श्रीराम वंदना

।।छंद – मधुभार।।

करुणा निकेत,हरि भगत हेत।
अद्वैत-द्वैत, सुर गण समेत।१
हे वंश हंस।अवतरित अंश।
नाशन नृशंश।दशकंध ध्वंश।।२
रघुनाथ राम। लोचन ललाम।
कोटिश काम।मनहर प्रणाम।।३
मुखहास मंद।कारूण्य कंद।
दशरथ सुनंद।दुखहरण द्वंद।।४
वर वदन चंद।केहरी स्कंध।
जय जगतवंद्य।छल हरण छदं।।५

» Read more

सुंधा मढ ब्राजै सगत

छपन क्रोड़ चामुंड अर, चौसठ जोगण साथ।
नवलख रमती नेसड़ै, भाखर सूंधा माथ।।१

झंडी लाल फरूकती, जोत अखंडी थाय।
मंडित मंदिर मात गिरि, राजे सुंधा राय।।२

रणचंडी दंडी असुर, सेवक करण सहाय।
बैठी मावड़ बीसहथ, सगती सुंधाराय।।३

डाढाल़ी दुख भंजणी, गंजण अरियां गात।
भाखर सुंधा पर भवा!, चामंड जग विख्यात।।४[…]

» Read more

अंबा स्तवन

।।छंद त्रिभंगी।।
अयि!उमा अपरणा, हर मन हरणा, वेद सु बरणा, सुर सरणा।
उर आनंद भरणा, करुणा करणा, नेह निझरणा, बहु वरणा।
वपु गौर सुवरणा, पाप प्रजरणा, सौख्य सुभरणा, सुख स्तंभा।।
भज मन भुजलंबा! कृपा कदंबा! जय जगदंबा! श्री अंबा!
जय जय जगजननी जगदंबा!!१[…]

» Read more

शंकर स्मृति शतक – कवि अजयदान लखदान जी रोहडिया मलावा

लीम्बडी में राजपूत समाज द्वारा लीम्बड़ी कविराज शंकर दान जी जेठी भाई देथा की प्रतिमा का अनावरण दि. ११-मार्च-२०१९ को हुआ। कविराज शंकरदान जी से स्व. अजयदान लखदान जी रोहडिया मलावा बीस वर्ष की आयु में एक बार मिले थे और उस एक ही मुलाकात में इतने अभिभूत हुए कि जब कविराज शंकरदान जी जेठी भाई देथा लीम्बड़ी का देहावसान हुआ तब उन्होंने उनकी स्मृति में पूरा “शंकर स्मृति शतक” रच डाला। जो बाद में “शंकर स्मृति काव्य ” और “सुकाव्य संजीवनी” मैं शंकर दान जी देथा के सुपुत्र हरिदान जी देथा नें संपादित काव्य में समाहित किया।[…]

» Read more

ग़ज़ल – रक्स में आसमान होता है।

जब मुझे तेरा ध्यान होता है।
औलिया का गुमान होता है।।१

इश्क ज्यों ज्यो जवान होता है।
उसका जल्वा अमान होता है।।२

मन में खुश्बू बिखेर दे हर सू,
प्यार गुगल लोबान होता है।।३[…]

» Read more

अभिराम छबि घनश्याम की

।।कवित्त।।

मोरपंखवारा सिर, मुकुट सु धारा न्यारा,
नंद का कुमारा ब्रज, गोप का दुलारा है।
कारा कारा देह, मन मोहता हमारा गिध,
गनिका उबारा अजामिल जिन तारा है।
वेद श्रुति सारा “नेति नेति” जे पुकारा, जसु-
मति जीव-प्यारा मैने, उर बिच धारा है।
आँखिन की कारा बिच घोर हा अँधारा, सखि !
कृष्ण दीप बारा, तातें फैला उजियारा है।।१[…]

» Read more

रे बाजे समदर तीरां

।।गीत जात बुध चित्त विलास।।

रे बाजे समदर तीरां!
मादल़ डफ चंग झांझ मंजीरा!
नवलख संग नित रास रमे रव गूंजे गगन गंभीरा!
घरर घरर समदर घुघवाटे,निरमल़ उछल़त नीरा!
समदर तीरा![…]

» Read more

इक टक उन को जब जब देखा – ग़ज़ल

इक टक उन को जब जब देखा।
हम ने उन मे ही रब देखा।।१

लोग पुकारे “निकला चंदा”
छत पर उनको कल शब देखा।।२

साँझ सकारे त़का उन्ही को,
आन उन्हीं के कुछ कब देखा?३

“मय के प्याले लगे छलकने”,
माह जबीं का जब लब देखा!!४[…]

» Read more

आव योगिनी बण अठे

आज चाल आकास रो, आपां देखां छोर।
म्है थांनें देख्या करूं, थें देखो मम ओर।।१

मन री गति सूं मानुनी, आवौ मम आवास।
छत पर दोन्यूं बैठ नें, देखांला आकास।।२

गिण गिण तारां रातड़ी, आज बिताद्यां, आव!
अर दोन्यूं ल्यां नाप फिर, आभ तणौ उँचाव।।३[…]

» Read more
1 2 3 28