चारण भगत कवियां रै चरणां में

चारण भगत कवियां रै चरणां में सादर-

।।दूहा।।
चारण वरण चकार में, कवि सको इकबीस।
महियल़ सिरहर ऊ मनूं, ज्यां जपियो जगदीश।।1
रातदिवस ज्यां रेरियो, नांम नरायण नेक।
तरिया खुद कुल़ तारियो, इणमें मीन न मेख।।2
तांमझांम सह त्यागिया, इल़ कज किया अमांम।
भोम सिरोमण वरण भल, निरणो ई वां नांम।।3
जप मुख ज्यां जगदीश नै, किया सकल़ सिघ कांम।
गुणी करै उठ गीधियो, परभातै परणांम।।4
भगत सिरोमण भोम इण, तजिया जाल़ तमांम।।
गुणी मनै सच गीधिया, रीझवियो श्रीरांम।।5[…]

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कलंक री धारा ३७०

पेख न्यारो परधान, निपट झंडो पण न्यारो। सुज न्यारो सँविधान, धाप न्यारो सब ढारो। आतँक च्यारां ओर, डंक देश नै देणा। पड़िया छाती पूर, पग पग ऊपरै पैणा। पनंगां दूध पाता रह्या, की दुरगत कसमीर री। लोभ रै ललक लिखदी जिकां, तवारीख तकदीर री।। कुटल़ां इण कसमीर, धूरतां जोड़ी धारा। इल़ सूं सारी अलग, हेर कीधो हतियारां। छती शांती छीन, पोखिया ऊ उतपाती। घातियां घोपीयो छुरो मिल़ हिंद री छाती। करता रैया रिल़मिल़ कुबद्ध, परवा नह की पीर री। वरसां न वरस बुरिगारियां, की दुरगत कसमीर री।। कासप रो कसमीर, उवै घर अरक उजासै। केसर री क्यारियां, बठै वनराय विकासै। […]

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काव्य कलरव स्नेह मिलन समारोह खुड़द

।।छप्पय।।
मह पावन मरूदेश, मुदै कियो महमाई।
किनियाणी करनल्ल, आप घर सागर आई।
जणणी धापू जोय, नाम जग इंद्रा नामी।
चारण वरण चकार, वंश रतनू वरियामी।
खुड़द नै अचड़ दीनी खमा, आणद अपणां आपिया।
जूनकी रीत पाल़ी जगत, केवी व्रन रा कापिया।।1[…]

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ऐहड़ै नरां पर बल़िहारी

मुख नह फूटी मूंछ, दंत दूध रा देखो।
सीस झड़ूलो सजै, पदां झांझरिया पेखो।
वय खेलण री बेख, वीर धारी तन वरदी।
सधर खड़ो तण सीम, सदर उसण नै सरदी।
वतन री लाज वरियो मरण, धरण रखी धर धीरता।
ऐहड़ै नरां पर आज दिन, (आ)बल़िहारी खुद वीरता।।[…]

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सैनांणी

छत्राण्यां इण छिति, गुमर रची जग्ग गाथा।
सुणियां अंजस सरब, माण में झुकज्या माथा।
आंण थरप इण अवन, ध्यांन सुजस दिसी धारी।
ज्यांरी कीरत जोय, साची जपै संसारी।
इल़ नांम अमर अजतक अहो, रसा अरक लग रैवसी।
बैवसी बात वसुधा परै, कवी सदाई कैवसी।।[…]

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मिहिर ऊग मा’राण

मिहिर ऊग मा’राण, तिमिर दल़ अकबर तोड़्यो।
करां झाल किरपांण, माण मानै रो मोड़यो।
वन जमियो वनराव, भाव आजादी भूखो।
नह डिगियो नखहेक, लियो पण भोजन लूखो।
साहस रो रूप भूपां सिरै, मुगट मेवाड़ी मोहणो।
कीरती कल़श चढियो कल़ू, स्वाभिमान भड़ सोहणो।।1[…]

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नह लीधो हर नाम

नह लीधो हर नाम, कपट अर कूड़ कमायो।
नह लीधो हर नाम, गरथ संचियो गमायो।
नह लीधो हर नाम, चपट सँग कीनी चोरी।
नह लीधो हर नाम, गात तकियो नित गोरी।
भूलियो नाथ भोदूपणै, बातां करी विवाद री।
मोचणी पाप गीधा मुदै, एको गल्ल ना आदरी।।1[…]

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करणीजी रा  छप्पय

बसुधा बीकानेर, जको जग जाहर जांणै।
सको इल़ा नम सेव, देव राजो देसांणै।
मगरै में महमाय, दाय कीधी दासोड़ी।
तूं राजै थल़राय, जेथ नवलख जुथ जोड़ी।
समरियां सदा आवै सगत, लाखी ओढण लोवड़ी।
दासोड़ी दास गिरधर दखै, मया रखै तूं मावड़ी।।1[…]

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भैरूंनाथ रा छप्पय – जवाहरदान जी रतनूं

।।भैरवानाथ।।

।।छप्पय।।

डमर डाक डम डमक, घमर घूघर घरणाटै।
पग पैजनि ठम ठमक, स्वान झमझम सरणाटै।
द्युति आनन दम दमक, रमक गंध तेल रऴक्कै।
गयण धरा गम गमक, खमक मेखऴी खऴक्कै।
सम समक संप चम चम चमक, धमक बहै रँग धौरला।
मोरला काम कज चढ हद मदद, (रे) गुरज लियाँ कर गौरला।।1।।[…]

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भगवा

कुण नै चिंता करम री, करै सो आप भरेह।
पण इण भगवा भेख नैं, काळो मती करेह।।
काळा, धोळा, कापड़ा, या हो नंग धड़ंग।
भारत में है भेख रो, सूचक भगवों रंग।।
भगवैं नै भारत दियो, सदा सदा सम्मान।
भगवैं भी राखी भली, इण भारत री शान।।[…]

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