आपो वोट अमोल

चाह मिटी ना चिंत गी, चित में रयो न चैन।
सब कुछ ही हड़पड़ सज्या, दिल में व्यापी देन।।

आता के उपदेश कज, हर ले कछु हरमेस।
संत करै ज्यां सामनै, इधक लुल़ै आदेश!!

मैं-हंती ना मद तज्यो, देख चढ्या घण दंत।
चकरी चढ्या चुनाव री, सो जो सुणता संत!!

दुख में ले कानो दुसट, सुख में पाल़ै सीर।
गरज पड़्यां आवै गुड़क, झट ऐ मेल जमीर।।[…]

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मतदातावां सूं अरज

।।छंद – भुजंगी।।
सुणै बैठनै जाजमां बात सारी।
करै पीड़ हरेवाय हाथ कारी।
जको जात -पांति नाहि भेद जाणै।
तिको आपरै द्वार पे त्यार टाणै।
विचारै सदा ऊंच नै साच वैणो।
दिलां खोल एड़ै नैय वोट दैणो।।[…]

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आज रो समाज अर सराध रो रिवाज

सराध रो रिवाज आपणै समाज में जूनै टेम सूं चालतो आयो है अर आज ई चालै। जे आज री बात करां तो इयां मानो कै अबार रो जुग तो सराध रो स्वर्णिम जुग है। पैली रै जमानैं में तो मायतां रै देवलोक गमण करण रै बाद में ही सराध घालणा सरू हुया करता पण आज री पीढ़ी तो इतरी एडवांस है कै जींवता मायतां रा ई सराध करणा सरू कर दिया। बातड़ी कीं कम गळै ऊतरी दीखै पण आ बात साच सूं खासा दूर होतां थकां ई साच-बायरी कोनी। इणमें साच रा कीं न कीं कण कुळबुळावै। लारलै दिनां री बात है। अेक नामी-गिरामी अफसर आपरी जोड़ायत सागै मोटी अर मूंघी कार में वृद्धाश्रम आयो। भागां सूं बठै म्हारै जाण-पिछाण वाळी अेक समाजसेवी संस्था रा कई मानीता सदस्य भी वृद्धाश्रम री आर्थिक मदद करण सारू बठै गयोड़ा हा। मैनेजर वां सगळा सदस्यां सूं बात करै हो, इतरै तो वृद्धाश्रम रै दरवाजै कनैं अेक कार रुकी।[…]

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राज बदळियां के होसी

कांई फरक पड़ै कै राज किण रो है ?
राजा कुण है अर ताज किण रो है ?
फरक चाह्वो तो राज नीं काज बदळो !
अर भळै काज रो आगाज नै अंदाज बदळो !
फकत आगाज’र अंदाज ई नीं
उणरो परवाज बदळो !
आप – आप रा साज बदळो
न्यारा – न्यारा नखरा अर नाज बदळो !
इत्तो बदळ्यां पछै चाह्वो
तो राजा बदळो
चाह्वै राज बदळो‘र
चाह्वै समाज बदळो ।[…]

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बखत आय ग्यो खोटो – स्व. श्री भंवरदान जी बीठू “मधूकर” (झणकली)

आजादी री घटा ऊमड़ी, बावळ दौट बजायो।
खोपा खड़े बिछैरा खावे, औ पड़पंच उडायो।।
कोट गढों रा झड़्या कूँगरा, पड़्यो विश्व परकोटो।
पकड़ पौळ ढाढै परजीवी, बखत आय ग्यो खोटो।।१।।

काळे धन री करामात सूं, होड लगी हद भारी।
झूंपड़ियों री जगा झुकाया, ऊँचा महल अटारी।
कौड़ी दास क्रोड़ ध्वज कीना, लागो लूंट खसोटो।
बिना बिचारे कहे बौपारी, बखत आय ग्यो खोटो।।२।।[…]

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छात्रसंघ-निर्वाचन

नेतृत्व का चयन प्रबंधन,
की प्रामाणिक धूरी है।
कैसे कह दें छात्रसंघ, निर्वाचन गैर जरूरी है।

कोई भी हो तंत्र तंत्र का,
अपना इक अनुशासन है
अनुशासन के लिए तंत्र में
अलग-अलग कुछ आसन है।
आसन पर आसीन कौन हो,
इसकी एक व्यवस्था है।
जहाँ व्यवस्था विकृत-बाधित,
हाल वहीं के खस्ता हैं।
साँप छोड़ बाँबी को पीटे,
समझो अक्ल अधूरी है।
कैसे कह दें छात्रसंघ, निर्वाचन ग़ैर-जरूरी है।[…]

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जाग -जाग रै वोटर जाग!

मतदातावां नै समर्पित
**
जाग-जाग रै वोटर जाग!
सो मत रै भारत रा भाग!!
इतरा वरस आऴस मे़ं खोया!
खोटा मिणिया माऴा पो।
भारत री तकदीर बदऴदे,
वांनै अज तक क्यूं नीं जोया?[…]

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म्हारी तिणखा इसड़ी राणी

म्हारी तिणखा इसड़ी राणी
(ज्यूं) तातै तवै पडंतो पाणी।

नातो हार-थकेलै वाळो, है कड़वी कैंटीन साथ में।
तणखां रै दिन दांईं नहचै, बिल इणरो आ जाय हाथ में।
उमर, उधारी रीत अेकसी, लीनी जकी पड़ै लौटाणी।।
म्हारी तिणखा इसड़ी राणी
(ज्यूं) तातै तवै पडंतो पाणी।[…]

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कांई आपां जमीर बेच चूका?

कांई आपां जमीर बेच चूका?
ओ खाली म्हारो अबल़ेखो ई है
कै आपनै ई लागै
म्हारी बात में
कठै ई तंत !!
कांई आपनै
नीं लागै
कै
आपां में अबै
नीं रह्यो जमीर जीवतो[…]

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