमड़ा।
जुग पांण जौड़ शिशु “जय “जपै, जयति मात जय आवड़ा।।२

।।दोहा।।
हुं पायक पद कमल़ रो, प्रतिपाल़क तूं पात।
विरद अभय वरदायिनी, जय आवड़ जग मात।।१
भाव नशो हिरदे भरो, हरख धरो सिर हाथ।
आस पुरण व्रद आपरो, जय आवड़ जग मात।।२
शरणागत निज दास नें, सबविध करण सनाथ।
आदू बड़पण आपरो, जय आवड़ जग मात।।३

~~जय सिंह सिंढायच मण्डा (राजसमन्द)

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