कमाल जिंदगी

मैं देख देख हो रहा निहाल जिंदगी,
कदम कदम पे कर रही कमाल जिंदगी।

वो गाँव जो कि टीबड़ों के बीच में बसा हुआ,
कि अंग अंग अर्थ के अभाव में फंसा हुआ।
अकाल पे अकाल सालोंसाल भाल-लेख ये,
कि कर्ज-कीच में हरेक शख्स था धंसा हुआ।

बेहाल में भी ना हुई निढ़ाल जिंदगी,
कदम कदम पे कर रही कमाल जिंदगी।[…]

» Read more

पहले राष्ट्र बचाना होगा

साथ समय के आना होगा
सच को गले लगाना होगा
फिर जो चाहे भले बचाना,
पहले राष्ट्र बचाना होगा।

समय-शंख का स्वर पहचानो!
राष्ट्रधर्म निभाना होगा
तेरी मेरी राग छोड़कर
हिंद-राग को गाना होगा[…]

» Read more

खाख हुवै सो लाख बणै

जोगा मिनखां नैं आ जगती,
पीढ्यां पलकां पर राखै है।
कोई पण बात बिसारै नीं,
हर बात चितारै भाखै है।।

कुण कह्वै जगती गुण भूलै,
कुण कह्वै साच नसावै है।
जोगां री जोगी बातां रा,
जग पग-पग ढोल घुरावै है।।[…]

» Read more

हेत बिन होळी अधूरी

मानज्यो आ बात पूरी
हेत बिन होळी अधूरी।
फगत तन रा मेळ फोरा,
मेळ मन रा है जरूरी।।

वासना री बस्तियां में
प्रीत-पोळां नीं मिलै,
रूप रूड़ा लोग कूड़ा,
साफ़ दिलडां बीच दूरी।। हेत बिन होळी अधूरी।।[…]

» Read more

अभिनंदन के अभिनंदन में–

तर चंदन है धर वीर सबै,
मंडिय गल्ल कीरत छंदन में।
द्विजराम प्रताप शिवा घट में,
भुज राम बसै हर नंदन में।
निखरै भड़ आफत कंचन ज्यूं,
उचरै कवि वीरत वंदन में।
छवि भारत की लखि पाक लही,
इक शेर इयै अभिनंदन में।।[…]

» Read more

ऐहड़ै नरां पर बल़िहारी

मुख नह फूटी मूंछ, दंत दूध रा देखो।
सीस झड़ूलो सजै, पदां झांझरिया पेखो।
वय खेलण री बेख, वीर धारी तन वरदी।
सधर खड़ो तण सीम, सदर उसण नै सरदी।
वतन री लाज वरियो मरण, धरण रखी धर धीरता।
ऐहड़ै नरां पर आज दिन, (आ)बल़िहारी खुद वीरता।।[…]

» Read more

जीत रण बंका सिपाही – कवि मोहन सिंह रतनू

आज संकट री घडी हे,
देश पर विपदा पडी हे,
कारगिल कसमीर मे,
कन्ट्रोल लाइन लडखडी हे।
जुध रो बाजे नगारो,
सुण रह्यो हे जगत सारो,
दोसती री आड दुसमण,
पाक सेना अड़वड़ी हे।
सबक तु इणने सिखावण, जेज मत बीरा लगाई।
जीत रणबंका सिपाही, जूंझ रण बंका सिपाही।।१।।[…]

» Read more

जीत रण बंका सिपाही! – कवि मोहन सिंह रतनू

आज संकट री घडी है।
देश पर विपदा पड़ी है।
कारगिल कश्मीर में,
कन्ट्रोल लाइन लडखड़ी है।
जुध रो बाजै नगारो।
सुण रह्यो संसार सारो।
दोस्ती री आड दुसमण,
पाक सेना अडबड़ी है।[…]

» Read more

चिड़कली

तूं तो भोल़ी भाऴ चिड़कली।
दुनिया गूंथै जाऴ चिड़कली।।

धेख धार धूतारा घूमै।
आल़ै आल़ै आऴ चिड़कली।।

मारग जाणो मारग आणो
हुयगी अब तो गाऴ चिड़कली।।

बुत्ता दे बस्ती भरमावै।
वै ई पैरै माऴ चिड़कली।।[…]

» Read more

प्रशंसा

प्रशंसा बहुत प्यारी है,
सभी की ये दुलारी है,
कि दामन में सदा इसके,
खलकभर की खुमारी है।

फर्श को अर्श देती है,
उमंग उत्कर्ष देती है,
कि देती है ये दातारी,
हृदय को हर्ष देती है।[…]

» Read more
1 2 3 10