कर मत आतमघात – कवि मोहन सिंह रतनू

आत्म हत्या महा पाप है, विगत कई सालों से बाडमेर जिले में आत्म हत्याएं करने वालो की बाढ आ गई है। क्षणिक आवेश में आकर अपनी सम्पूर्ण इहलीला समाप्त कर देते हैं, इसके पीछै मानसिक अवसाद, आर्थिक तंगी, नाजायज रिश्ते, गृह कलह, मोबाइल का गलत उपयोग, जनरेशन गेप, मनोरंजन के साधनों का अभाव, नकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यो का पतन इत्यादि है। मैंने इस विषय पर कतिपय दोहे लिखे जो आपकेअवलोकनार्थ पेश है-

कायर उठ संघर्ष कर, तन देवण नह तंत।
पत झड रे झडियां पछै, बहुरि आय बसंत।।1

अंधकार आतप हुवै, मघवा बरसै मेह।
ऊंडी सोच विचार उर, दुरलभ मानव दैह।।2

लाख जनम तन लांघियो, पुनि मानव तन पात।
बिरथा देह बिगाड़ नै, कर मत आतम घात।।3

सुख दुख इण संसार मे, है विधना के हाथ।
दुर दिन सनमुख देखनै, कर मत आतम घात।।4

सदा नही संकट समय, सदा नही बरसात।
काल रहे नही थिर कदे, कर मत आतम घात।।5

सरमै पीहर सासरौ, लाजै परिजन लोक।
दाग मिटै नह दाग सूं, सब जीवण भर शोक।।6

परमेसर पूरण प्रभु, इण रे घर इंसाफ।
करे कूच बिन कायदै, तो मालिक करे न माफ।।7

सुख माया घर संचरै, हसी खुशी जद होत।
घर आवै विपदा घणी, मरै जकां बिन मोत।।8

दिल मे राख देशाणपत, मन रट करणी मात।
भली करै सब भगवत्ती, बण जावै सह बात।।9

तीन लोक तारण तरण, नमो त्रिलोकी नाथ।
आयो कस्ट उबारलै, कर मत आतम घात।।10

काबू रखणो क्रौध नै, मन रखणो मजबूत।
नैडाकर नह नीसरै, जिण पासै जमदूत।।11

मरै जकां बिन मोतडी, जीव नरक में जाय।
पोट उठावै पापरा, देव करे नह दाय।।12

खाणो, पीणो खरचणो, अपनी निज औकात।
पुनि पछताणो ना पडै, कर मत आतम घात।।13

मोहन कहै सुण मानवी, बडे ग्यान री बात।
रखे भरोसो राम रो, कर मत आतम घात।।14

~~मोहन सिंह रतनू,
से.नि. आर.पी.एस. जोधपुर

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