जीत रण बंका सिपाही – कवि मोहन सिंह रतनू

आज संकट री घडी हे,
देश पर विपदा पडी हे,
कारगिल कसमीर मे,
कन्ट्रोल लाइन लडखडी हे।
जुध रो बाजे नगारो,
सुण रह्यो हे जगत सारो,
दोसती री आड दुसमण,
पाक सेना अड़वड़ी हे।
सबक तु इणने सिखावण, जेज मत बीरा लगाई।
जीत रणबंका सिपाही, जूंझ रण बंका सिपाही।।१।।[…]

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લોક સાહિત્યના કલાધરઃ શ્રી મેઘાણંદ ગઢવી

મેધાવી કંઠના સુપ્રસિદ્ધ વાર્તાકાર મેઘાણંદ ગઢવીનો જન્મ ઘેડ વિસ્તારના છત્રાવા ગામે ચારણ જ્ઞાતિની લીલા શાખના ખેંગાર ગઢવીને ત્યાં સંવત ૧૯૧૮માં થયો હતો.

લોકસાહિત્યના ક્ષેત્રમાં “લોકવાર્તા” આગવું સ્થાન ધરાવે છે. પહેલાના જમાનામાં આવી લોકવાર્તાઓ જામતી. કોઈ રાજદરબારે, પણ આતો જનસમાજની વાતું જનસમાજમાં સહુને સાંભળવી હોયને! પોતાની રત્ન સમી સંસ્કૃતિની ગાથાથી જનસમાજ કેમ વંચિત રહે? અને આમ મેઘાણંદ ગઢવી જેવા પ્રચંડકાય વીર વાર્તાકારના બુલંદ કંઠને આમજનતા સમક્ષ વહેતો મૂક્યો શ્રી ગોકળદાસ રાયચૂરાએ.[…]

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चारण साहित्य का इतिहास – डॉ. मोहन लाल जिज्ञासु

| कड़ी – ७ | पहला अध्याय – विषय प्रवेश
| धारावाहिक श्रंखला – प्रत्येक मंगल, शुक्र एवं रविवार को प्रेषित
| प्रसंग – ‘चाारण’ जाति का विशेष अध्ययन

(घ) समीक्षा:- चारण जाति का देवता की संतान होने का दावा एक कल्पना है। यदि चारण देवता है तो अन्य जातियों के लोग फिर क्या हैं? आर्ष ग्रंथों का चारण किसी जाति का परिचायक न होकर एक विशेषण है, जिसका अर्थ है- कीर्ति का गायक। यजुर्वेद की ऋचा में कोई प्रार्थना करता हुआ कहता है कि में मनुष्य, ब्राह्मण, राजा, शूद्र, वैश्य अपने तथा अन्य लोगों के लिए कल्याणकारी वचन बोलूं। वैदिक युग में आर्यावर्त में आर्य ही निवास करते थे।[…]

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जीत रण बंका सिपाही! – कवि मोहन सिंह रतनू

आज संकट री घडी है।
देश पर विपदा पड़ी है।
कारगिल कश्मीर में,
कन्ट्रोल लाइन लडखड़ी है।
जुध रो बाजै नगारो।
सुण रह्यो संसार सारो।
दोस्ती री आड दुसमण,
पाक सेना अडबड़ी है।[…]

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भगत माला रा सवेया – कवि रिड़मलदाँन बारहठ (भियाड़)

।।सवैया।।
नाँम जप्यो ध्रुव बालक नैम सु तात उताँन नही बतलायो।
लागिय धूँन अलँख धणी लग नारद मूनिय मँत्र सुणायो।
आद गुगो जुग ऐक अखँडज आसण ध्रूव अडिग थपायो।
राँम जपो नित नाँम रिड़ँमल सँतन को हरि काज सरायो।
ईस्वर सँकट मैटण आयो।।१[…]

