अंबा स्तवन

।।छंद त्रिभंगी।।
अयि!उमा अपरणा, हर मन हरणा, वेद सु बरणा, सुर सरणा।
उर आनंद भरणा, करुणा करणा, नेह निझरणा, बहु वरणा।
वपु गौर सुवरणा, पाप प्रजरणा, सौख्य सुभरणा, सुख स्तंभा।।
भज मन भुजलंबा! कृपा कदंबा! जय जगदंबा! श्री अंबा!
जय जय जगजननी जगदंबा!!१[…]

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भगतमाल़ – छंद त्रिभंगी – ब्रह्मदास जी बीठू माड़वा

।।छंद – त्रिभंगी।।
ईसर उठ भग्गा, धोमर अग्गा, बेवै नग्गा, लग बग्गा।
हुय नार सुहग्गा, मिल़ियौ मग्गा, दाणव पग्गा, रच दग्गा।
ललचायौ ठग्गा, नाचण लग्गा, सीस करग्गा, विणसंतू।
धिन हो दुख वारण, काज सुधारण, भगत उधारण भगवन तू।
जिय भगतां तारण भगवन तू।।१[…]

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भैरव नाथ रो छंद – जयसिंह सिंहढायच, मंदा, राजसमंद

।।छंद – त्रिभंगी।।
मामा मतवाल़ा, गोरा काल़ा, लाज रूखाल़ा, लटियाल़ा।
कायम किरपाल़ा, भीम भुजाल़ा,विरद विलाल़ा,विरदाल़ा।
जोगेस जटाल़ा, मन मुदराल़ा, आभ उजाल़ा,भाण समो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।१
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।[…]

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महादेव महिमा – डूंगर दान जी आसिया, बालाऊ

।।छंद – त्रिभंगी।।
आबू अचलेसर, तूं तांबेसर, ओम सिधेसर, अखिलेसर।
पूजै पिपलेसर, नमै नरेसर, चन्नण केसर, चरचै सर।
हर श्री हल़देसर, सिव रामेसर, दुख दालेदर, दूर दफै।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।१[…]

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राधारमण देव स्तवन

।।छंद त्रिभंगी।।
हे हरि मन हरणं, अशरण शरणं, राधा रमणं, गिरिधरणं।
आपद उद्धरणं, नित प्रति स्मरणं, सुधा निझरणं, बरु चरणं।
ब्रजधाम विचरणं, कुंडल़ करणं, वारिद वर्णं, जगवंद्या।
माधव मुचकुंदा!, नागर नंदा!, बालमुकुंदा! गोविंदा!!१!![…]

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नेता – नीति

।।छन्द – त्रिभंगी।।
धारै धक धोळा चंगा चोळा, बदळै खोळा नित बोळा।
जन-धन सूं झोळा भरै सबोळा, करै ठिठोळा ठग भोळा।
रुळपट कर रोळा करै किळोळा,कुरसी दोळा फिर केता।
मन रा ज मलीणा है लजहीणा, नाग सपीणा ऐ नेता।।1।।[…]

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नायिका शिख नख वर्णन (राम रंजाट)

यह छंद महाकवि सूर्यमल्ल रचित खंडकाव्य राम रंजाट से लिया गया है। उल्लेखनीय है कि महाकवि ने इस ग्रन्थ को मात्र १० वर्ष की आयु में ही लिख डाला था।


।।छंद – त्रिभंगी।।
सौलह सिनगारं, सजि अनुसारं, अधिक अपारं, उद्धारं।
कौरे चख कज्जळ, अति जिहिं लज्जळ, दुति विजज्जळ, सुभकारं।।[…]

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गंगा स्तवन

🌺दोहा🌺
जय गंगे! जय जाह्नवी, तरल तरंगे आप।
शंकरमौलि विहारिणी, सुरसरि हर संताप।।१
अच्युत-चरण-तरंगिणी, हिमगिरि करण विहार।
जय पातक हर जाह्नवी, हे! जग पाल़णहार।।२

🌷छंद त्रिभंगी🌷
अंबा-अरधंगे!, हणण अनंगे!, मस्त मलंगे!, मातंगे!
भूतावल़ स़गे!, कंठ भुजंगे!, भव! भसमंगे!, तन नंगे!
पीवत नित भंगे!, उण उतबंगे!, रमणी रंगे, मनहारी!
जय भगवति गंगे!, तरल तरंगे, सरल सुचंगे, अघहारी!!१[…]

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करणी माता रा त्रिभंगी छंद – कवि डुंगर दानजी आशिया (बाळाउ)

।।छंद – त्रिभंगी।।
जय जय जग जरणी भव भय हरणी खळ दळ दरणी खग धरणी।
भू जळ खेचरणी पय निझरणी शंकर घरणी चख अरणी।
सेवक कज सरणी किरपा करणी मात प्रसरणी भुज लंबा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।1।।[…]

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देवी अंबाजी की स्तुति – छंद त्रिभंगी – शंकर दानजी जेठी (लींबडी)

।।छंद – त्रिभंगी।।
जय जगरायाजी, महामायाजी, शुचिकायाजी, छायाजी।
होवे शिशु पाजी, तउ क्षमाजी, कर तुं हाजी, हा हाजी।
प्रीति नित ताजी, नह इतराजी, वाह माताजी, वाह वाहजी।
रह राजी राजी, हमपर माजी, अजा ऊमाजी, अंबाजी।।1

धवळांबर धरणी, उजळ वरणी, शंकर घरणी, शं करणी।
निज जन निरझरणी, रक्षा करणी, अशरण शरणी, अघ हरणी।
वासी गिरिवरनी, शिव सहचरणी, हिम भूधरनी दुहिताजी।
रह राजी राजी, हमपर माजी, अजा ऊमाजी, अंबाजी।।2।।[…]

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