जयो रंग करन्नल मात रमै – महाकवि मेहाजी वीठू झिणकली/खेड़ी

।।छंद -रोमकंद।।
वज भूंगल़ चंग मृदंग वल़ोबल डाक त्रंबाक वजै डमरू।
सहनाइय मादल़ भेर वखाणस संख सो झाल़र वीण सरू।
उपवै तन वाजत भाँत अनोअन पार अपार न कोय प्रमै
दुति गात प्रकासत रात चवद्दस रंग करन्नल मात रमै। […]

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भभूता सिद्ध रा छंद

राजस्थान रै लोक देवतावां में एक नाम भभूता सिद्ध रो ई है। उन्नीसवें शताब्दी रै पूर्वार्द्ध में भभूता सिद्ध रो जनम चारणवाल़ा रा सोलंकी गोमसिंह रै घरै होयो। कविवर शंकर रै आखरां में – गोमा सुतन प्रगट गढ कोटां मोटा भूपत मानै। मेवा मिसठान पतासा मिसरी थिरू चढावै थानै।। कवि रुघजी रतनू आपरै रंग रै दूहां में इण भांत लिखै – सातम है सिद्धराज री, चहुंकूंटां व्है चाव। अमलां वेल़ा आपनै, रंग सोलंकी राव।। सर्पदंश सूं भभूता सिद्ध देवलोक होया। काल़ीनाडी मुख्य स्थान है। आथूणै समूल़ै राजस्थान में घणी मानता। गांव गांव थान। म्हारै दादोसा (गुणजी हरदानजी रा) रा दादोसा […]

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दशावतार रूप स्वामी सहजानंद स्तुति

छंद रोमकंद
प्रथमं धर रूप अनूप प्रथी पर, कायम मच्छ स्वयं छकला|
जळ लोध करै महा जोध पति जग, कारण सोहि लई कमला|
शिर छेद संखासुर वेद लिये सब मेटण खेद विरंचि मही|
अति आणंद कंद मुनिंद अराधत, सो सहजानंद रूप सही||१

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કામપ્રજાળણ નાચ કરે

એક દિવસ આનંદ ધર, હર હરદમ હરખાય;
કરન નાચ તાંડવ કજુ, બહુ બિધી કેફ બનાય.
ઘટ હદ બિજ્યા ઘૂંટી કે, આરોગે અવિનાશ;
લહર કેફ અનહદ લગી,પૂરણ નૃત્ય પ્રકાશ.
લિય સમાજ સબ સંગમે, ત્રયલોચન તતકાળ;
કાળરૂપ ભૈરવ કઠિન, દિયે તાળ વિકરાળ.
ઘોરરૂપ ઘટઘટ ભ્રમણ, ઊતયા-રમણ અકાલ;
કારણ જીવકો આક્રમણ, દમન-દૈત દ્દગ-ભાલ.
લખ ભૈરવ ગણ સંગ લિય, ડાકિની સાકિની ડાર; […]

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बीसा छंद खोडियार जी रो

अवनी नभ पातळ और नही कछु, पाणि पवन्न हुता न पृथी।
सब शुन्न चराचर सृष्टि सृजि, सुभ, कारण-पाळण हार कथी।
लख शुन्न सु शुन्न दियां रु लियां लवलेश नही घटियो लखियो ।
खमकार करो खपराळिय खोडल, याद करे तव बाळकियो॥1 […]

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खोडियार माताजी री स्तुति- भावनगर रा राजकवि पिंगळसिंह पाताभाई नरेला

दोहा।

तारण कुळ चारण तणो,उगारण तुं आइ।
मारण महिषासुर री,दुनिया पर दरसाइ॥1

छंद दुरमिल

खळ जोर खळावण भै अळसावण,शर्ण उगारण तुं शगति।
हियमें हरखावण,अम्रत लावण,भाव उपावण तुं भगति।
मनरोग मटावण शोक शमावण जोग दिपावण तुं जबरी।
कुळतारण काज सुधारण कारण खोडल चारण देव खरी॥1 […]

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दुव सेन उदग्गन – वंश भास्कर

।।छंद – दुर्मिला।।

दुव सेन उदग्गन खग्ग सुमग्गन
अग्ग तुरग्गन बग्ग लई।
मचि रंग उतंगन दंग मतंगन
सज्जि रनंगन जंग जई।।
लगि कंप लजाकन भीरु भजाकन
बाक कजाकन हाक बढी।
जिम मेह ससंबर यों लगि अंबर
चंड़ अड़ंबर खेह चढी।।१।।[…]

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महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल-वीसाभाई महडू

परचा जग वासिय नक्ख प्रकाशिय रध्ध हुलासिय, अंग रयं।
त्रमळं गुण गासिय, सुक्ख निवासिय, उजळ आशिय, चाव अयं।
वरदाण विळासिय, दुःख विनासिय, साम चौरासिय, जग्ग सरे।
महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल कांकण वाळिय ल्हेर करे।।1 […]

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टेलगिरीजी रा छंद

१९ वें सईके रै पूर्वार्द्ध में टेलगिरीजी महाराज हुया। दसनामी संप्रदाय रै बाबै टेलगिरीजी दासोड़ी में तपस्या करी। बाबै रै केई चमत्कारां री बातां लोक में प्रचलित है। बाबै दासोड़ी गांव में जीवित समाधि लीनी। बाबै रै लोक प्रचलित चमत्कारां माथै एक सांगोपांग किताब लिखी जा सकै। दासोड़ी अर आसै- पासै रै इलाके में बाबै रै प्रति घणी आस्था है। घणै समय पैला म्है एक छंद रचियो। हालांकि ओ छंद प्रकाशित है पण आपरी सेवा में इण खातर मेल रैयो हूं कै टेलगिरीजीै जैड़ै त्यागी अर तपस्वी रै नाम सूं आपरी ओल़खाण हो सकै- […]

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माताजी के रास रमण का वर्णन – कवि जगमाल सिंह “ज्वाला” सुरतांणिया कृत

धिन एकम आज भवानिय चौसठ,मात धरा मनरंग मळी।
अति आनंद आज भरयो रतनाकर,नेन अमी वरसात वळी।
सब शोभयमान हुवे सिंह ऊपर,आभ उडड्गण भोम भमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।1। […]

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