मतदातावां सूं अरज

।।छंद – भुजंगी।।
सुणै बैठनै जाजमां बात सारी।
करै पीड़ हरेवाय हाथ कारी।
जको जात -पांति नाहि भेद जाणै।
तिको आपरै द्वार पे त्यार टाणै।
विचारै सदा ऊंच नै साच वैणो।
दिलां खोल एड़ै नैय वोट दैणो।।[…]

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श्री दुर्गा-बहत्तरी – महाकवि हिंगऴाजदान कविया

।।छन्द भुजंगप्रयात।।
मनंछा परब्रह्म हिंगोऴ माता।
समैं सात पौरां रमै दीप साता।
जंबू दीप में जाम एको जिकांरो।
दिशा पच्छमी दूर प्रासाद द्वारो।।1।।

जिको धोकबा काज जावै जमातां।
अपा पाप थावै बजै सिध्द आतां।
करामात री बात साखात कैई।
सता मातरी चन्द्र कूपादि सैई।।2।।[…]

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जोगमाया रो जस

।।छद – भुजंगी।।
नमो हींगल़ा मात प्रख्यात नामी।
पुणा मातरी ख्यात नै कूण पामी।।
रसा देवियां देव सिर्ताज राजै।
भणै जाप प्राणी तणा पाप भाजै।।१।।

मही थान बीलोचिसथान मंडै।
खमा कोपियां केवियां सीस खंडै।।
वसू वीदगां जात चित्तार आई।
अगै धार ओतार हजार आई।।२।।[…]

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भवानी नमो – हिंगऴाजदानजी कविया सेवापुरा

।।छंद भुजंङ्ग प्रयात।।

भवानी नमो स्वच्छ श्रृंगार अंगा !
भवानी नमो सुन्दरी शिम्भु संगा !
भवानी नमो कासरिद्रारी हन्ता !
भवानी नमो आसि आभा अनंता !!1!!

भवानी नमो ब्रह्मजा बुध्दि धामा !
भवानी नमो शिम्भु संहारि स्यामा !
भवानी नमो भूत कैलास बासी !
भवानी नमो ओज अम्भोज आसी !!2!![…]

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छंद भयंकर भ्रमर भुजंगी – कवि भंवरदान माडवा “मधुकर”

।।छंद – भ्रमर भुजंगी।।
जटा धार जंगा, गले में भुजंगा, सती नार संगा, गंगा धार गाजे।
खमे भ्रंग खारी, जमे कांम जारी, भमे रीस भारी लमे चन्द लाजे।
हुरां बीच हाले, चँडी साथ चाले, घटां प्रेम घाले, पटां प्रीत पावे।
अहो ओम कारा, सदा तो सहारा, मधुकर तमारा गुणां गीत गावे।।
कवी जो मधूको, धणी हेत धावे।

नचे खेल नट्टा, छिले अंग छट्टा, गिरां देत गट्टा, सुघट्टा, सुहाणी।
वजे नाद वाजा, अनेकां अवाजा, तपे भांण ताजा तके रीठ तांणी।
धुबे धोम धारां तिके थै ततारां, हजारां तरां ताल, भूमी हिलावे।
अहो ओमकारा, सदा तो सहारा, मधुकर तमारा गुणां गीत गावै।।[…]

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आशापुरा देवी महिमा – ईशरदास जी

।।छंद भुजंगी।।
नमो ओम रूपा नमो ईष्ट यंत्रा।
नमो मेदनी थाट साकार मंत्रा।।
नमो योग विद्या धरेणं अथागा।
भवा रूप भुवनेश्वरी चंद्रभागा।।

श्री यंत्रा श्री यंत्रा श्री यंत्रा श्री यंत्रा।
जपो जोग जोगी तणी रूप जंत्रा।।
नमो रिंह हिृमा किल्मस रागा।
भवा रूप भुवनेश्वरी चंद्रभागा।।[…]

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स्तुति श्री सायर माँ की – कवि जयसिंह सिंढ़ायच

।।छंद–भुजंगम प्रयात।।
नमौ तूँ नमौ मंढ़ माला धिराणी।
रिधू सायरा माँ नमौ किन्नियाणी।।
तुं ही क्रनला रूप साक्षात आजै।
तुँ जागती जौत मालै बिराजे।।१।।
नमौ आद अन्नाद अम्बे भवानी।
नमौ विश्व वन्द्ये, नमौ रुद्रराणी।।
अजौनीश अम्बे नमौ विश्व रूपं।
निराकार आकार साकार श्रूपं।।२।।[…]

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🌺शारदा स्तुति -प्रबीन सागर से🌺

🍀भुजंग प्रयातम् छंद🍀
ओंकार प्रेमं प्रभा नाद बिंदा।
जयो मातुरा चातुरा भेद छंदा।
गिरा ग्यान गोतीत गूढं गनानी।
जयो पार विस्तारता वेद बानी।।१[…]

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☆नागदमण☆ – सांयाजी झूला

सांयाजी झूला महान दानी, परोपकारी भक्त कवि थे। वे कुवाव गांव गुजरात के निवासी थे। इनका लिखा हुआ “नागदमण” भक्ति रस का प्रमुख ग्रन्थ है|

भक्त कवि श्री सांयाजी झूला कृत “नागदमण”
।।दोहा-मंगलाचरण।।
विधिजा शारदा विनवुं, सादर करो पसाय।
पवाडो पनंगा सिरे, जदुपति किनो जाय।।…१
प्रभु घणाचा पाडिया, दैत्य वडा चा दंत।
के पालणे पोढिया, के पयपान करंत।।…२
किणे न दिठो कानवो, सुण्यो न लीला संघ।
आप बंधाणो उखळे, बीजा छोडण बंध।।…३
अवनी भार उतारवा, जायो एण जगत।
नाथ विहाणे नितनवे, नवे विहाणे नित।।…४
।।छंद – भुजंगप्रयात।।
विहाणे नवे नाथ जागो वहेला।
हुवा दोहिवा धेन गोवाळ हेला।।
जगाडे जशोदा जदुनाथ जागो।
मही माट घुमे नवे निध्धि मांगो।।…१[…]

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मोगल पचीशी – जोगीदान गढवी (चडीया)

||छंद – भुजंगप्रयात||
नमौ चारणी तारणी पाय तोळे,
कहो मां खमां तो कळोयांय कोळे
हजी हाजरा तुं हजूरीय हामी,
नमो मौंगलंम्मा नमामी नमामी..||02||

हरे चित्त चिंता विघन्नो विनासे,
अखिलेशरी आवियो ऐज आसे
डणंकी रीपु ने दीयो मात डामी,
नमो मौंगलंम्मा नमामी नमामी..||03||[…]

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