हे दिव्यात्मा!

हे दिव्यात्मा!
म्हांरै कनै फखत
तनै झुकावण नै माथो है
कै है
थारी मीठोड़ी ओल़ूं में
आंख्यां सूं झारण आंसू
कै
काल़जो काठो कर’र
तनै कोई मोटो
बदल़ो मान’र
मोह चोरणो ई रह्यो है सारू म्हांरै तो!
पण
तूं जिण माटी में जनम्यो
उणरै गौरव नै
अंतस संजोयां
उणरी आण सारू
बणग्यो उणरो ईज पाछो रजकण
अर म्हे!
बुद्धिजीवियां री
पढायोड़ी पाटी पढता रह्या
अर उणांरी देखादेखी
गोखता रह्या
माओ रै
चंडाल़ चेलां रो ज्ञान
कै
मार्क्स
रै
खोल़ायत
धूत पूतां री
माल़ीपाना लागोड़ी मेधा
कै
स्वारथ में आंधी हुय पांगरती प्रज्ञा
कै
किणी लालच में लिपटी संवेदना
रा करता रह्या बखाण!
माफ करजै
हे पुण्यात्मा!
आज तांई
म्हे ई
वा ई करतो रह्या
जिको
गांम रै देखीदेखी
करती रैवै है गैली!
म्हे ई कांई!
मोटा -मोटा टोकल़सिंघ ई
आंरै ज्ञान रै आगै हुवता रैवै है
नतमस्तक ।
कोई लाल सलाम रो
हाको कर’र
कोई
दातरियो कै
हथोड़ो लेय
सेवण कै
भाटां री ठौड़
किणी बापड़ै रो
कोई करम भांगदे
तो ऐ!
करम भांगणिये
रे पख में
झट कैयदै
कै
बापड़ै मरतै
आक चाबियो है!
कै
कोई मरियल कुत्तड़ी
खाय जावै ‘वाद’
तो ऐ उण
कुत्तड़ी री कीरत रा
पढता रैवै है
कसीदा
अर म्हे
डाफाचूक हुयोड़ा सुणता रैवां
आंरी
सौहार्द री परिभाषावां
पण
तूं माफ करजै!
कै
थारी
भसम
हमे नीं रैयी
म्हांरै सारू
लीलाड़ री सोभा!
क्यूंकै
म्हांनै
डर लागै
है
कै कोई
अतिवादी
कै उग्र राष्ट्रवादी रो
नीं देयदै म्हांनै तमगो!
म्हे तो ठैर्या
वोटां रा वौपारी!
थारै बलिदान री कूंत!
म्हे कूंतालां वोटां रै
झुखतै पालणै सूं!
तूं हुयो हुसी
सीमा री रुखाल़ी
करतो जूंझार
खाई हुसी
उगाड़ी छाती गोल़ियां
अरियां सूं कियो हुसी घमसाण
मातभोम रो गौरव मंडण नै।
छो!
म्हे नीं जाणां
थारी मा री ममता रो मोल
लाडी रै कोल री कीमत
अर नीं
महसूस हुवै म्हांनै
थारी वाट जोवता
थारै भोल़ै टाबरियां री
खुशी रै ख्वाबां अहसास रो।
पण
तनै पतियारो
दिरावां कै हां
कै
अजै म्हांनै ई जागै है
मसाणिया वैराग!
अर वैराग रै ओल़ावै
झाड़ालां
वैर लेवण रा भाषण
राल़ालां थूक रा आंसूं अर तनै चढावांला
कागज रा फूल
हे दिव्यात्मा !
तूं म्हांरी इण
काल़ी करतूतां नै
कर दीजै माफ!

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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