चाळकनेची री स्तुति – कवि जगमाल सिंह “ज्वाला” सुरतांणिया कृत

संग सात सहेलिय आवड भेळिय गीगल गेलिय रास रमै।
नित रोज नवेलिय सांझ सवेलिय भेऴिय खेतरपाळ भमै।
करती घण केलिय आप अकेलिय शेर चढेलिय तुं शगति।
किरपा कर चाळक मात कृपाळक बाळक तोय करे बिनति॥1॥ […]

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कविवर मुरारदानजी आसिया नोखड़ा

सरल हृदय, सहज सुलभ, सौजन्य मूर्ति, सर्वजन हितेषी, न्याय प्रिय अर संत प्रकृति रा मिनख हा मुरारदानजी आसिया नोखड़ा। नोखड़ा रै जेठूदानजी आसिया रै घरै आपरो जन्म होयो। समाज में व्याप्त रूढियां रा आप घोर विरोधी हा। अन्याय रा आप कदै ई समर्थक नीं रैया। न्याय रै प्रतिबद्धता रो एक दाखलो देणो समीचीन रैसी। आपरै आगै-नैड़ै रिस्तै में एक बूढा अर बेवा माजी हा जिणां रै कोई औलाद नीं ही। आपरै पिताजी जेठूदानजी उणां रै खेत माथै कब्जो कर लियो। आ बात मुरारदानजी सूं सहन नी होई। इणां माजी रै पक्ष में आपरै पिताजी रो ई विरोध कियो अर जेठूदानजी […]

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जूझार मूल सुजस

बीकानेर जिले री कोलायत तहसील रै गांव खेतोलाई रै सालमसिंह भाटी रो बेटो मूल़जी एक वीर क्षत्रिय हो। सं १८६६ री भादवा सुदि १२ रै दिन ओ वीर चोखल़ै री गायां री रक्षार्थ जूझतो थको राठ मुसलमानां रै हाथां वीरगति नै प्राप्त होयो। किवंदती है कै सिर कटियां पछै ओ वीर कबंध जुद्ध लड़ियो। आथूणै राजस्थान रे बीकानेर, जैसलमेर नागौर अर जोधपुर मे इण वीर री पूजा एक लोक देव रे रूप मे होवै।मूल़जी जूझार रे नाम सूं ओ अजरेल आपरी जबरैल वीरता रे पाण अमरता नै वरण करग्यो।जैड़ो कै ओ दूहो चावो है :- मात पिता सुत मेहल़ी बांधव वीसारेह सूरां […]

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ईश आराधना

नखड़ै हिरणाख विडारण नागर सागर मे तजी सैज सजी
पहिल़ाद उबारण कारण पाधर भाल़ सुं आविय नाथ भजी
उण वेल़ धरा अर धूजिय अंबर थंब फटै नरसिंघ थयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो १ […]

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जूझार हणूंवंतसिंह रोहड़िया सींथल़ रो सुजस

सीयां हमीरां सांगड़ां, मिल़ियै जाझै मांम
सांसण सीथल़ है सिरै, वीसासौ विसराम

महाकवि दुरसाजी आढा रो ओ दूहो सींथल़ री सांस्कृतिक विरासत, स्वाभिमान साहस अर टणकाई री टेक राखण री अखी आखड़ी रो साखिधर है। सींथल रा संस्थापक सांगड़जी रो पाटवी सपूत मूल़राज। मूलराज करनीजी रा अन्नय भक्त। करनीजी खुद सींथल़ पधारिया जद मूल़राजजीनै खुद आपरै हाथां सू जागा बताय कैयो कै आगै सूं अठै देवी री पूजा करजै आज उणी जागा करनीजी रो भव्य मंदिर है। इणी मूलराजजी री वंशज सींथल़ मे मूल़ा बाजै। मूल़राजजी री वंश परंमपरा मे पदमसिंह हुया अर इणां रै घरै हणुंवतसिंह रो जनम होयो। उण दिनां बीकानेर माथै महाराजा रतनसिह रो शासन हो, उणां रो एक मुलाजिम रिड़मलसर रो सिपाही मुसलमान हो। वो एक वार आपरी टुकड़ी साथै सींथल़ रुकियो। […]

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धिन चंदू राखी धरा-1

भगवती चंदू रो जनम माड़वा (पोकरण) रै संढायच उदैजी दलावत रै घर मा अणंदू मिकस री कूख सूं उनीसवै शताब्दी रै पूर्वाद मे हुयो। अणंदूबाई ई गुडी रै पोकरणां रै अत्याचारां रै खिलाफ जंवर कर चारणां रै स्वाभिमा नै अखी राखियो।  देवी चंदू रो ब्याव दासोड़ी रै रतनू रतनजी सूरदासोत रै साथै हुयो। उण दिनां पोकरण माथै सालमसिंह चांपावत रो अधिकार हो, सालमसिंह चांपावत, चांपावतां री ऊजल़ी परंमपरा रो निर्वाह नीं कर सक्यो, उण आप रै सलाहकारां री उल्टी सीख मानर माड़वा री कदीमी सीम नै उथाल़ण अर अखैसर ताल़ाब नै कब्जे मे करण सारू माड़वै रै अखैसर ताल़ाब तक आपरी सेना […]

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हिंगोल़राय री स्तुति

पिछमाण धराल़िय तैं प्रतपाल़िय थांन तिहाल़िय जेथ थपै
सत्रु घट गाल़िय संत सँभाल़िय देव दयाल़िय रूप दिपै
पुनि पात उजाल़िय तैं पखपाल़िय लंब हथाल़िय कूण लखै
कर काज सदा हिंगल़ाज कृपाल़िय राज तुंही मम लाज रखै १ […]

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नवदुरगा स्तवन

🌺छंद रोमकंद/त्रिभंगी🌺
तनया गिरि राजम ,बैल बिराजम, बाळक लाजम, राख सदा।
कर कंज त्रिशूलम , रूप अनूपम, चंदम पूनम, रश्मि प्रदा।
वर वांछित दातम, हे अवदातम , मो घट घातम, टाळ मया।
दुरगा नव वंदण, भै मन भंजण, वैरि विखंडण, जै विजया।1 […]

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चामुंडा स्तवन

भय भंजण गंजण बंड भयंकर, दण्डण दैत समस्त दळं।
वळ रुण्डण मुण्डण माळ धरे वपु, जोत अखंड जळं झळळं।
लिय चौसठ जोगण झुंड नवेलख, कोदंड दंड करं कमळं।
चँड मुंड प्रचंड उदंडण चामंड,अंब कदंब अणंद इळं।1 […]

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