सुरराज आरजी सुणै साहिब!

।।छंद-गयामालती।।
काढियो मुरधर काल़ कूटै,
एक थारी आस में।
इण झांख साम्हीं आंख काढी,
बात रै विसवास में।
ओ बीतियो ऊनाल़ इणविध,
छांट हेकन छेकड़ी।
सुरपाल़ अरजी सुणै साहिब,
पूर गरजी आ पड़ी।।1[…]

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महाशक्ति देवल महिमा

।।छंद गयामालती।।
माड़वो गामां माड मोटो, अवन सांसण ऊजल़ी।
भलियै तणी थिर देख भगती, निजर हिंगल़ा निरमल़ी।
पह सँढायच कियो पावन, आय जिण घर अवतरी।
दातार देवल दिपै दुणियर, वसू कीरत विसतरी।
माँ वसू सोरम विसतरी।।5
जाल़ियां जूनी रमी जोगण, मगरियां भर मोद म़े।
कर बाप व्हाली रखी कंवरी, गढव निसदिन गोद में।
धर सोढ दादो हुवो धिन-धिन, भाव सूं अंकां भरी।
दातार देवल दिपै दुणियर, वसू कीरत विसतरी।
माँ वसू सोरम विसतरी।।6[…]

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खूबड़ी री ख्यात

।।छंद गयामालती।।
मात धिन घर जनम माधै, हरस तन हिंगल़ाज रो।
इल़ साख सऊवां करण ऊजल़ रूप कूबड़ राजरो।
हेतवां हांण विघनांण हारण तांण होफर ताकड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।6 […]

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