अभिराम छबि घनश्याम की

।।कवित्त।।

मोरपंखवारा सिर, मुकुट सु धारा न्यारा,
नंद का कुमारा ब्रज, गोप का दुलारा है।
कारा कारा देह, मन मोहता हमारा गिध,
गनिका उबारा अजामिल जिन तारा है।
वेद श्रुति सारा “नेति नेति” जे पुकारा, जसु-
मति जीव-प्यारा मैने, उर बिच धारा है।
आँखिन की कारा बिच घोर हा अँधारा, सखि !
कृष्ण दीप बारा, तातें फैला उजियारा है।।१[…]

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रे बाजे समदर तीरां

।।गीत जात बुध चित्त विलास।।

रे बाजे समदर तीरां!
मादल़ डफ चंग झांझ मंजीरा!
नवलख संग नित रास रमे रव गूंजे गगन गंभीरा!
घरर घरर समदर घुघवाटे,निरमल़ उछल़त नीरा!
समदर तीरा![…]

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इक टक उन को जब जब देखा – ग़ज़ल

इक टक उन को जब जब देखा।
हम ने उन मे ही रब देखा।।१

लोग पुकारे “निकला चंदा”
छत पर उनको कल शब देखा।।२

साँझ सकारे त़का उन्ही को,
आन उन्हीं के कुछ कब देखा?३

“मय के प्याले लगे छलकने”,
माह जबीं का जब लब देखा!!४[…]

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आव योगिनी बण अठे

आज चाल आकास रो, आपां देखां छोर।
म्है थांनें देख्या करूं, थें देखो मम ओर।।१

मन री गति सूं मानुनी, आवौ मम आवास।
छत पर दोन्यूं बैठ नें, देखांला आकास।।२

गिण गिण तारां रातड़ी, आज बिताद्यां, आव!
अर दोन्यूं ल्यां नाप फिर, आभ तणौ उँचाव।।३[…]

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राधारमण देव स्तवन

।।छंद त्रिभंगी।।
हे हरि मन हरणं, अशरण शरणं, राधा रमणं, गिरिधरणं।
आपद उद्धरणं, नित प्रति स्मरणं, सुधा निझरणं, बरु चरणं।
ब्रजधाम विचरणं, कुंडल़ करणं, वारिद वर्णं, जगवंद्या।
माधव मुचकुंदा!, नागर नंदा!, बालमुकुंदा! गोविंदा!!१!![…]

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नज़्म – नजर नें छू लिया जिस दम

नजर नें छू लिया जिस दम तो मेरे दिल ने ये सोचा,
यहाँ पर हर किसी का चाँद सा चेहरा नहीं होता।
मगर फिर भी मुझे वो चाँद का ही अक्स लगता है,
नहीं तो इस कदर मह दीद को ठहरा नहीं होता।१

जेहन में जिक्र आता है जब उस रूखसार का मुझको,
तो दिल मेरा पुकारे है वो गहरी झील सा होगा,
पतंगा बन मेरा मन जलने को बेताब सा होगा,
और वह भी इश्क में मेरे जला कंदील सा होगा।।२[…]

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वठे झबूकै बीजल़ी

।।दोहा।।

आज मँड़ी सावण झड़ी, बड़ी पडी बरसात,
नड़ी नड़ी नाची सखी, खड़ी खड़ी हरखात।।१

बरसे नभ में वादल़ी, घूंघट बरसे नैण।
तरुणी पिव बिन तरसती, सावण घर नीं सैण।।२

वठै झबूकै बीजल़ी, अठै झबूकै नेण।
बरसो घन ह्वै बालमा!, सावण में सुखदेण।।३

बीज पल़क्कै बिरह री, नैण छलक्कै नीर।
रैण ढल़क्कै राज! बिन, धारूं किण विध धीर।।४[…]

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दई न करियो भोर

।।दोहे।।
कजरी, घूमर, लावणी, कत्थक, गरबा, रास।
थिरकूं हर इक ताल पे, जब आये पिय पास।।१
बीण, सितार, रबाब, ड़फ, मुरली ढोल मृदंग।
जब वो आए ख्वाब में, सब बाजै इक संग।।२
खड़ी याद की खेज़ड़ी, मन मरुथल के बीच।
शीतल जिसकी छाँव है, सजन! स्नेह जल सींच।।३
अँसुवन काजल कीच में, खिले नैन जलजात।
खुशबू से तर याद की, मन भँवरा सुख पात।।४[…]
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जावण नीं द्यूं नंदकुमार

जावण नी द्यूं नंद कुमार!
रोकण करसूं जतन हजार!

नैण कोटड़ी राज छुपायर, बंद पलक कर द्वार।
दिवस रैण प्हेरो हूं देवूं, काढे़ काजल़ कार!।।१

जावण नी द्यूं नंद कुमार!
रोकण करसूं जतन हजार!

रोज रीझावूं रसिक मनोहर, निज रो रूप निखार।
प्हेर पोमचो नाचूं छम छम, सज सोल़े सिणगार।।२[…]

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गंगा स्तवन

🌺दोहा🌺
जय गंगे! जय जाह्नवी, तरल तरंगे आप।
शंकरमौलि विहारिणी, सुरसरि हर संताप।।१
अच्युत-चरण-तरंगिणी, हिमगिरि करण विहार।
जय पातक हर जाह्नवी, हे! जग पाल़णहार।।२

🌷छंद त्रिभंगी🌷
अंबा-अरधंगे!, हणण अनंगे!, मस्त मलंगे!, मातंगे!
भूतावल़ स़गे!, कंठ भुजंगे!, भव! भसमंगे!, तन नंगे!
पीवत नित भंगे!, उण उतबंगे!, रमणी रंगे, मनहारी!
जय भगवति गंगे!, तरल तरंगे, सरल सुचंगे, अघहारी!!१[…]

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