सूंधाराय सताईसी

जुगती नह कछु जाणबो, निजपण उगती नाय।
भगती उर भर भावना, गिर सूंधा सुरराय।।1

विसन भूतपत ब्रहम जिथ, कर नीं सकिया काय।
जनहित प्रगटी जोगणी, सो सूंधै सुरराय।।2

वडा देव हुय बापड़ा, पड़िया आय’र पाय।
रोल़विया असुराण रण, सो सूंधै सुरराय।।3

सगत पास श्रीमाल़ रै, बसै सदा वरदाय।
अखै जगत अघटेसरी, निमख लखै कहु नाय।।4[…]

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सैणी-सुजस

।।छंद – रेंणकी।।
लाळस कव लूण एक ही लिवना,
रात दीह हिंगळाज रटी।
वीदग रै घरै बेकरै बाई,
पह निज देवी तूं प्रगटी।
सकळापण जांण आंण ले सरणो,
नत हुय सुर नाग नमै।
जुढिये इळ विमळ सैणला जोगण, रंग सोनथळ मात रमै।।
जिय रंग सोनथळ मात रमै।।१[…]

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रँग शीलां रखवाल़िया,जोर झिणकली झाड़!!

एक जमानो हो जद अठै रा नर-नारी मरट सूं जीवण जीवता अर सत रै साथै पत रै मारग बैवता। हालांकै धरती बीज गमावै नीं आज ई ऐड़ा लोग है जद ई तो ओ आकाश बिनां थांभै ऊभो है पण उण दिनां री बातां बीजी।

बीसवैं सईकै री बात है भाडली(जैसल़मेर) रा भाटी रुघजी मानसिंहजी रा (रुघराजजी /रुघनाथजी) धाट रै गांम छौल़ रै सोढां रै अठै परण्योड़ा हा। उणां री जोड़ायत सोढीजी, जापो करावण सारू आपरै पीहर छौल़ गयोड़ा हा। जापो हुयो। सोढीजी बेटे री मा बणिया। दोनां जागा बधाइयां बंटी। हरख हुयो।[…]

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रे बाजे समदर तीरां

।।गीत जात बुध चित्त विलास।।

रे बाजे समदर तीरां!
मादल़ डफ चंग झांझ मंजीरा!
नवलख संग नित रास रमे रव गूंजे गगन गंभीरा!
घरर घरर समदर घुघवाटे,निरमल़ उछल़त नीरा!
समदर तीरा![…]

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जोग माया रो गीत सपाखरु – कविराज लांगीदास जी

देवी झंगरेची, वन्नरेची, जळेची, थळेची देवी;
मढेची, गढेची देवी पादरेची माय।
कोठेची वडेची देवी सेवगाँ सहाय करे,
रवेची चाळक्कनेची डूँगरेची राय।।1[…]

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🌺देवी स्तुति🌺

जय जग जननी! आसुर हननी! विश्व वंदनी! अंबा!
जगत पालिनी देवि! दयालिनी!, ललिता! मां! भुजलंबा!!१

विपद विदारिणी! त्रिभुवन तारिणी! नेह निहारिणी! करणी!
पातक हरणी! अशरण शरणी! तारण भव जल तरणी!!२

सिंहारूढ! अगम अतिगूढा! सकल सुमंगल दानी!
वंदन बीसभुजी! वरदायिनि!, भैरवी! भवा! भवानी!!३[…]

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