रातीजगा चिरजा – आया म्हारा माँ सतियाँ माय

।।माँ सतियाँ की चिरजा।।

आया म्हारा माँ सतियाँ माय, झीणा सा बाज्या घूघरा सा
आया म्हारा माँ सतियाँ माय, झीणा सा बाज्या घूघरा सा
माथा ने मेमंद ल्याय, रखड़ी तो तोळा तीस री सा
कानाँ ने झालज ल्याय, झुटणा तो तोळा तीस रा सा
आया म्हारा माँ सतियाँ माय, झीणा सा बाज्या घूघरा सा
मुखड़ा ने बेसर ल्याय, मोतीड़ा तो तोळा तीस रा सा
हिवड़ा ने हाँसज ल्याय, तिलड़ी तो तोळा तीस री सा
आया म्हारा माँ सतियाँ माय, झीणा सा बाज्या घूघरा सा
बहियाँ ने चुड़लो चिराय, गजरा तो तोळा तीस रा सा
सर ने कसूमल ल्याय, पीळाँ रे कोर जड़ायजो सा
आया म्हारा माँ सतियाँ माय, झीणा सा बाज्या घूघरा सा
पगल्याँ ने पायल ल्याय, बिछिया तो तोळा तीस रा सा
ऊजळो सो भात रँधाय, रुच रुच भोग लगायजो सा
लुळ लुळ लागे बहुआँ पाँय, बहुवाँ ने गोद जड़ूल्यो द्यो सा
झुक झुक लागे बहुआँ पाँय, बहुवाँ ने गोद जड़ूल्यो द्यो सा
कर ने जोड्याँ आपरा बालूड़ा जपे
म्हारे, अंगणा में पलणो बंधाय, पीळा तो म्हाने ओढ़ायज्यो सा
दोय कर जोड्याँ आपरा सेवग जपे
सेवगाँ रो वंस बधाय, सेवग सोरा राखजो सा
आया म्हारा माँ सतियाँ माय, झीणा सा बाज्या घूघरा सा

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