शरणागत पंखी रै सारू मरणिया !!

महात्मा ईसरदासजी आपरी काल़जयी कृति ‘हाला-झाला रा कुंडलिया’ में लिखै कै “सिंह रा केश, नाग री मणि, वीरां रो शरणाई, सतवंती रा थण अर कृपण रो धन फखत उणां रै मरियां ईज दूजां रै हाथां पड़ै, जीवतां नीं। जे ऐ जीवता है ! अर कोई इणां री इण चीजा़ं रै हाथ घालै, तो घालणिये नै मरणो ईज पड़ै। उणां आ बात किणी अटकल़ पींजू डोढसौ री गत नीं लिखी बल्कि कानां सुणी अर आंख्यां देखी रै मेल़ सूं मांडी-

केहर केस भमंग मण, शरणाई सूहड़ांह।
सती पयोहर कृपण धन, पड़सी हाथ मूवांह।।[…]

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कूड़ लारै, धूड़!!

जोधपुर रै थल़वट इलाकै रो जुढियो गांम आपरी साहित्यिक अर सांस्कृतिक विरासत रै पाण चावो रह्यो है। इणी जुढिये में सोनथल़ी (एक धोरै रो नाम) माथै थल़वट री आराध्या देवी सैणीजी रो मढ(मंदिर) है–

धिन-धिन रै धोराह, वेदासधू विराजिया।
सकवी रह सोराह, सरण तिहारी सैणला।।

सैणीजी रै कारण ई रियासत काल़ में जुढियो प्रसिद्ध अर गजबंध गांम मानीजतो-

प्रथम शेरगढ परगनै, गजबंध जुढियो गांम।[…]

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गैली दादी!

आथूणै राजस्थान री धरा वास्तव में सिद्धां, सूरां, सतियां, जतियां री धरा है। बांठै-बांठै कन्नै लोक-निर्मित उण महामनां री कीरत रा कमठाण, इण बात री साख भरै कै-

कीरत महल अमर कमठाणा।

लोकहितार्थ जीवण जीवणियां अर अरपण करणियां रो जस सदैव जनकंठां में ई गूंजतो सुणीजै, क्यूंकै लोक कदै ई गुणचोर नीं हुवै अर साथै ई लोक जात रो पूजक नीं, बल्कि गुणां ग्राहक हुवै-

गुण नै झुरूं गंवार, जात न झींकूं जेठवा।[…]

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सो सुधारण ! सो सुधारण !!

काबुल रो मालक मुगल कामरान आपरी विस्तारवादी नीत सूं बीकानेर रै राव जैतसी नै धूंसण सारू आपरी एक लांठी सेना रै साथै बीकानेर माथै चढ आयो। उणरी फौज बीकानेर रै पाखती डेरा दिया अर ‘सौभागदीप'(बीकानेर रै किले रो नाम) रै सौभाग नै अभाग में बदल़ण री चेष्टा में प्रबल हमले री जुगत बैठावण लागो-

मालक काबल मुलक रो, कमरो लीध कटक्क।
जुद्ध करण नृप जैत सूं, आयो लांघ अटक्क।।[…]

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आवां छां अमरेस!

स्वाभिमान अर हूंस आजरै जमाने में तो फखत कैवण अर सुणण रा ईज शब्द रैयग्या। इण जमाने में इण दो शब्दां नै लोग जितरा सस्ता अर हल़का परोटै, उणसूं लागै ई नीं कै कदै, ई शब्दां रा साकार रूप इण धर माथै हा। आज स्वाभिमान अर हूंस राखणा तो अल़गा, इण शब्दां री बात करणियां नै ई लोग गैलसफा कै झाऊ समझै। पण कदै ई धर माथै ऐड़ा मिनख ई रैवता जिकै स्वाभिमान री रुखाल़ी सारू प्राण दे सकता हा पण स्वाभिमान नै तिल मात्र ई नीं डिगण देता। कट सकता हा पण झुक नीं सकता। ‘मरणा कबूल पण दूध-दल़ियो नीं खाणा।’ यूं तो ऐड़ै केई नर-नाहरां रा नाम स्वाभिमान री ओल़ में हरोल़ है पण ‘सांवतसिंह झोकाई’ री बात मुजब ‘मांटियां रो मांटी अर बचकोक ऊपर’ री गत महावीर बलूजी(बलभद्र) चांपावत रो नाम अंजसजोग है।[…]

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असही सही न जाय!

