काली स्तवन-प्रबीन सागर से

महाकालिका मालिकामुंड धारा,
सबं श्रोन सीसं करं मुक्त बारा,
परं निर्भयं गाहिनी नग्गखग्गा,
ज्वलंती चिता में शवारूढ नग्गा,
महाकाल विप्रीत रत्ती रमस्ते,
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||१
महा विध्यया राजितं रक्त बंबा,
सधै जोग जोति अलौकिक अंबा,
त्रिनैनं सरोजं करं नील सज्जै,
कुचं गौर मुख्खं कला चंद्र लज्जै,
महारूद्र चित्तं कटाक्षं भ्रमस्ते,
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||२
भुवंनेश्वरी चंद्र रूपा रसाला,
धरे कुंडलं हेम मुक्ती सुमाला,
बँधै बार जूरा सु सिंगार सज्जै,
कटी किंकिनी पाय री जेह बज्जै,
रसं रंजितं नैन शंभु समस्ते,
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||३
बगल्ला कनंका समं हेम अंगा,
किरीटं ससी अंबरे पीत अंगा,
कुलीसं गदा पाश जीहा धरंती,
गरै चंपकं जूहि की वैजयंती,
महादेव संगा उछंगा बिसस्ते,
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||४
महम्माय धूमावती धूम्रदेहा,
करालं कला चंचला ज्वाल मेहा,
भयंकार द्रढ्ढा जयंकार प्रेता,
उरंपीन छिनंकटी दीन हेता,
भवा भीम जोगान भोगा त्रपस्ते,
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||५
जयो जोगिनी भोगिनी जा सुसंगे,
जयो जोगियं भोगियं जासु रंगे,
जयो दंपति जोग हासं बिलासं,
जयो कारूना रूप प्रेमं प्रकासं,
रखै लाज मां राज जोग सधस्ते,
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||६

प्रबीन सागर से

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