भद्रकालिका नाराचवृत्त स्तवनम्

शवारूढे स्मशानवासिनी शिवे, दयानिधे।
अघोरघोर गर्जनी, रता मदे दिगंबरी।
विशाल-व्याल केशिनी, प्रपूजिता मुनिश्वरम्।
महाकपालि! मुण्डमालि! भद्रकालिकां भजे।।१

निरावलंबलंबिनी, करालकष्टनष्टनी।
मंदांधमूढदैत्यदुष्टदर्पभंजनी भवा।
मनोविकारदाहिवह्निरूप ज्वालमालिके।
महाकपालि! मुण्डमालि! भद्रकालिकां भजे।।२

रणे वने जले स्थले गढे पुरे च पर्वते।
क्षणे क्षणे पलेलवे अपत्य रक्ष अंबिके।
सदामनोनुकूलभक्त मात! भैरवी सुखे।
महाकपालि! मुण्डमालि! भद्रकालिकां भजे।।३[…]

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काली स्तवन-प्रबीन सागर से

महाकालिका मालिकामुंड धारा,
सबं श्रोन सीसं करं मुक्त बारा,
परं निर्भयं गाहिनी नग्गखग्गा,
ज्वलंती चिता में शवारूढ नग्गा,
महाकाल विप्रीत रत्ती रमस्ते,
नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते||१
महा विध्यया राजितं रक्त बंबा,
सधै जोग जोति अलौकिक अंबा,
त्रिनैनं सरोजं करं नील सज्जै, […]

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काली रूप आवड वंदना

छंद सारसी
क्रां भद्रकाळी, क्रीं कृपाळी, क्रूं कराली, कालिका।
मां मुण्डमाळी, डं डमाली, वपु विशाळी, ज्वालिका।
जय जगतपाली, वृद्ध बाली वेश भाळी मावडा।
काली कराली, वदन वाली, अस्थिमाली, आवडा॥1
समसान वासी, अट्टहासी, वपुअमासी, कज्जला।
प्रति पल पिपासी, पुंज राशी, भव्य भासी, चप्पला॥
मेटो उदासी, हिये वासी, फँस्यौ फासी, डावडा।
काली कराली, वदन वाळी, अस्थि माळी, आवडा॥2 […]

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🌺क्रां काळी मां काळिका🌺

क्रां काळी मां काळिका, गळ नर मुंडां माळ।
बाळक नें मत बीसरै, रहजै थूं रखवाळ॥1

काळी खपराळी कथी, खेंगाळी खळ खाण।
क्रां क्रीं क्रूं बीजाक्षरी, माता बसै मसाण॥2

क्रां काळी विकराळ मुख, खळां खपावण वाळ।
लप लप लपकारा करै, जीभ अगन री ज्वाळ॥3 […]

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