करणी माँ का गीत साणोर

।।दूहा।।
मायड़ तोरी महर सूं, तूटै विघ्न तमाम।
सटकै कारज सारणी, नमो ज करणी नाम।।1।।
रात दिवस इक रटन है, एक नाम इक काम।
मन री जाणणहार मां, नमो ज करणी नाम।।2।।
राज-पाट मांगूं नहीं, कोष कुबेर न चाय।
रोजी-रोटी राज सूं, मांगूं माथ निवाय।।3।।
देवणहार देसाणपत, पातां री प्रतपाळ।
सेवग री अरजी सुणो, प्रीत पुराणी पाळ।।4।।
ताक विवेकी तोल, कहण तणी है नीं कुबत।
बाळक मन रा बोल, (तूं) सांभळजे मेहासदू।।5।।

।।गीत – साणौर।।
धिनो धाबळा-धारणी करनला धिराणी,
धिनो देसाणपत धजा धारी।
अवन पर अवतर्या उबारण सेवगां,
मावड़ी मदद कर हमें म्हारी।।

जानकी तणी अरदास सुण जकी तूं,
थकी नां समंदां पार थाई।
पाहनां तणां पुळ तिराया तोय पै,
अम्बिका राम रै मदद आई।।

क्रोध कर इंद्र जद ब्रज पै कोपियो,
गोपि ओ ग्वाल पर गजब ढायो।
कान्ह रै रूप में शैल वो करनला,
आंगळी छोटकी पै उठायो।।

अगन री लपट में दाझतां उबारै,
तोय में डूबंता भगत तारै।
जंग में सेवगां हेत भल जूंझणी,
मावड़ी रहीजे संग म्हारै।।

गीत री रीत रो रती भर ग्यान नीं,
छंद रै बंध रो बोध छानों।
गती, लय, यती अर गणां री गिणत रो,
मती ना मावड़ी दोष मानों।।

परखनद मांय पतवार तें परोटी,
रोग-आरोग री राड़ मेटी।
अवर सब अड़चना आप अंगेजली,
छः हमें वरीयता बात छेटी।।

कर्या सब आजलग काज तें करनला,
मावड़ी तूं ही (अब) मेरीट मांडी।
रखाई हमेशा बियां ही रखाजे,
डोकरी चूकजे मती डांडी।।

चैक ना जेक ना पेक ना चंडिका,
आसरो आपरो एक आई।
आवजे बीदगां अरज सुण आवड़ा,
बिरद री बाट पर चाल बाई।।

~~डॉ. गजादान चारण “शक्तिसुत”

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