एक जमानो हो जद लोग चीकणी रोटी जीमता पण चीकणी बात करण सूं परहेज राखता। हर भजण अर हक बोलण में विश्वास राखता। अजोगती बात करणियो कोई धंतरसिंह क्यूं नीं हुवै, उणनै ई साच कैवता नीं संकीजता। आज जद आपां हर नाजोगी बात देख’र अथवा सुण’र बेहिचक कैय देवां कै – “बल़णदे नीं आपांरो कांई लेवै या आपां क्यूं किणी सूं बिनां लाभ खरगसो बांधां।”[…]

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डूंगरां ऊपरै छांह डाकी

कविवर नाथूसिंहजी महियारिया सही ई लिख्यो है कै भगती अर वीरता वंशानुगत नीं हुय’र फखत करै जिणरी हुवै-

जो करसी जिणरी हुसी, आसी बिन नूंतीह।
आ नह किणरै बापरी, भगती रजपूतीह।।

क्यूंकै फखत शस्त्र धारण सूं सूर अर गैणो पैरण सूं कोई हूर नीं हुवै-

भेख लियां सूं भगत नीं, होय न गैणै हूर।
पोथी सूं पंडित नहीं, नहीं शस्त्र सूं सूर।।[…]

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सूरां मरण सांम ध्रम साटै!!

राजस्थान रै मध्यकाल़ीन इतियास नै निष्पक्ष भाव सूं देखण अर पुर्नलेखन री दरकार है। क्यूंकै आज जिणगत युवापीढी में जीवणमूल्यां रै पेटे उदासीनता वापर रैयी है वा कोई शुभ संकेत री प्रतीक नीं है।
उण बखत लोग अभाव में हा पण एकदूजै सूं भाव अर लगाव अणमापै रो राखता। ओ वो बखत हो जद स्वामीभक्ति अर देशभक्ति एक दूजै रा पूरक गिणीजता हा। जिणांरै रगत में स्वामीभक्ति रैयी उणांरै ईज रगत में देशभक्ति रैयी। भलांई आपां आज इण बात नै थोड़ी संकीर्ण मानतां थकां व्यक्तिवाद नै पोखण वाल़ी कैय सकां पण आ बात तो मानणी ईज पड़सी कै उण मिनखां में त्याग, समर्पण, अर मरण नै सुधारण री अद्भुत ललक ही। इणी ललक रै पाण उवै आज ई खलक में आदरीजै।[…]

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वां संतां थांनै आदेस!

आपां केई बार पढां कै सुणां हां कै ‘जात सभाव न मुच्यते’ यानी जात रो स्वभाव कदै ई जावै नीं। इणनै ई ‘तुखम तासीर’ कैवै।

ऐड़ा घणा ई दाखला लोक री जीभ माथै मिलै जिणसूं ई बात री पुष्टि हुवै कै मिनख भलांई कैड़ी ई परिस्थितियां में रैवो पण अवसर आयां आपरी जात रो रंग अवस बतासी। ऐड़ो ई एक किस्सो है। संत हीरादास अर उणांरै चेले दामोदरदास रो।[…]

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कांई धरती माथै अजै राठौड़ है?

एक बारोटियो नाहरखान हो। किण जातरो राजपूत हो ओ तो ध्यान नीं पण हो राजपूत। उवो आपरै लाव-लसकर साथै सिंध रै इलाके में धाड़ा करतो अर मौज माणतो। इणी दिनां मेवाड़ सूं आय एक रामसिंह मेड़तियो ई इणरै दल़ में भेल़ो हुयो।रामसिंह मन रो मोटो अर साहस रो पूतलो। डील रो डारण अर खाग रो धणी हो सो नाहरखान इणनै धाड़ै में मिनखां दीठ पांती दैणी तय कर राखियो।[…]

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