गजल – थे भी कोई बात करो जी – जी.डी.बारहठ (रामपुरिया)

थे भी कोई बात करो जी,
भैरू जी नै जात करो जी।
अपणो बेटो पावण सारूं,
दूजो सिर सौगात करो जी।।

जनम दियो सो जर जर होया,
पीळा पत्ता झड़ जासी,
सुध-बुध वांरी मती सांभळो,
मंदिर में खैरात करो जी।।[…]

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इक टक उन को जब जब देखा – ग़ज़ल

इक टक उन को जब जब देखा।
हम ने उन मे ही रब देखा।।१

लोग पुकारे “निकला चंदा”
छत पर उनको कल शब देखा।।२

साँझ सकारे त़का उन्ही को,
आन उन्हीं के कुछ कब देखा?३

“मय के प्याले लगे छलकने”,
माह जबीं का जब लब देखा!!४[…]

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दिन धोऴै अंधियारो कीकर

दिन धोऴै अंधियारो कीकर।
अणसैंधो उणियारो कीकर।।

सिकुड़ गया सह मकड़ीजाऴां।
बदऴ गयो ओ ढारो कीकर।।

बातां तो घातां में बदऴी।
रातां बंद हँकारो कीकर।।

तालर तालर कण कण जोयो
पालर पाणी खारो कीकर।।[…]

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गल़ी-गल़ी गल़गल़ी क्यूं छै!

आ गल़ी-गल़ी गल़गल़ी क्यूं छै! तीसरी पीढी इम खल़ी क्यूं छै!! ऊपर सूं शालीन उणियारो! लागर्यो हर मिनख छल़ी क्यूं छै!! काल तक गल़बाथियां बैती। वै टोलियां आज टल़ी क्यूं छै!! रीस ही आ रूंखड़ां माथै! तो मसल़ीजगी जद कल़ी क्यूं छै!! नीं देवणो सहारो तो छौ! पण तोड़दी आ नल़ी क्यूं छै!! काम काढणो तो निजोरो छै! कढ्यां उर आपरै आ सिल़ी क्यूं छै!! धरम री ओट में आ खोट पसरी! धूरतां री जमातां इम पल़ी क्यूं छै!! बाढणा पींपल़ अर नींबड़ां नै! तो बांबल़ां री झंगी आ फल़ी क्यूं छै!! कदै आ आप सोचोला! कै, भांग यूं कुए […]

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जाती रही – गजल

हाथ जब थामा उन्होंने, हड़बड़ी जाती रही।
जिंदगी के जोड़ से फिर, गड़बड़ी जाती रही।

‘देख लूंगा मैं सभी को’ हम भी कहते थे कभी,
आज अनुभव आ गया तो, हेंकड़ी जाती रही।

जो दिलों को जोड़ती थी स्नेह बन्धन से सदा,
घात का आघात खाकर, वो कड़ी जाती रही।[…]

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ग़ज़ल – आं तो वांनै भला कहाया

आं तो वांनै भला कहाया।
भोलां नै रूड़ा भरमाया।।

फूट फजीती फोरापण सूं,
जबरा देखो पांव जमाया।।

न्याय ताकड़ी काण घणेरी,
पार पड़ेली कीकर भाया?[…]

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नज़्म – नजर नें छू लिया जिस दम

नजर नें छू लिया जिस दम तो मेरे दिल ने ये सोचा,
यहाँ पर हर किसी का चाँद सा चेहरा नहीं होता।
मगर फिर भी मुझे वो चाँद का ही अक्स लगता है,
नहीं तो इस कदर मह दीद को ठहरा नहीं होता।१

जेहन में जिक्र आता है जब उस रूखसार का मुझको,
तो दिल मेरा पुकारे है वो गहरी झील सा होगा,
पतंगा बन मेरा मन जलने को बेताब सा होगा,
और वह भी इश्क में मेरे जला कंदील सा होगा।।२[…]

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ग़ज़ल

उधारे आंसुओं का भार तुम कब तक उठाओगे
उसूलों से अदावत को कहो कैसे निभाओगे

किसी के गमजदा किस्से दिलों से निकलती आहें
अगर सुन भी तनिक लोगे तो हँसना भूल जाओगे

निभाना है निभालो तुम अभी दस्तूर रोने का
हकीकत सामने आई कि रोना भूल जाओगे[…]

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🌺चाय🌺 🌻ग़ज़ल🌻

मीठी मिसरी वाली चाय!
या हो बिलकुल काली चाय!

दूध मिलाकर पीते जब भी,
लगती तभी निराली चाय!

लेमन वाली, अदरक वाली,
मन को दे खुशहाली चाय!

हरा पुदीना इसमें डाला,
नहीं फकत यह खाली चाय![…]

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