सूंधाराय सताईसी

जुगती नह कछु जाणबो, निजपण उगती नाय।
भगती उर भर भावना, गिर सूंधा सुरराय।।1

विसन भूतपत ब्रहम जिथ, कर नीं सकिया काय।
जनहित प्रगटी जोगणी, सो सूंधै सुरराय।।2

वडा देव हुय बापड़ा, पड़िया आय’र पाय।
रोल़विया असुराण रण, सो सूंधै सुरराय।।3

सगत पास श्रीमाल़ रै, बसै सदा वरदाय।
अखै जगत अघटेसरी, निमख लखै कहु नाय।।4

विकट पहाड़ां बीचमें, थिर हद थानग थाय।
बैठी वनखँड बीसहथ, सो सूंधै सुरराय।।5

छड कँदरां किवलास री, भाखर मुरधर भाय।
आय विराजी अंबका, सज सूंधै सुरराय।।6

फाबै नग जग फूठरो, विटप फबै वनराय।
रीझ जिकण पर राजणी, सद सूंधै सुरराय।।7

शिखंड टहुका दे शिखर, इल़ नाहर अघराय।
प्रसन्न जेथ परमेसरी, गिर सूंधै सुरराय।।8

हेर वनां हरियाल़ियां, झरणा झरता जाय।
गिर शिखरां कर कर गुमर, सत सूंधै सुरराय।।9

सौभै तर सर सौभणा, दिल गिर धर की दाय।
धिन उर बैठी डंबर धर, सज सूंधै सुरराय।।10

गिर गूंजै धूजै धरण, असुर उरां अकुल़ाय।
तूं ताणै तिरशूल़ तद, सज सूंधै सुरराय।।11

चंड मुंडादिक चूरिया, घट मेखासुर घाय।
हेलै चढ होफर हलै, सो सूंधै सुरराय।।12

कल़जुग समै करूर बो, छलबल़ रहियो छाय।
खल़ लारै खाता बहै, सूंधा करै सहाय।।13

सोजी पड़ै न सांपरत, थट नह तोजी थाय।
बगत कोजी में बीसहथ, सूंधा करै सहाय।।14

स्नेह निर्झरिणी सूकगी, कनै रह्यो नह काय।
आय हमें अवलंब तूं, सज सूंधा सुरराय।।15

ठगवाड़ो धरती थयो, अवर न कोय उपाय।
उपराड़ो कर अंबका, सज सूंधा सुरराय।।16

जालिम जाहर जोरवर, पहुमी ग्या पसराय।
नाहर चढ साजै निपट, शूल़ सूंधै सुरराय।।17

जन सूंधा री जातरा, नत हुय सीस नमाय।
निजजन री महमाय नित, सजै भीर सुरराय।।18

दुरजनिया दल़िया दपट, थिर कज सल़िया ठाय।
कल़िया गाडा काढिया, सज सूंधा सुरराय।।19

सरवजात हित साधणी, सरण सबै समुदाय।
मात जिकां दुख मोचणी, सज सूंधै सुरराय।।20

मुख जिण टेरी मात नै, सुख लख दियो सदाय।
आई नवलख उरड़ती, सज सूंधा सुरराय।।21

ऊंच नीच रो अंबका, भेद तनै नह भाय।
भलाभली लख भावना, सगती बणै सहाय।।22

सबजन नै देखै सदा, इक लेखै अपणाय।
पेखै उर जिणरो पवित, सगती बणै सहाय।।23

सैण समागम हरस हिय, सरस दिवस सुरराय।
वरस कृपा इम बीसहथ, दरस तूझ सुखदाय।।24

मांगूं नह धन मावड़ी, चित नह पद री चाय।
साजो तन रख सेवगां, सदबुद्ध दे सुरराय।।25

आद अनादि अंबका, ईहग पूरण आस
ओट ग्रहण अघटेसरी, दखिया दूहा दास।।26

महर तिहारी मावड़ी, जगत कहर मिट जाय।
पत राखै परमेसरी, गिरधरियो गुण गाय।।27

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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