आई ऐह दिया उपदेश

।।गीत – वेलियो।।
मढड़ो महमाय थान इऴ, मोटो,
जग में आज चारणां जात।
कऴजुग-पाप दरसणां काटण,
सोनल उथ राजै सुखदात।।१

धारण-चारण एक धरा रा,
भायां मांय किसो ओ भेद।
सोनल तणो संदेशो साचो,
इऴ पर पूगो थपण अभेद।।२[…]

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ईसाणंद म्हारा आदेश

आसा ईशर अवन उण, प्रगट्या मोटा पात।
भोम अहो भादरेस री, विमल़ चहुदिस बात।।

।।गीत वेलियो।।
आयो कुळ जात उजाळण अवनी
भायो भोम नमो भादरेस,
सूरै भाग सरायो सारां।
ईसर पायो पूत आदेस।।1[…]

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🌷रांगड़ रँग रै तो रघुवीर!!🌷

🌷गीत वेलियो🌷
किण सू हुई नह हुवै ना किणसूं,
हिवविध राम तिहारी होड!
कीधा काम अनोखा कितरा,
छिति पर गरब उरां सूं छोड!!1

बाल़पणै दाणव दल़ वन में,
रखिया कुशल़ सकल़ रिखिराज।
कातर नरां अभै भल कीधा,
सधरै धनुस करां में साज।।2[…]

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गूदड़िया छोड अबै तो गैला

।।गीत-वेलियो।।
गूदड़िया छोड अबै तो गैला,
लोयण धार जरा सी लाज।
ऊगो अरक ऊंग तज आल़स,
कर रै चारण घर रो काज।।१

पूरी रात गमाई पीतां,
चूस्या गूडल़ घणेरै चाव।
पड़ियो मंझ रातरो प्रीतम,
दिनकर अब तो दियो दिठाव।।२[…]

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राखण रीत पुरसोतम राम

गीत-वेलियो
लंका जाय पूगो लंबहाथां,
निडर निसंकां नामी नूर।
दसरथ सुतन दिया रण डंका,
सधर सुटंका धानख सूर।।1

अड़ियो काज धरम अतुलीबल़,
भिड़़ियो असुरां गेह भुजाल़।
छिड़ियो भुज रामण रा छांगण
आहुड़ियो वड वंश उजाल़।।2[…]

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लूणोजी रोहड़िया री वेलि

बीठूजी नै खींवसी सांखला 12 गांव दिया। बीठूजी आपरै नाम सूं बीठनोक बसायो। कालांतर में इणी गांव म़े सिंध रै राठ मुसलमानां सूं सीमाड़ै अर गोधन री रुखाल़ी करतां बीठूजी वीरगति पाई। जिणरो साखीधर उठै एक स्तंभ आज ई मौजूद है। बीठूजी री वंश परंपरा में धरमोजी होया अर धरमोजी रै मेहोजी। मेहोजी रै सांगटजी/सांगड़जी होया। बीठनोक भाईबंटै में सांगड़जी नै मिलियो जिणरै बदल़ै में तत्कालीन जांगलू नरेश इणां नै सींथल़ इनायत कियो।
सांगड़जी सींथल आयग्या। सांगड़जी रै च्यार बेटा हा-मूल़राजजी, सारंगजी, पीथोजी, अर लूणोजी। एकबार भयंकर काल़ पड़ियो तो च्यारूं भाई आपरी मवेशी लेयर माल़वै गया परा। लारै सूं सूनो गांम देख ऊदावतां सींथल माथै कब्जो कर लियो। मेह होयो। हरियाल़ी होई तो ऐ पाछा आपरै गांम आया। आगे देखै तो ऊदावत धणी बणिया बैठा है! उणां विध विध सूं समझाया पण उणांरै कान जूं ई नीं रेंगी।[…]

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राजस्थानी साहित्य रा थंभ सौभाग्य सिंहजी शेखावत ने श्रद्धांजलि

परम श्रद्धेय सौभाग्य सिंहजी शेखावत, राजस्थानी साहित्य रा थंभ हा। उणां डिंगल़ अर विशेषकर चारण साहित्य री जिकी सेवा करी, बा अनुपम अर अद्वितीय ही। म्हारै माथै उणांरी घणी मेहरबानी ही। म्हारी पोथी ‘मरूधर री मठोठ’ में आप आशीष सरूप अंजस रा आखर लिखिया। बीकानेर विराजता जितै, म्हनै फोन करर बंतल़ सारू बुलावता। लारलै वरस पोतै नै परणावण पधारिया जणै व्यक्तिगत फोन करर मिलण रो आदेश दियो पण दुजोग सूं मिल नीं पायो। अणुंतो स्नेह हो। म्हारी उण पुण्यात्मा अर दिव्यात्मा नैं सादर श्रद्धांजलि। उण बगत म्है आपनै कीं दूहा अर एक वेलियो गीत निजर कियो सो आपनैं ई मेल […]

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गीत वेलियो-दारू रै ओगण रो

सरदी लग्यां पीजो मत सैणां,
निज भर रम रा घूंट निकाम।
तवै छमक पाणी पी तातो,
ओढ सिरख करजो आराम।।1
दारू पियां लागसी देखो,
जोर अहम रो वहम जुखाम।
मिटसी नहीं किणी पण मारग
नाहक ही होसो बदनाम।।2[…]

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राखण रीत पुरसोतम राम

।।गीत-वेलियो।।
लंका जाय पूगो लंबहाथां,
निडर निसंकां नामी नूर।
दसरथ सुतन दिया रण डंका,
सधर सुटंका धानख सूर।।1

अड़ियो काज धरम अतुलीबल़,
भिड़़ियो असुरां गेह भुजाल़।
छिड़ियो भुज रामण रा छांगण
आहुड़ियो वड वंश उजाल़।।2[…]

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आपारां पुरोधा, नारायणसिंहजी कविया ‘शिवाकर’

नारायणसिंहजी शिवाकर, राजस्थानी, संस्कृत, हिंदी, पिंगल़, अर अंग्रेजी में समरूप अर सम अधिकार सूं लिखणिया विद्वान मनीषी हा। उणां नैं 1987 में राजस्थानी भाषा अकादमी रो सर्वोच्च सूर्यमल्ल मीसण पुरस्कार मिलियो। उण दिनां म्है 10वीं करर 11वीं में पढे हो। रेनबो हाऊस जोधपुर में श्रद्धेय डॉ शक्तिदानजी कविया रै संयोजन में दो दिवसीय राजस्थानी साहित्यकार सम्मेलन होयो हो अर उणमें म्हनै आमंत्रित कवि रै रूप में एक म्हारो रेंणकी छंद सुणावण रो मोको मिलियो। उठै ई शिवाकरजी सूं मिलण होयो अर उणां म्हनै जिण लाड अर अपणास रै साथै ‘दुर्गादास सतसई’ दीनी। वा आज ई म्हारै कनै एक हेमाणी रै रूप में सुरक्षित है। […]

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