भांजण भीड़ भगतन री – करनीजी री चिरजा

भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।टेर।।

पड़तां कूप कारीगर कूक्यो
साद सुणै सुरराई
सांधो दियो बरत रै सगती
बोगी बण बरदाई।।१
भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।

अटकी नाव समंद मग आधै
सायल साह सुणाई
तूं झट पूग काढ नै तरणी
लाल धजाल़ी लाई।।२
भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।

डिगियो भाग चौथ रो डागो
संत हुवो सरणाई
कारी देय जोड़ियो करहल
पुन निज धाम पुगाई।।३
भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।

कड़की तुंही कानियै ऊपर
उर मे क्रोध अणाई
हणियो प्राण सीस दे हत्थल़
सो चावी संकल़ाई।।४
भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।

आद प्रवाड़ा चावा अवनी
मुदै थारा महमाई
उर अग्यान ध्यान न आवत
वरणी न जाय बडाई।।५
भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।

बल़ू नहीं बीसहथ बीजो
कल़ू बधी कठिनाई
दीसै हेक तुंही पख देवी
काटण काष्ट किताई।।६
भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।

आगै दास उबारण आयल
अरध हेलै सूं आई
मन विश्वास आस दर मोटी
गिरधर चिरजा गाई।।७
भांजण भीड़ भगतन री मदत सजै मेहाई।।

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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