रँग शीलां रखवाल़िया,जोर झिणकली झाड़!!

एक जमानो हो जद अठै रा नर-नारी मरट सूं जीवण जीवता अर सत रै साथै पत रै मारग बैवता। हालांकै धरती बीज गमावै नीं आज ई ऐड़ा लोग है जद ई तो ओ आकाश बिनां थांभै ऊभो है पण उण दिनां री बातां बीजी।

बीसवैं सईकै री बात है भाडली(जैसल़मेर) रा भाटी रुघजी मानसिंहजी रा (रुघराजजी /रुघनाथजी) धाट रै गांम छौल़ रै सोढां रै अठै परण्योड़ा हा। उणां री जोड़ायत सोढीजी, जापो करावण सारू आपरै पीहर छौल़ गयोड़ा हा। जापो हुयो। सोढीजी बेटे री मा बणिया। दोनां जागा बधाइयां बंटी। हरख हुयो।[…]

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मिनखां सूं अब टऴिया गांव

मिनखां सूं अब टऴिया गांव।
भूतां रै संग भिऴिया गांव।।

दूध दही री नदियां बैती
दारू सूं अब कऴिया गांव।।

सल़िया सऴिया नेही होता
करै कुचरणी अऴिया गांव।।

खुद री नींद सोवता उठता।
अब तो है हांफऴिया गांव।।[…]

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रतनू-रतनमाल़ा

मान कमध रै माथ,धणी रूठो छत्रधारी।
जद घिरियो जाल़ोर,भड़ चढै बल़ भारी।
हियै वीर हैकंप,धीरता छूटी धीरां।
उण वेल़ा अजरेल,गाढ तजै गँभीरां।
मयाराम नै नर मेघड़ो,कुशल़ इंद वर कीरती।
रणबीच झली उर रतनुवां,चढ तरवारां चीरती।।[…]

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आपो वोट अमोल

चाह मिटी ना चिंत गी, चित में रयो न चैन।
सब कुछ ही हड़पड़ सज्या, दिल में व्यापी देन।।

आता के उपदेश कज, हर ले कछु हरमेस।
संत करै ज्यां सामनै, इधक लुल़ै आदेश!!

मैं-हंती ना मद तज्यो, देख चढ्या घण दंत।
चकरी चढ्या चुनाव री, सो जो सुणता संत!!

दुख में ले कानो दुसट, सुख में पाल़ै सीर।
गरज पड़्यां आवै गुड़क, झट ऐ मेल जमीर।।[…]

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शरणाई राजपूत रै कारण अगन रो वरण

चारणां में बीठूजी री वंश परंपरा में गांम साठीका(बीकानेर) में बोहड़जी मोटा कवेसर हुया। इणां री ज वंश परंपरा में धींधोजी हुया। धींधोजी री वंश परंपरा में रासोजी धींधा हुया जिणांनै खाबड़ियां झिणकली(बाड़मेर) गांम दियो। कोई कैवै उदयसिंह खाबड़िया ओ गांम दियो तो कोई कैवै रिड़मल खाबड़िया ओ गांम दियो।

आं रासाजी री परंपरा में मेहाजी दूसलोत मोटा कवि हुया जिणांनै जोधपुर राव मालदेवजी खेड़ी गांम देय सम्मानित किया। इणी झिणकली गांम में आगै जायर महादानजी, भानोजी आद बीठू हुया। जोपियोड़ो कड़ूंबो अर भला मिनख। कनै घणी जमी घणो वित्त।[…]

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गीत सींथऴनाथ गोरैजी रो

।।गीत – प्रहास साणोर।।
पेख पड़ी आ गरज उण सनातन पुरातन,
सुणै झट अरज चढ आव सामा।
नेहधर फरज नैं तावऴो निभावण,
मिहारी दरज कर बात मामा।।1

रेणवां धरा रा पोरायत राजवै,
साजवै मदत नित राख सोरा।
अभै रह हमेसा आपरै आजवै,
गाजवै सींथऴ धर तुंही गोरा।।2[…]

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रंग मा पेमां रंग!!

बीकानेर रो दासोड़ी गांम जीवाणंदजी/ जीवराजजी/ जीयोजी रतनू नै बीकानेर राव कल्याणमलजी दियो। बात चालै कै जद आधै बीकानेर माथै जोधपुर रा राव मालदेवजी आपरी क्रूरता रै पाण कब्जो कर लियो। गढ में उणां आपरा खास मर्जीदान कूंपा मेहराजोत नै बैठा दिया जद कल्याणमलजी अठीनै-उठीनै इणां नै काढण खातर फिरै हा। जोग सूं आपरै कीं खास आदम्यां साथै बाप रै पासैकर निकल़ै हा जद बधाऊड़ा गांम में इणांनै जीवराजजी आसकरणोत गोठ करी। जीवराजजी रो व्यक्तित्व, वाकपटुता, मेहमाननवाजी आद सूं प्रभावित हुय’र कल्याणमलजी कह्यो कै- “बाजीसा आप तो बीकानेर म्हारै गुढै ई बसो! म्हैं आपनै उठै ई गांम देऊंला। आप आवजो।”[…]

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नेह रो दरियाव दिवलो

नेह रो दरियाव दिवलो,
गेह नै उपहार दे।
श्याम-बदना रात रै,
झट गात नै सिंणगार दे।
तन बाऴ जोबन गाऴ नै,
उपकार रै पथ प्रीत सूं।
ओ जीत रो जयकार दिवलो,
तिमिर नै ललकार दे।।[…]

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मानवकल्याण रै चिंतन रो सुभग संदेशः वेदार्थ चिंतामणि

आपांरै महताऊ ग्रंथां रो मंथण कर’र मानखै सारू ज्ञान रूपी माखणियो काढणिया एक महात्मा हुया है परमहंस स्वामी माधवानंदजी। उणां गुजराती में एक पोथी लिखी ‘वेदार्थ चिंतामणि‘। आ पोथी राजर्षि नाहरसिंहजी तेमावास पढी तो इणां नै लागो कै ऐड़ी जनकल्याणकारी पोथी राजस्थानी मानखै रै हाथां पूगणी चाहीजै ताकि ऐ ई आपरो कल्याणकारी मार्ग चुण आपरो हिंत चिंतन कर सकै। इणी पावन ध्येय नै दीठगत राख’र आप इण पोथी रो राजस्थानी में अनुवाद कियो।

निसंदेह मानव कल्याण करण वाल़ी आ पोथी आम मिनख सारू अंवेरणजोग है। नाहरसिंहजी नै लागो कै वेदार्थ जैड़ै गूढ विषय नै बोधगम्य बणाय’र आमजन तांई पूगायो जावै ताकि ईसरदासजी बारठ रा ऐ भाव फलिभूत हुय सकै तो साथै ई ऋषि ऋण परिशोध रो काम ई साधियो जा सकै-

भाग वडा तो राम भज, दिवस वडा कछु देह।
अकल वडी उपकार कर, देह धर्यां फल़ ऐह।।[…]

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मतदातावां सूं अरज

।।छंद – भुजंगी।।
सुणै बैठनै जाजमां बात सारी।
करै पीड़ हरेवाय हाथ कारी।
जको जात -पांति नाहि भेद जाणै।
तिको आपरै द्वार पे त्यार टाणै।
विचारै सदा ऊंच नै साच वैणो।
दिलां खोल एड़ै नैय वोट दैणो।।[…]

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