उदध मुरधर तणो रतन अमोलख-वीर दुर्गादास नै समर्पित एक जांगड़ो साणोर गीत

गीत – जांगड़ो साणोर

उदध मुरधर तणो रतन अमोलख,
अवर मींढ नह आवै।
अवतंस दुरग वँश आसावत,
बसुधा साख बतावै।।1

पारख जसै जोहरी पूरी,
कमध जिकै दिन कीनी।
उणरी परख धीर आंटीलै,
दाटक पग पग दीनी।।2

ओरँग इंद मुरधरा ऊपर
कोप ब्रज सम कीधो।
गहियो बिखो गोरधन गाढो,
दट कर आडो दीधो।।3

हिरणाकुश ओरंग हतियारो,
लुच्चाई सिर लादै।
उणपुल़ कमध आरत अजमालै,
पेख रूप पैल़ादै।।4

अड़ियो बाघ निडर आसाणी,
मुगल थाणा भड़ मारै।
हय कस जीण राखतो हरदम
धुर धव भगती धारै।।5

नर धिन नींद लिवी न नचींती,
सैज धोरां री सूतो।
मुरधर तणो पौरायत मोटो,
बडम तूझ धिन बूतो।।6

निकलंक काछ बाच रो निरमल़,
भू सच री हद भांमी।
सुणियो दुरग तिहाल़ो साची,
नूर सूर सो नांमी।।7

भटियांणी जायो धिन भोमी,
उणरी कूख उजाल़ी।
जणणी तणी सीख जग जाहर,
पोह बड नाहर पाल़ी।।8

भिड़ज ऊपरै भोजन भाल़ो
पुरस हथेल़ी पातो।
मुरधर अडर रुखाल़ण मांटी,
निमख न तजियो नातो।।9

सहियो बिखो रातदिन सबल़ै,
लेस अधीरन लायो।
ऊंची रखी सेल री अणियां,
धूत ओरँग धूजायो।।10

आंणी घरै मुरधरा अणडर,
प्रीत स्वांमी सूं पाल़ै।
ऊजल़ पाट राखियो अणभै,
गरब दिल्ली रो गाल़ै।।11

पाट प्रीत रति नह पाल़ी,
निलवट लिख्यो निकाल़ो।
सांम हुकम धारियो सिरपर,
भोम तजी फट भाल़ो।।12

चींती अडर धरम रख चवड़ै
वाटां भोम विरांणी।
अस ऊपर चढियो उणवेल़ा,
अपणा तज आसांणी।।13

मुरधर राग तजी नह मांटी,
आंटी री नह आंणी।
सपरा तट जाय समाधी सूतो ,
पाग -खाग रख पांणी।।14

पावन नांम कांम सह पावन,
रजवट पिंड में राखै।
गिरधरदान नमै गढाल़ा,
दुरस सुजस मुख दाखै।।15

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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