काव्य-कलरव सांंस्कृतिक संगम एवं स्नेह मिलन समारोह (१३-१४ जुलाई २०१९ खुड़द)


कार्यक्रम:

दिनांक १३ जुलाई, २०१९
५ से ७ बजे – परिचय सत्र
७ से ८ बजे – ज्योत एवं आरती
८ से ११ बजे – काव्य गोष्टी एवं छंद पाठ

दिनांक १४ जुलाई, २०१९
प्रातःकाल – मंगल आरती दर्शन
७.३० से ११ बजे – अभिनन्दन समारोह एवं संगोष्टी
१२:१५ बजे तक – ज्योत, भोजन एवं प्रस्थान

सोशल मीडिया की उपादेयता एवं प्रासंगिकता” विषयक संगोष्ठी में की विद्वानों ने शिरकत

“बदलाव की बयार को सहज स्वीकार करते हुए समय के साथ कदम मिलाने वाले लोग ही इतिहास रच पाते हैं। रूढ़ होकर अकड़े हुए रहने वाले लोगों को समय की धारा से टकराकर या तो टूटना पड़ता है या फिर मिटना पड़ता है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि समय की राह को समझने वाले ही साफल्यमंडित हो पाते हैं। आज तकनीकी का जमाना है, इसमें तकनीकी को नजरअंदाज करना नामुमकिन है। “ उक्त विचार श्रीमढ खुड़द धाम में काव्यकलरव वाट्सएप-समूह के स्नेह मिलन समारोह के तहत आयोजित “सोशल मीडिया की उपादेयता एवं प्रासंगिकता” विषयक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रोफेसर भंवरसिंह सामौर, सेवानिवृत्त प्राचार्य महाविद्यालय शिक्षा राजस्थान ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तकनीकी के इस युग में सोशल मीडिया की उपादेयता एवं प्रासंगिकता निर्विवाद है। आवश्यकता मात्र इस बात की है कि हम सोशल मीडिया के सकारात्मक पक्ष को प्रबल करें। प्रोफेसर सामौर ने काव्य-कलरव वाट्सएप-समूह को सोशल मीडिया की सकारात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

संगोष्ठी के अध्यक्ष एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी श्री भंवरसिंह चारण ने काव्य कलरव समूह के स्नेहमिलन समारोह की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि यह ऐसा समूह है जो किसी भी परिस्थिति में सकारात्मकता के सांचे को बरकरार रखता है। किसी व्हाट्सएप समूह के एक सौ पचास के लगभग सदस्य एक परिवार की तरह जुड़कर भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के उन्नयन, संरक्षण तथा संवर्द्धन का उल्लेखनीय कार्य करते हों, ऐसा ये एकमात्र व्हाट्सएप समूह है। उन्होंने सोशल मीडिया के सबल पक्षों का जिक्र करते हुए कहा कि यह आज के युग की प्राथमिक आवश्यकता है। इसने लोगों के दिलों की दूरियों को पाटने का कार्य किया है। आज प्राचीन साहित्य के संरक्षण एवं अन्वेषण में सोशल मीडिया सबसे अहम सहयोगी बनकर उभरा है।

संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि एवं तकनीकी पक्ष के मुख्यवक्ता श्री मनोज मीसण ने सूचना एवं प्रोद्योगिकी की बढ़ती ताकत एवं आम व्यक्ति के जीवन में इसकी अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकी से ना तो दूर भागने की दरकार है और ना ही इससे अति उत्साही होकर परंपरागत साधनों से दूरी बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि काव्यकलरव समूह द्वारा वर्तमान समय की आवश्यकता को देखते हुए राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति से जुड़ी सामग्री को ऑनलाइन उपलब्ध करवाने का संकल्प लिया गया है। इस दिशा में राजस्थानी की प्राचीन पांडुलिपियों से लेकर वर्तमान की चुनिंदा रचनाओं को वेवसाइट पर अपलोड करने का कार्य शुरु किया जा चुका है। उन्होंने पद्मश्री सीताराम लालस द्वारा संपादित राजस्थानी शब्दकोश को ऑनलाइन करने का संकल्प लिया।

संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि एवं राजस्थानी भाषा साहित्य एवं स्ंस्कृति अकादमी, बीकानेर के पूर्व सचिव श्री पृथ्वीराज रतनू ने काव्य कलरव समूह को उत्तर भारत का सबसे सक्रिय एवं संस्कारी समूह कहते हुए इसके साहित्यिक कार्यों की सराहना की। श्री रतनू ने कहा कि आज व्हाट्यएप समूहों पर अग्रेषित समाचारों, अपुष्ट समाचारों एवं अवांछित सूचनाओं की भरमार रहती है, जिसके कारण सोशल मीडिया को गैरजिम्मेदार की संज्ञा से अभिहित किया जाता है, ऐसे समय में एक काव्यकलरव व्हाट्सएप समूह ऐसा है, जिस पर रचनाकारों द्वारा लगातार सद-साहित्य का सृजन किया जाता है, समूह में साझा की गई रचनाओं की समीक्षा एवं आलोचना की जाती है, चुनिंदा रचनाओं का संकलन प्रकाशित किया जाता है। श्री रतनू ने कहा कि सोशल मीडिया की प्रासंगिकता एवं उपादेयता का प्रत्यक्ष प्रमाण काव्यकलरव व्हाट्सएप समूह है।

संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि एवं राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के प्रदेश पाटवी डाॅ. राजेन्द्र बारहठ ने सोशल मीडिया को वर्तमान समय के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने भौतिक दूरियों को पाटकर लोगों को पास आने का सुअवसर प्रदान किया है। आज गांव-गांव एवं मोहल्लों के अपने व्हाट्सएप समूह है, परिवारों एवं समाजों के अपने व्हाट्सएप समूह हैं, मित्रमंडली के समूह हैं, इन समूहों ने रिश्तों में नवीन ताजगी भरी है। सार्वजनिक हित के कार्यों में लोगों की सहभागिता का प्रतिशत बढ़ाने का काम सोशल मीडिया ने किया है। डाॅ. बारहठ ने काव्यकलरव द्वारा राजस्थानी साहित्य के क्षेत्र किए जा रहे सृजनात्मक कार्यों को भावी पीढ़ी के लिए बड़ी सौगात बतलाया।

संगोष्ठी संयोजक एवं सुजला महाविद्यालय में हिंदी के सह-आचार्य डाॅ. गजादान चारण ने बताया कि “एक सूई किसी व्यक्ति के बदन की आबरू को बचाने का महनीय कार्य करती है लेकिन यदि कोई व्यक्ति उस सूई से किसी दूसरे की आंख फोड़ने का कार्य करे तो यह सूई का नहीं उपयोगकर्ता की मानसिकता का दोष है। उसी तरह सोशल मीडिया किसी भी दृष्टि से समाज के लिए घातक नहीं है लेकिन उसका उपयोग करने वाले लोग यदि उसे सांप्रदायिक वैमनस्य के हथियार के रूप में काम लें तो यह उन लोगों की मानसिकता का दोष है। डाॅ. चारण ने कहा कि काव्य कलरव व्हाट्सएप समूह न केवल साहित्यिक वरन सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेता है। मानवता के कार्याें में अग्रगण्य भूमिका अदा करता है। सोशल मीडिया के प्रति समाज की नकारात्मक धारणाओं को सकारात्मकता में बदलने का कार्य काव्य कलरव करता है। इस समूह के सदस्यों का पारस्परिक स्नेह, सम्मान, श्रद्धा एवं अनुराग अनुकरणीय है। यह एक विलक्षण परिवार की तरह स्नेह की सरिता बहाने का कार्य कर रहा है।

संगोष्ठी संरक्षक एवं काव्य कलरव समूह के नियामत तथा राजस्थान पुलिय सेवा के पूर्व अधिकारी श्री मोहनसिंह रतनू ने काव्य कलरव समूह के उद्देश्यों पर बोलते हुए कहा कि हमारा समूह सांप्रदायिक सदभाव, भ्रातृत्व, मैत्रीभाव, राष्ट्रीयता, सहकार तथा सहअस्तित्व की भावना को बल देता है। अमूमन व्हाट्सएप समूहों पर आने वाली खबरें धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली या सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली होती है लेकिन हमारे समूह का रिकाॅर्ड कि विगत 8 वर्षों की विकास यात्रा के दौरान एक भी पोस्ट ऐसी नहीं आई। हमारे समूह में सभी सदस्य साहित्य सृजन करने वाले नहीं है लेकिन इस समूह के सभी सदस्य साहित्यिक अभिरुचि एवं संस्कारों वाले हैं।

राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कवियों ने सुनाई शानदार रचनाएं

शनिवार को शुरु हुए इस दो दिवसीय महोत्सव एवं स्नेह मिलन समारोह का शुभारंभ देवीस्तृति से किया गया। श्रीमढ खुड़द ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री भैरूसिंह रतनू ने स्वागतोद्बोधन प्रस्तुत करते हुए सबका स्वागत किया। कवि श्री जेके चारण ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। उद्घाटन समारोह एवं राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि श्री जोगेश्वर गर्ग, विधायक-जालौर ने इसे साहित्य संगम का अनूठा समारोह बताया। महोत्सव का सबसे रोचक पक्ष रहा रात्रिकालीन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन। कवि सम्मेलन में संपूर्ण भारत के ख्यातनाम कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं का मन जीता। रात्रि 3 बजे तक चलने वाले इस कवि सम्मेलन में श्री नवल जोशी, मोहनसिंह रतनू, वीरेन्द्र लखावत, हिम्मतसिंह उज्ज्वल भारोड़ी, श्रेणीदान देपावत, कैलाशदान जाड़ावत, गिरधरदान रतनू, डाॅ. गजादान चारण, मीठे खां मीर, डाॅ. संतोष चारण, कवयित्री वीणा सागर, रतनसिंह चांपावत, महेन्द्रसिंह छायण, नीतिराजसिंह सांदू, जीडी रामपुरिया, प्रहलादसिंह चारण झोरड़ा, ओंकारसिंह कविया नोख, डाॅ. वीडी चारण छोटीखाटू ने काव्यपाठ किया।

विभिन्न प्रतिभाओं का किया गया सम्मान

दो दिवसीय महोत्सव एवं स्नेह मिलन समारोह के दौरान विभिन्न प्रतिभाओं का अभिनन्दन कर काव्यकलरव समूह ने उत्कृष्ट के अभिनन्दन की परंपरा को प्रगाढ़ बनाया। साहित्य, समाजसेवा, खेलकूद, कत्र्तव्यनिष्ठा, मातृभाषा उन्नयन, संस्कार निर्माण, पत्रकारिता आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवा देने वाले महानुभावों का सम्मानित किया गया। समारोह में श्री भवानीसिंह कविया नोख, डाॅ. गजादान चारण, गिरधनदान रतनू, मनोज मीसण, महेन्द्रसिंह चारणत्व, डाॅ. बाबूदान देवल, भीखदान चारण, अभिनव कविया, दिलीप कविया, डाॅ. सुयशवर्द्धनसिंह, नरपालसिंह राठौड़, जीतेन्द्रसिंह चारण, गजेन्द्रसिंह देवल, रघुवीरसिंह, ओमसिंह, नरपतसिंह रतनू वल्दरा, वीणा सागर, रेणु कक्कड़, विमला मेहयारिया एवं श्रवण सागर का अभिनन्दन किया गया।
श्रीमढ खुड़द ट्रस्ट की ओर से श्री महेन्द्रसिंह रतनू, सुखदेवसिंह रतनू एवं जनकसिंह रतनू ने सभी अतिथियों का आभार ज्ञापन किया। काव्यकलरव समूह की ओर से सुखदेवसंिह गाडण एवं मदनदानसिंह बारहठ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम संचालन डॉ. गजादान चारण ने किया। दो दिवसीय महोत्सव के संयोजक डॉ नरेंद सिंह देवल ने प्रायोजक ट्रस्ट सहित बाहर से पधारे कवियों, अतिथियों एवं कलाकारों का अभार करते हुए भविष्य में आयोज्य कार्यक्रमों में भी सभी से सहयोग का आह्वान किया। काव्य-कलरव समूह की ओर से मुख्य संरक्षक श्री नवलजी जोशी ने श्रीमढ़ खुड़द ट्रस्ट द्वारा की गई तैयारियों एवं स्वागत सत्कार को अन्य संस्थानों के लिए मिसाल बताते हुए कलरव समूह की ओर से श्री भैरुंसिंह सा रतनू, कुंवर जनक सिंह सा रतनू, सुखदेव सा रतनू, महेंद्र सा रतनू सहित उनकी पूरी टीम का आभार ज्ञापित किया।

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