हिंगळाज माताजी री स्तुति। – कवि रामचंद्र मोडरी (राणेसर)

।।छंद-बिअख्खरी।।
अकळ पंथ कपारो अक्कळ।
कहिए खी मोथ कुंड कज्जळ।
कोहला परबत राय सकोमळ।
आदि अनादि हिंगोळ अणंकळ।।1।।

।।दोहा।।
कुंड कणिर अघोर कुंड, चंद्रकूप कुंड चाय।
सुरज कुंड जणिथे सळे, तुं थप्पे जगराय।।1।।
कमळा गोळा पाट कह, अलिल कुंड अणताग।
शगति ताहरी जो शरण, भला उणारां भाग।।2।।
हिंगोळा ताहरी शरण, (जो)सांचे भाव ग्रहाय।
(तौ) लखचौरासी आणरो, फेरो मिटे तिकाय।।3।।

।।छंद-बिअख्खरी।।
हिंगोळा सुध आपणहारी।
हाडा दाणव भंजणहारी।
भणे रामचंद मात भुजाळी।
कारण रुप नमो महाकाळी।।1।।

।।दोहा।।
मात हिंगोळां मेलिया, वीर भूत विकराळ।
हाडा माथे हल्लिया, करे कोप कांधाळ।।1।।

।।छंद-रुपमुकुंद (रोमकंद)।।
करि कोप कंधाळम वीर वडाळम भूत कढाळम साव भले।
भयभीत भुजाळम रोख रढाळम झुझ बराळम खाग झले।
मिळिया मतवाळम पेट पेटाळम काळम पाळम पंथ कमे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।1।।

हाडेतणी ताणम सैन सजाणम दैत जुआणम मेलि दळं।
रणि जंग मचाणम है जमराणम आग अवाणम मांय खळं।
खडि है खुरसाणम धज्ज धजाणम साहिकबाणम एणि समे।
तरसूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।2।।

हाडां शिर हल्लांय कीध हमल्लांय वीर वहल्लांय हाक वजे।
रणि देयण टल्लांय रोख रिझल्लांय सार नवल्लांय भीछ सजे।
जग राखण गल्लांय साव संभल्लांय दूत दझल्लांय थाट दमे।।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।3।।

बहुरुप बराळिय बुढ्ढीय बाळीय काळ कढाळिय रुप कळे।
हिंगळाज हठाळिय मात वडाळिय खेतल भाळिय वीर खळे।
वढतें वकराळिय जै जबराळिय नेक निहाळिय देव नमे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।4।।

कह शेष कुरम्मांय थे कमकम्मांय धम्माय धम्माय पीठ ध्रुजे।
हय थाट हसम्माय होय हकम्माय सम्माय सम्माय साव सजे।
आइयां अस रम्माय वीर वसम्माय सार दगम्माय तेण समे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।5।।

पळसूर पछट्टाय सार समट्टाय भांजि भ्रगट्टाय दूत भडे।
झळुंबे दोय जट्टांय थै त्रमझट्टांय वीर विकट्टांय मंस वडे।
रंग रंग रमट्टाय है अण मट्टाय भूत गरट्टाय वीर भमे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।6।।

हळबोळ हिलोळाय माचे हबोळाय लोळाय मांस रगत्त लिये।
दइतां भडटोळांय थ्या चकडोळाय दोळाय मार प्रहार दिये।
करि आप किलोळाय साथ सबोळाय भोळाय शंकर साथ भमे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।7।।

चडि हाडोय तारांय गाजि नगारांय दूत इयांराय ओप दळां।
वहे लार कतारांय है असवारांय जाणि अपारांय दध्ध जळां।
केड भीड कटांराय खाग दुधांराय ताराय साराय होय तमे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।8।।

असरांण खंधाराय वीर इयांराय लोए तिआरांय होय लडे।
वहते खग धारांय वैरि विडांराय पीठ पथारांय होय पडे।
तुटहे कंध जारांय दूत हडांराय जोगणि लांराय मंस जमे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।9।।

असरांण कट्टकिय वीज अट्टकिय मार झट्टकिय सोर मतु।
करमाळ बट्टकिय वीज कट्टकिय रेण रट्टकिय पीठ रतु।
तरशूळ खट्टकिय शीश त्रट्टकिय केक लट्टकिय दूत क्रमे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।10।।

करोधां भरि काळिय मां मछराळिय देवि दबाळिय दैत दळां।
भड साव भमाडिय घाव घुमाडिय खेल मचाडिय हाथ खळां।
प्रसणांण पछाडिय नर्क प्होचाडिय नेक नमाडिय देव नमे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।11।।

पाडिया भड हाडाय जाणक पाडाय दाणव जाडाय थाट दळे।
खिति पीठह नाडाय पूरीया खाडाय गाडां गमोगम मंस गळे।
लहवे सर जाडाय लीलंग लाडाय शंकर दादाय तेण समै।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।12।।

मइया महमाइय जुध्ध मचाइय आंण फिराइय मांय इळा।
मलेछां दळ ढाइय हार मनाइय खागसु वाहिय शीश खळां।
भर भूचर ध्राइय भाइय भाइय पेख वडाइय मोह प्रमे।
तरशूळ झले झळबोळ त्रिकाळिय रुप असेय हिंगोळ रमे।।13

।।कळस छप्पय।।
है माता हिंगोळ, मात आपे महाकाळी।
है माता हिंगोळ, खीर कुंड कज्जळ वाळी।
है माता हिंगोळ, रिअण कोहला रखवाळी।
है भाता हिंगोळ, दहण भड दैत डाढाळी।
राडिमें अडरणि रहवो अगे, भाळि तके साहमुं भणि।
रिध सिध दियण कह रामचंद, हींगळाज बाळोचणी।।1।।

~~कवि रामचंद्र मोडरी (राणेसर)
प्रेषित: नरहरदानजी बाटी (विरसोडा)

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