श्री आवड़ आराधना – कवि चाळकदान जी रतनू मोड़ी

।।छंद – हरिगीत।।
अंजुलिय इक्कर नलगि नख्खर सिन्धु हक्कर सोखिये।
तेमड़े तिहि कर दनू दह कर महिष भक्कर मोखिये।
मद रूपमत्ती सिंह सझत्ती वज्रहत्थी बदावड़ा।
जय मातु जगत्ती बीसहत्थी, आद सगती आवड़ा।
जिय आद रूपा आवड़ा।।१।।[…]

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नायिका शिख नख वर्णन (राम रंजाट)

यह छंद महाकवि सूर्यमल्ल रचित खंडकाव्य राम रंजाट से लिया गया है। उल्लेखनीय है कि महाकवि ने इस ग्रन्थ को मात्र १० वर्ष की आयु में ही लिख डाला था।


।।छंद – त्रिभंगी।।
सौलह सिनगारं, सजि अनुसारं, अधिक अपारं, उद्धारं।
कौरे चख कज्जळ, अति जिहिं लज्जळ, दुति विजज्जळ, सुभकारं।।[…]

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