श्री नरसिँह अवतार की स्तुति – कवि श्री रविराज सिंहढायच (मुळी सोराष्ट्र)

।।छंद – रेणकी।।
सुनियत अत भ्रमत नमत मन हरिसन, भगत मुगत भगवत भजनं,
सुरपत पत महत रहत रत समरत, सत द्रढ व्रत गत मत सजनं,
धत लखत रखत जगपत उर धारण, सुरत पुकारण श्रवण सुणै,
भट थट असुरांण प्रगट घट भंजण, बिकट रुप नरसिँघ बणै,
जिय बिकट रूप नरसिंघ बणै।।1।।[…]

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न्याय पख तोड़दे बंधण सह नारायण

न्याय पख तोड़दे बंधण सह नारायण,
सरायण जगत रा काज सारा।
परायण-धरम रा सको जग पाल़वा,
करायण जनमतां मुगत कारा।।1

वंश रा दीप तूं कीरती बधावण,
अंश वसुदेव रा जगत ओटो।
तोड़िया जनेतां संस सह तड़ाकै,
खाल़ियो कंस सो दैत खोटो।।2[…]

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राधारमण देव स्तवन

।।छंद त्रिभंगी।।
हे हरि मन हरणं, अशरण शरणं, राधा रमणं, गिरिधरणं।
आपद उद्धरणं, नित प्रति स्मरणं, सुधा निझरणं, बरु चरणं।
ब्रजधाम विचरणं, कुंडल़ करणं, वारिद वर्णं, जगवंद्या।
माधव मुचकुंदा!, नागर नंदा!, बालमुकुंदा! गोविंदा!!१!![…]

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ध्रुव स्तुति – महात्मा नरहरिदास बारहट

“अवतार चरित्र” ग्रन्थ में ध्रुव-वरद अवतार की स्तुति

।।छन्द – कवित्त छप्पय।।
ऊँकार अपार, अखिल आधार अनामय।
आदि मध्य अवसान, असम सम आतम अव्यय।
एक अनेक अनंत, अजीत अवधूत अनौपम।
अनिल अनल आकाश, अंबु अवनी मय आतम।
उतपत्ति नाश कारन अतुल, ईश अधोगत उद्धरन।
अध मध्य ऊर्ध व्यापित अमित, तुम अनंत असरन सरन।।1।।[…]

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गजेन्द्र मोक्ष पर समान बाई का सवैया

पान के काज गयो गजराज,
कुटुम्ब समेत धस्यो जल मांहीं।
पान कर्यो जल शीतल को,
असनान की केलि रचितिहि ठाहीं।
कोपि के ग्राह ग्रह्यो गजराज,
बुडाय लयो जल दीन की नांहीं।
जो भर सूँड रही जल पै तिहिं,
बेर पुकार करि हरि पाहीं।।[…]

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जावण नीं द्यूं नंदकुमार

जावण नी द्यूं नंद कुमार!
रोकण करसूं जतन हजार!

नैण कोटड़ी राज छुपायर, बंद पलक कर द्वार।
दिवस रैण प्हेरो हूं देवूं, काढे़ काजल़ कार!।।१

जावण नी द्यूं नंद कुमार!
रोकण करसूं जतन हजार!

रोज रीझावूं रसिक मनोहर, निज रो रूप निखार।
प्हेर पोमचो नाचूं छम छम, सज सोल़े सिणगार।।२[…]

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🌷रांगड़ रँग रै तो रघुवीर!!🌷

🌷गीत वेलियो🌷
किण सू हुई नह हुवै ना किणसूं,
हिवविध राम तिहारी होड!
कीधा काम अनोखा कितरा,
छिति पर गरब उरां सूं छोड!!1

बाल़पणै दाणव दल़ वन में,
रखिया कुशल़ सकल़ रिखिराज।
कातर नरां अभै भल कीधा,
सधरै धनुस करां में साज।।2[…]

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गोविंद भज रै गीधिया

गोविंद भजरै गीधिया, जाय रह्य दिन जाण।
विसर मती तूं बैवणो, आगै वाट अजाण।।१
गोविंद भज रै गीधिया, दिन जोबन रा दोय।
आगै जासी एकलो, करै न साथो कोय।।२
गोविंद भज रै गीधिया, हिलै जितै पग हाथ।
वदन आवसी बूढपण, बोल सकै नी बात।।३
गोविंद भज रै गीधिया, अजै समझ नै आज।
काल काल में कालिया, कछु ना सरसी काज।।४[…]

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संतन स्वामी तो सरणं

।।छंद – त्रिभंगी।।
पैहाळ तिहारो भगत पियारो, निस थारो नाम रटै।
हिरणख हतियारो ले घण लारो, झैल दुधारो सिर झपटै।
हरनर ललकारो कर होकारो, दैत बकारो द्यो दरणम।
नमहूं घणनामी जय जगजामी, संतन स्वामी तो सरणम।।

इन्दर कोपायो ब्रिज पर आयो, वारिद लायो वरसायो।
धड़हड़ धररायो जोर जतायो, प्रळै मचायो पोमायो।
नख गिर ठैरायो इन्द्र नमायो, धिनो कहायो गिरधरणम।
नमहूं घणनामी जय जगजामी, संतन स्वामी तो सरणम।।[…]

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राखण रीत पुरसोतम राम

गीत-वेलियो
लंका जाय पूगो लंबहाथां,
निडर निसंकां नामी नूर।
दसरथ सुतन दिया रण डंका,
सधर सुटंका धानख सूर।।1

अड़ियो काज धरम अतुलीबल़,
भिड़़ियो असुरां गेह भुजाल़।
छिड़ियो भुज रामण रा छांगण
आहुड़ियो वड वंश उजाल़।।2[…]

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