हुकम!ओ ई चंदू रो भतीजो है!!

कोई पण जिण रेत में रमै अर जिण कुए सूं काढ पाणी पिवै उणरो असर कदै ई जावै नीं। इणगत रा पुराणा दाखला आपांरी मौखिक बातां अर ख्यातां में पढण अर सुणण नै मिल़ै। ऐड़ी ई एक रेत अर पाणी रै असर री मौखिक कहाणी सुणणनै मिल़ै जिकी आप तक पूगती कर रैयो हूं। ठिरड़ै (पोकरण) रो गाम माड़वो आपरी वीरत अर कीरत रै पाण चारण समाज में ई नीं अपितु दूजै समाजां में चावो रैयो है। इणी धरा माथै हिंगल़ाज सरूपा देवल रो जनम होयो तो देवल सरूपा चंदू माऊ जनमी, जिणरै कोप सूं पोकरण ठाकुर सालमसिंह मरियो-

जमर चंदू थूं जल़ी, तैंसूं कूण त्रिसींग।
पोढी हंदो पाटवी, सोख्यो सालमसींग।
चंदूबाई परचो चावो रे, आयल म्हारै हेलै आव।।
~~जगमालजी मोतीसर

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चिरजा चंदू माजी री

साद करंतां कापणी संकट, आप उदाई आय।
पूर पखो नित पाल़णी पेखो, मात चंदू महमाय।।
हे मा चंदू आप पुकार सुनकर अपने भक्तों के संकट निवारण करने वाली हैं !! इसलिए तो आप अपने निजजनों का पूर्णतया पक्ष निभाती हैं।

गढवाड़ा जिण गंजण चाह्या, तरवारां बल़ ताय।
सांभ बातां जद कोप जिणां सिर, धमकै कीधो धाय।।
………………..मात च़ंदू महमाय।।1
जिसने भी गढवाड़ों (चारणों के गांव) को डराना अथवा तलवारों के बल पर विध्वंस करना चाहा और जब आपने उन आतताइयों की ऐसी मंशा देखी तो उन पर कुपित होकर गढवाड़ों की रक्षार्थ उन पातकों को रोकने हेतु उनके समक्ष अडग खड़ी रही। […]

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चंदू मा रा छंद – धूड़जी मोतीसर जुढिया

।।छंद – सारसी।।
मनधार मत्ती सज सगत्ती, आप रत्थी आविया।
पोक्रण पत्ती बड कुमत्ती, सोह सत्ती सूर सत्ती,
रूक हत्थी राड़वै।
बढ चरण वंदूं सील सिंधू, मात चंदू माड़वै।।1

साह मान संका बाज डंका, होय हंका हेदनी।
इल़ मेर अंका लाग लंका, मार मंका मेदनी।
आलम असंका रीझ रंका, धाड़ धंका धाड़वै।।
बढ चरण वंदूं सील सिंधू, मात चंदू माड़वै।।2[…]

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गीत – जांगड़ो चंदू माऊ नै अरज

गीत – जांगड़ो
मो मन रो सोच मेटजै माता, दादी आगल दाखूं।
हूं तो एक एकेलो हरदम, लारै जुलमी लाखूं।।१
आखूं कथ म्हारी किण आगै, तन लेवै सह टाल़ी।
साच धणी ऊदाई साभल़, पख पूगै झट पाल़ी।।२
सिरकै सिला तूझ सूं सांप्रत, मिटसी गिला मिहारी
दूजां विश्वास करूं न दिल में, थिर आसा इक थारी।।३ […]

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गीत चंदू माऊ नै अरज

प्रहास साणोर
सच साद तूं ऊदाई सांभल़ै सँतरी,जाणगर मरम री सरव जाणै।
शरम नै रखावण आवजै सहायक,ताकड़ो होफरी जोर ताणै।।१

डूबर्यो कवि दुख दधि में डोकरी,छोकरै तणै ओ साद छेलो।
विनासण विघन नै बावड़ै बीसहथ,हांमल़ी मावड़ी सांभ हेलो।।२ […]

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धिन चंदू राखी धरा-1

भगवती चंदू रो जनम माड़वा (पोकरण) रै संढायच उदैजी दलावत रै घर मा अणंदू मिकस री कूख सूं उनीसवै शताब्दी रै पूर्वाद मे हुयो। अणंदूबाई ई गुडी रै पोकरणां रै अत्याचारां रै खिलाफ जंवर कर चारणां रै स्वाभिमा नै अखी राखियो।  देवी चंदू रो ब्याव दासोड़ी रै रतनू रतनजी सूरदासोत रै साथै हुयो। उण दिनां पोकरण माथै सालमसिंह चांपावत रो अधिकार हो, सालमसिंह चांपावत, चांपावतां री ऊजल़ी परंमपरा रो निर्वाह नीं कर सक्यो, उण आप रै सलाहकारां री उल्टी सीख मानर माड़वा री कदीमी सीम नै उथाल़ण अर अखैसर ताल़ाब नै कब्जे मे करण सारू माड़वै रै अखैसर ताल़ाब तक आपरी सेना […]

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चंदू माजी रा छंद

।।दोहा।।
अरि उथाल़ण ईसरी, गाल़ण सालम गात।
टाल़ण दिन नित तापरा, पाल़ण चंदू पात।।

।।छंद – सारसी।।
पीसण उथालण संत पाल़ण, भीर हालण भाणवां।
सालम सालण वसू वाल़ण, जग उजाल़ण जाणवा।
सेव्यां संभाल़ण चाड चालण, दुख दाल़ण दीसरी।
किरपाज सिंधू कर अणंदू आद चंदू ईसरी।।१[…]

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