वाह तरव्वर वाह

लालच ना जस लैण रो, चित न बडाई चाह।
आये नै दे आसरो, वाह तरव्वर वाह।।1

गहडंबर फाबै गजब, रल़ियाणो मझ राह।।
पथिक रुकै परगल़, छिंयां, वाह तरव्वर वाह।।2

विहँग सीस वींटा करै, उर ना भरणो आह।
दंडै नीं राखै दया, वाह तरव्वर वाह।।3

फूल तोड़ फल़ तोड़णा, पुनि सथ तोड़ पनाह।
उण पँछिया नै प्रीत दे, वाह तरव्वर वाह।।4

ताड़्यां नह तूं रूसणो, दिल नह निकल़ै दाह।
झांफ सटै फल़ झाड़ दे, वाह तरव्वर वाह।।5

थल़ थोथै में आंधियां, उडती रेत अथाह।
उण वेल़ा इक आसरो, वाह तरव्वर वाह।।6

तपै जोर बल़ तावड़ो, पशुवां नहीं पनाह।
छाजै सिर छायां छती, वाह तरव्वर वाह।।7

गायां रिढ सथ घोनियां, कुरँगां झुंड किताह।
तो छायां आराम तन, वाह तरव्वर वाह।।8

अरक तपै नभ आकरो, अंधड़ बजै अणचाह।
जीव जिनावर पख जुपै, वाह तरव्वर वाह।।9

ओकल़ उकल़ै अगन जिम, तिमिरहरण थल़ ताह।
उण वेल़ा तो आसरो, वाह तरव्वर वाह।।10

ऊपर पंखी आल़खो, हिव नीचै हिरणांह।
किरणां रो ढाबै कटक, वाह तरव्वर वाह।।11

परहित करवा प्रण हिक, शुद्धमन पाल़ सदाह।
अडग रहै प्रण इण अवल, वाह तरव्वर वाह।।12

धरम भेद दिल नह धरै, सदा करम सतराह।
समवड़ सब करणो सरस, वाह तरव्वर वाह।।13

कुण रोपै सींचै कवण, पीटै कवण पताह।
आं सूं रह उठियो उपर, वाह तरव्वर वाह।।14

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *