बीरवड़ी वंदना

छंद सारसी
अन्नपूर आई चक्खड़ाई, तूं सदाई सेवियां।
बातां बधाई बह बडाई, दख सवाई देवियां।
नरपत नमाई इम अथाई, पहुम बाई परवड़ी।
निज सुजस जाहर चढै नाहर, बणै वाहर बिरवड़ी।। 1 […]

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बिरवडी वंदना

🌹छंद त्रिभंगी🌹
वरदानी वाहर, जोगण जाहर, पूजित हरि हर, अर ब्रह्मा।
नित प्रत चढ नाहर, बैठी भाखर, सुर नर किन्नर, करे खमा।
सुख करूणा सागर, रीझ अमां पर, भाव ह्रदय भर, निरमल मां
बिरवड बिरदाली़, रखौ रूखाल़ी, वीस भुजाली, वंदन मां।। १ […]

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बिरवडी जी रा छंद – कवि कानदासजी

॥छंद सारसी (हरिगीत)॥
दांतां बतीसां सौत जाई, लिया दांत सु लोहरा।
अचरज्ज दरशण हुऔ अंबा, मिट्या वादळ मोहरा।
पख दोय पूरी शगत सूरी,पिता हुकम पर वडी।
नित वळां अन वळ दियण नरही, वळां पूरण वरवडी॥ 1 ॥

नव लाख घोडे चढै नवघण, सूमरां घर सल्लडै।
सर सात खळभळ, शेष सळवळ, चार चकधर चल्लडै।
इण रुप चढियो सिंध धरपर इळा रज अंबर अडी।
नित वळां अन वळ दियण नरही, वळां पूरण वरवडी॥ 2 ॥ […]

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