कलंक री धारा ३७०

पेख न्यारो परधान, निपट झंडो पण न्यारो। सुज न्यारो सँविधान, धाप न्यारो सब ढारो। आतँक च्यारां ओर, डंक देश नै देणा। पड़िया छाती पूर, पग पग ऊपरै पैणा। पनंगां दूध पाता रह्या, की दुरगत कसमीर री। लोभ रै ललक लिखदी जिकां, तवारीख तकदीर री।। कुटल़ां इण कसमीर, धूरतां जोड़ी धारा। इल़ सूं सारी अलग, हेर कीधो हतियारां। छती शांती छीन, पोखिया ऊ उतपाती। घातियां घोपीयो छुरो मिल़ हिंद री छाती। करता रैया रिल़मिल़ कुबद्ध, परवा नह की पीर री। वरसां न वरस बुरिगारियां, की दुरगत कसमीर री।। कासप रो कसमीर, उवै घर अरक उजासै। केसर री क्यारियां, बठै वनराय विकासै। […]

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गज़ल – सुनो

चींटियों के चमचमाते पर निकल आए सुनो।
महफ़िलों में मेंढ़कों ने गीत फिर गाए सुनो।

अहो रूपम् अहो ध्वनि का, दौर परतख देखिए,
पंचस्वर को साधने कटु-काग सज आए सुनो।

आवरण ओढ़े हुए है आज का हर आदमी,
क्या पता कलि-कृष्ण में, कब कंश दिख जाए सुनो।[…]

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हे दिव्यात्मा!

हे दिव्यात्मा!
म्हांरै कनै फखत
तनै झुकावण नै माथो है
कै है
थारी मीठोड़ी ओल़ूं में
आंख्यां सूं झारण आंसू
कै
काल़जो काठो कर’र
तनै कोई मोटो
बदल़ो मान’र
मोह चोरणो ई रह्यो है सारू म्हांरै तो![…]

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बन्द करिए बापजी – गजल

हर बात को खुद पे खताना, बन्द करिए बापजी।
बिन बात के बातें बनाना, बन्द करिए बापजी।

बीज में विष जो भरा तो फल विषैले खाइए,
ख़ामख़ा अब खार खाना, बन्द करिए बापजी।

सागरों की साख में ही साख सबकी है सुनो!
गागरों के गीत गाना, बन्द करिए बापजी।

लफ़्ज वो लहज़ा वही, माहौल ओ मक़सद भी वो,
चोंक जाना या चोंकाना, बन्द करिए बापजी।[…]

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मिनखां सूं अब टऴिया गांव

मिनखां सूं अब टऴिया गांव।
भूतां रै संग भिऴिया गांव।।

दूध दही री नदियां बैती
दारू सूं अब कऴिया गांव।।

सल़िया सऴिया नेही होता
करै कुचरणी अऴिया गांव।।

खुद री नींद सोवता उठता।
अब तो है हांफऴिया गांव।।[…]

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आज रो समाज अर सराध रो रिवाज

सराध रो रिवाज आपणै समाज में जूनै टेम सूं चालतो आयो है अर आज ई चालै। जे आज री बात करां तो इयां मानो कै अबार रो जुग तो सराध रो स्वर्णिम जुग है। पैली रै जमानैं में तो मायतां रै देवलोक गमण करण रै बाद में ही सराध घालणा सरू हुया करता पण आज री पीढ़ी तो इतरी एडवांस है कै जींवता मायतां रा ई सराध करणा सरू कर दिया। बातड़ी कीं कम गळै ऊतरी दीखै पण आ बात साच सूं खासा दूर होतां थकां ई साच-बायरी कोनी। इणमें साच रा कीं न कीं कण कुळबुळावै। लारलै दिनां री बात है। अेक नामी-गिरामी अफसर आपरी जोड़ायत सागै मोटी अर मूंघी कार में वृद्धाश्रम आयो। भागां सूं बठै म्हारै जाण-पिछाण वाळी अेक समाजसेवी संस्था रा कई मानीता सदस्य भी वृद्धाश्रम री आर्थिक मदद करण सारू बठै गयोड़ा हा। मैनेजर वां सगळा सदस्यां सूं बात करै हो, इतरै तो वृद्धाश्रम रै दरवाजै कनैं अेक कार रुकी।[…]

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राज बदळियां के होसी

कांई फरक पड़ै कै राज किण रो है ?
राजा कुण है अर ताज किण रो है ?
फरक चाह्वो तो राज नीं काज बदळो !
अर भळै काज रो आगाज नै अंदाज बदळो !
फकत आगाज’र अंदाज ई नीं
उणरो परवाज बदळो !
आप – आप रा साज बदळो
न्यारा – न्यारा नखरा अर नाज बदळो !
इत्तो बदळ्यां पछै चाह्वो
तो राजा बदळो
चाह्वै राज बदळो‘र
चाह्वै समाज बदळो ।[…]

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बखत आय ग्यो खोटो – स्व. श्री भंवरदान जी बीठू “मधूकर” (झणकली)

आजादी री घटा ऊमड़ी, बावळ दौट बजायो।
खोपा खड़े बिछैरा खावे, औ पड़पंच उडायो।।
कोट गढों रा झड़्या कूँगरा, पड़्यो विश्व परकोटो।
पकड़ पौळ ढाढै परजीवी, बखत आय ग्यो खोटो।।१।।

काळे धन री करामात सूं, होड लगी हद भारी।
झूंपड़ियों री जगा झुकाया, ऊँचा महल अटारी।
कौड़ी दास क्रोड़ ध्वज कीना, लागो लूंट खसोटो।
बिना बिचारे कहे बौपारी, बखत आय ग्यो खोटो।।२।।[…]

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ग़ज़ल – आं तो वांनै भला कहाया

आं तो वांनै भला कहाया।
भोलां नै रूड़ा भरमाया।।

फूट फजीती फोरापण सूं,
जबरा देखो पांव जमाया।।

न्याय ताकड़ी काण घणेरी,
पार पड़ेली कीकर भाया?[…]

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दौरेजहाँ का दर्द

ये षड्यंत्री दौर न जाने,
कितना और गिराएगा।
छद्म हितों के खातिर मानव,
क्या क्या खेल रचाएगा।

ना करुणा ना शर्म हया कुछ,
मर्यादा का मान नहीं।
संवेदन से शून्य दिलों में,
सब कुछ है इंसान नहीं।।[…]

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