भजन महिमा – जनकवि ऊमरदान लाल़स

।।छंद मधुभार।।
अथ ओमकार। अक्षर उचार।
निस दिवस नाम। रट राम राम।।१
द्वै सुलभदीप। श्रद्धा समीप।
रुचि ह्वै सु राख। दुहु दिव्य दाख।।२
मम इष्ट मिष्ट। आदर अभिष्ट।
महिमा मनोग्य। जप तपन जोग्य।।३
माधूर्य मेह। आसार एह।
सदगुरु समान। जीवन जहान।।४
चित प्रथम चेत। उल्लू अचेत।
यह तन अयान। न स्थिर निदांन।।५
बचि.है न वीर। तरु सिंधु तीर।
इक दिवस यार। है गिरनहार।।६
उड़ विहग इच्छ। विश्राम वृच्छ।
जिह छांह जीव। सुख ह्वै सदीव।।७
तहँ नहिं तमांम। घन सीत घांम।
फल फूल फार। अध्वग उदार।।८
नहिं पहुँच नीच। माज्जार्र मींच।
सावज न संक। निद्रा निशंक।।९
मन मान मोर। छल छंद छोर।
प्रभू परस पाय। अन्तिम उपाय।।१०
मांनापमान। सुखदुख समान।
मदमोह मेट। भगवन्त भेट।।११
इल है न आंन। सदगति सुथान।
गुन गर्व गेर। ह्रदयान्त्र हेर।।१२
तव तत्व तीन। अन्तर अधीन।
भव त्याग भोग। जब जुरहिं जोग।।१३
चुप चतुर पाय। सुमरण सहाय।
लय लीन लच्छ। परिचय प्रतच्छ।।१४
अतिशय अगाध। ईश्वर अराध।
सत सिंवर सद्य। अपवर्ग अद्य।।१५
मन्तव्य मान। गंतव्य ग्यान।
वेदक विधांन। धर ध्येय ध्यांन।।१६
सुन जाग सूर। चंद्रार्क चूर।
सुख मन संचार। अमृत अपार।।१७
निरझर निहार। त्रपुटी नितार।
निश्तेय नीर। सुधकर सरीर।।१८
संयम सहाय। अल अन्तराय।
परिहरहू पीर। तुरियाब्धि तीर।।१९
त्रहु ताप तोर। घन नाद घोर।
आश्चर्य एह। दुंधवि विदेह।।२०
सम दमन साद्य। सहजे समाद्य।
दस द्वार देख। आगे अलेख।।२१
शाश्वत स्वरूप। अवगन अनूप।
भुव गगन भूरि। सब साक्षि सूरि।।२२
मरियाद मित्र। पावन पवित्र।
धन्यास्ति धन्य। गुरु अग्रगन्य।।२३
सर्वग्य सेष। आवृति अशेष।
सब शक्तिमान। पूरण प्रधान।।२४
अह अद्वितीय। पद पूजनीय।
उत्साह अर्घ। मिलनो महर्घ।।२५
आभोग उर्ध। मग जगत मूर्ध।
साधन समग्र। अखिलेश अग्र।।२६
शिव शक्ति सीम। अनुभव असीम।
सिद्धांत सार। नित निराकार।।२७
ब्रह्मांड व्यास। परिधी प्रकास।
अति व्याप एस। व्यापक विशेष।।२८
वैराट वृद्ध। सानंद सिद्ध।
घट बढ न घाट। नूतन निराट।।२९
अद्भुत अमंद। सोभा समंद।
श्रुति सकलसार। वर्जित विकार।।३०
अज अमर ईश। सब लोक शीश।
शुभ शान्त शुद्ध। पालक प्रबुद्ध।।३१
चर अचर चिन्त। निश्चल निचिन्त।
नहि आदि अन्त। अगहर अनन्त।।३२
ऊरध अकास। पाताल पास।
सब ठौर सिद्ध। परिकर प्रसिद्ध।।३३
वैराग वृद्धि। सुख बल समृद्धि।
निरभय निसान। निरधन निधान।।३४
देवादि देव। सुर असुर सेव।
राजाधिराज। सविता समाज।।३५
परिपूर्ण प्रेम। निज न्याय नेम।
विग्यान विग्य। पूर्ण प्रतिग्य।।३६
गंभीर ग्यान। विस्मय विग्यान।
उद्योग आस्य। एको उपास्य।।३७
सामर्थ्य श्रेष्ठ। जग सकल जेष्ठ।
आ उदय अस्त। शिक्षक समस्त।।३८
मेधा महन्त। दीपत दिगन्त।
आदान ओघ। अक्षय अमोघ।।३९
धन धेनु धान्य। वंटक वदान्य।
जाहर जहान। मोदी महान।।४०
निरद्वंद नाथ। आश्रम अनाथ।
वह सृष्टिवास। प्रलयान्त पास।।४१
विश्राम व्यूढ। गोतीत गूढ।
निरगुण निरीह। आधार ईह।।४२
सूक्षम सरीर। व्याक्रति वहीर।
झीनातिझीन। चित विदित चीन।।४३
पद परम पूण्य। संकल्प शून्य।
निरबांण नित्य। अन्तर अनित्य।।४४
मनबुध अमान। पहुँचे न प्रान।
वाचक न वाच्य। वह पद अवाच्य।।४५
चहुधा चरित्र। वैष्णव विचित्र।
त्रैलोक तत्र। वह मिलत अत्र।।४६
परिब्रह्म पूर्ण। तत मग्न तूर्ण।
परमात्म प्राप्त। वह पुरुष आप्त।।४७
नम दयानंद। आनंदकंद।
उपदेस एस। दिनौ दिनेस।।४८
गो तिमिर गच्छ। सुझंत स्वच्छ।
दरसन दयाल। कृपया कृपाल।।४९
स्वामी सचेत। अतिगुन उपेत।
सेवक विसार। सो लीन सार।।५०
मम अमिय मूरि। द्रग तें न दूरि।
आत्मिक अधार। पाहुन पधार।।५१
बावन विधेय। सोपान श्रेय।
संपूर्ण साच। ऊमरो उवाच।।५२

~~जनकवि ऊमरदान लाल़स

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