गीत मथाणियाराय रो

पहर एक प्रभात रा, अमर रुकूँली आंण।
प्रण पूरै प्रमेश्वरी, मरूधर नगर मथांण।।

।।गीत।।
अमर दूदहर आवियो तेड़वा ईसरी,
मया कर जोध पर आज माता।
सार कर रिड़ै-तण काज गढ सारजै,
निजर भर इमी री पाल़ा नाता।।1

जोध रो गुमर लख हिये में जोगेसर,
छाड मन धीर गंभीर छिड़ियो।
सापियो नाथ पत मंडोवर सांप्रत,
चहूंवल प्रसिद्ध जग नाथ-चिड़ियो।।2

अहर में जिती भां चीणिजै जगै ऊ,
भींत वा रात री धूड़ भेल़ी।
जोध मन संकियो साच मन जामणी,
अकल बिन मेहणत जाय ऐल़ी।।3

आप बिन दूसरो अबै नह उबारण,
जगत दध डूबती नाव झालो।
कमध री बधारण इल़ा मझ कीरती,
हाथ सूं दिरावण नींव हालो।।4

अरज सुण अमर री चढी रथ अंबका,
थंभका कीरती थपण ठावा।
पूग धर मंडोवर रीत धिन पोखणी,
चंडका प्रवाड़ा प्रिथी चावा।।5

सुकर थप नींव गढ- जोध री शंकरी,
दुआई आपरी प्रतख दीधी।
कुमख्या नाथ री मिटा कर करनला,
कमध री विपत्ति दूर कीधी।।6

पनर पनरोतरै मोरधज प्रिथी पर,
हरस कर ईसरी थप्यो हाथां।
जोधपुर आपरी दया सूं जोगणी,
वडम री वरी धिन किती बातां।।

थिरै रो थिरावस उणी पुल़ थापियो,
आपियो आपरो वरद आई।
जदै ई अमर जस तिहाल़ो जापियो,
वरद मुझ सीस राख अबै बाई।।8

महर कर मथाणै आई जद मावड़ी,
अमर घर सकल़ गल्ल करण आछी।
तांबापत्र चाखड़ां राखियो तल़ै दे,
बात विखियात जग सरब बाची।।9

पहर इक ठंभूली पात परभात रा,
अवन त्रिलोक सूं ऐथ आणै।
वचन नह पल़टसी दिया जो बीसहथ,
जुगोजुग वचन ऐ साच जाणै।।10

कैर करनी तणो खड़ो छै कलपतर,
धणी-थल़ तणी वा थपी धारा।
मथाणै नगर री आब इणसूं मनो,
सेवियां मनोरथ पूर सारा।।11

जपै कव गीधियो सुजस जग जामणी,
केहड़ी जेहड़ी करै कानै।
जोड़कल़ दिसा मत जोवजै जाहरां,
मावड़ी अरज मुज तुंही मानै।।12

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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