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महात्मा ईसरदासजी री महिमा रा सोरठा – शुभकरण जी देवऴ (कूंपड़ास)

मालाणी धर मांयने, भल सांसण भाद्रेस।
जिथ सूरै घर जनमियो, (उण) ईसर ने आदेस।।

ज्वाला गिरी जोगी जबर, गिर हिम निज तन गाऴ।
सुत जनम्यौ सूरा घरै, भगतां रो भूपाऴ।।

कज हरि तो हरिरस कथ्यौ, देवी कज देवियाण।
सुंण कुंडऴियां संचरै, सूरापण सुभियांण।।

मिस निंदा अस्तुति मुणी, वऴ कथ गुण वैराट।
ईसर इण विध अलखरा, ठाह्या भगती ठाट।।[…]

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अम्बिका इन्द्रबाई – गौरीदान जी कविया

गौरीदान जी कविया गांव कुम्हारिया रा वासी माँ करणी जी रा मोटा भगत अटूट आस्थावान विचारधार अर दृढ धारणा रा धणी माँ भगवती भव भय भंजनी रा भजन मे मगन रहिया अर सदा सर्वदा माँ री शरणागत सेवा साधना मे जीवन समर्पित राखियो, आज री चितारणी में गौरीदान रो भुजंगप्रयात छंद।

।।छंद भुजंगप्रयात।।

क्रमं युक्त दोशी कलि काल आयो।
ज्वितं पात यूथं अनाचार छायो।
धरा भार उतार वा मात ध्याई।
बिराजै तुहीं अम्बिका इन्द्रबाई।।[…]

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वीर प्रसूता चारणी

….कहते हुये उनकी आँखें भर आयी, सुनते हुये मेरी भी। फिर कहा, “तुम जानती हो, उसे वीर चक्र मिला। उसने अपना वादा तब भी निभाया। जिस सम्मान का हकदार वो था, मेरे ही हाथों से लिया गया। पीएम के हाथों मेडल लेते हुये मुझे गहरा खालीपन भी दिखता तो गर्व कर जाती। पर मैं क्या करूँ बेटा …तब मुझे देपाल का चेहरा दिख गया …याद आ गया ..सब सूना था ….सब कुछ ही खाली ..। शहीद होकर भी मेरी जिम्मेदारी उम्रभर की उसने ही ले रखी है। पेंशन के पैसे जब भी हाथ में उठाती हूँ, तब-तब गला रुँध जाता है। […]

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चिड़कली

तूं तो भोल़ी भाऴ चिड़कली।
दुनिया गूंथै जाऴ चिड़कली।।

धेख धार धूतारा घूमै।
आल़ै आल़ै आऴ चिड़कली।।

मारग जाणो मारग आणो
हुयगी अब तो गाऴ चिड़कली।।

बुत्ता दे बस्ती भरमावै।
वै ई पैरै माऴ चिड़कली।।[…]

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राजस्थानी भाषा

संसार की किसी भी भाषा की समृद्धता उसके शब्दकोष और अधिकाधिक संख्या मे पर्यायवाची शब्दो का होना ही उसकी प्रामाणिकता का पुष्ट प्रमाण होता है। राजस्थानी भाषा का शब्दकोष संसार की सभी भाषाओं से बड़ा व समृद्धशाली बताया जाता है। राजस्थानी में ऐक ऐक शब्दो के अनेकत्तम पर्यायवाची शब्द पाये जाते है, उदाहरण स्वरूप कुछेक बानगी आप के अवलोकनार्थ सेवा में प्रस्तुत है।

।।छप्पय।।

।।ऊंट के पर्यायवाची।।

गिडंग ऊंट गघराव जमीकरवत जाखोड़ो।
फीणानांखतो फबत प्रचंड पांगऴ लोहतोड़ो।
अणियाऴा उमदा आखांरातंबर आछी।
पीडाढाऴ प्रचंड करह जोड़रा काछी।[…]

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