रक्षा कवच – करणी सायर कार – कामदार सा. श्री शिवदानसिंह जी हापावत

अबखी पुळ अबखी घडी, हाज़िर विपद हज़ार।
उण संकट में आपरी, करणी सायर कार।।१।।
देश प्रदेशा रात दिन, पग धरतां घर ब्हार।
जांणि अजांणी सब जगां, करणी सायर कार।।२।।
उण्डा पाणी उतरतां, नद्दी नाळा पार।
पग डिगतां बिखमी वखत, करणी सायर कार।।३।।
साँप बिच्छुँ गर गौहिरो, फण जहरी फुफकार।
जाड़ा डाढ़ा जकड़तां, करणी सायर कार।।४।।
मंत्र मूठ डर डाकणी, भूत प्रेत भय भार।
आफत नेंडी आवतां, करणी सायर कार।।५।।
बाघ सिंह करि विकट वन, अहि विषधर अणपार।
आडा मारग आवतां, करणी सायर कार।।६।।
रिपु सबळा रण मायनें, बहतां खग बौछार।
प्रतख काळ पल पाव में, करणी सायर कार।।७।।
आधि व्याधि तन आपदा, तीन ताप भय चार।
व्यापत विविध विकार विष, करनी सायर कार।।८।।
सौवत जागत ऊँघतां, अरिया वार अपार।
घात अचानक घालतां, करणी सायर कार।।९।।
चौकी चाँकी कुन्डियो, पग पडतां उण बार।
तंत्र मंत्र तन घात में, करणी सायर कार।।१०।।
घाटा बाटा गुजरतां, गाढ़ बाढ़ जळ धार।
कड़ा गड़ा मेंह बीजळी, करणी सायर कार।।११।।
ताव डैरूं तन मान्दगी, वाळा छाळा वार।
तन हड़क्यो मुख तोड़तां, करणी सायर कार।।१२।।
वाहन चढ़तां उतरतां, दुरघटना दुसवार।
आडि अचानक आपदा, करणी सायर कार।।१३।।
लाय लगत धर धसकतां, बम गौळा बौछार।
अबखी बेळा उण वखत, करणी सायर कार।।१४।।
खौटा गृह बौदी दशा, दाळिदर दुसवार।
इण सब आड़ी आपरी, करणी सायर कार।।१५।।
चोरी जारी वाद भय, दुविधा राज दुवार।
दाह विद्युत जल डूबतां, करणी सायर कार।।१६।।
अकाळ मौत दुर्दिन अखिल, पीड़ा विविध प्रकार।
सदा रुखाले सेवकां, करणी सायर कार।।१७।।
क्रूर क्रोध हद लोभ मद, चिंता चित्त विकार।
आडी कूमत आपरी, करणी सायर कार।।१८।।
तात मात बंधू बहन, सुत दारा परिवार।
सरब रुखाळी है सदा, करणी सायर कार।।१९।।
पाठ करे नित प्रेम सूँ, धर चरणा में ध्यान।
किनिंयाँणी रक्षा करे, (माँ) जिमवारि निज जाण।।२०।।
शरणागत “शिवदान” रे, उर नहँचौ अणपार।
रात दिवस निरभय रहा, काढ़ मात री कार।।२१।।

।।छप्पय।।
करनी सायर कार, रक्षा कवच कहिजे।
करणी सायर कार, काढ़ कर निरभय रहिजे।।
करणी सायर कार, काया कष्ट कटावे।
करणी सायर कार, सकळ संताप नसावे।।
परथम कर यह पाठ नित, फिर घर बाहर पग दीजिये।
नचीत होय “शिव” निज मना, सफल मनोरथ कीजिये।।

~~कामदार सा. श्री शिवदानसिंह जी हापावत (श्रीकरणी कोट) कृत

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