आफत नीं आभूषण है बुजुर्ग

अबै आयो बुढापो। मुंशी प्रेमचंदजी ‘बुढापै नै बाळपणै रो पुनरागमन’ बतायो है। आ बात साव साची है। आदमी रो मन बेगो सो’क बूढो कोनी हुवै। बाळपणै में टाबर रो मन करै कै तेज दौड़ूं पण सरीर सांभणो कोनी आवै जणा दौड़ीजै कोनी। मन में आवै कै चांद नै पकड़ूं पण हाथ आवै नीं। घर में पड़ी चीजां रै ढोळण-पंचोळण री घणी जी में आवै पण घर वाळा पार नीं पड़ण द्यै। लबोलवाब ओ कै बाळापै में मन तो बणै पण तन रो साथ कोनी मिलै। आ री आ गत बुढापै में हुवै। मन तो मालजादो मोट्यार रो मोट्यार रैवै, बेगो सो क्यांरो मानै। ताल मिलतां ई तालर घालण ढूकै पण गोडा साथ द्यै जणा। […]

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ऐ है भारत रा भावी कर्णधार!

इण दिनां होय रैयै अंतर्राष्ट्रीय खेलां म़े भारत रै पुरष खिलाड़ियां रै प्रदर्शन नै लेय कई कवि मित्रां आपरी काव्यात्मक टिप्पणियां की। इणी कड़ी में कीं ओल़्यां आपरी निजर कर रैयो हूं पण खाली खिलाड़ियां नैं इंगित नीं कर र ऐड़ी समूली मानसिकता रै माथै-

ऐ है भारत रा भावी कर्णधार!
उठणै री आंरी पौच नहीं, माथै लैणै रो भार!!
आंख्यां में आंरै गीड झरै,
सैफड़ रा बैवै परनाल़ा।
उठतां री पींड्यां धूजै है,
आंख्यां रै आडा तिरमाल़ा।

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राखड़ी रो नेग !

राखड़ी
बांधणियै
जद जद ई
किणी रै बांधी है!
तो एक सुखद अहसास
होयो मन में !
पनपियो है भाव द्रढता रो
एक अदीठ डर सूं
भिड़ण री, बचण री
दीसी है जुगत
फगत राखड़ी रै धागै रै पाण
पनपियो है आपाण[…]

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हिम्मत मत ना हार मानवी – गजल – कवि गिरधारी दान बारहठ (रामपुरिया)

हिम्मत मत ना हार मानवी
कर लै खुद सूं प्यार मानवी।
थारै उठियां ही थरकैला,
आतंक-अत्याचार, मानवी।
करम किये जा फल री चिंता,
मन मांही मत धार मानवी।
दिल में जिण रै देश बसै ना,
भूमी पर वै भार मानवी।[…]

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कलमां री ताकत रै आगै

अबार रै कवियां री कलम में कितरी ताकत है? इणरै अनुमान रो दाखलो अजै सुणण में नीं आयो पण आपांरी आगली अर इणां सूं पैलड़ी पीढी रै कवियां री कलम में कितरी ताकत ही इणरा फगत तीन दाखला आपनै देय रैयो हूं [1]महाकवि पृथ्वीराजजी राठौड ‘पीथल’, [2]कवि भूषण सूर्यमल्लजी मीसण, [3]कवि पुंगव केशरीसिंहजी बारठ री वाणी रै पाणी सूं आप परिचित हो – […]

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આજ તરછોડ માં જોગમાયા – કવિવર દુલા ભાયા “કાગ”

છંદ – ઝૂલણા
ભાન બેભાનમાં માત ! તુજને રટયા, વિસારી બાપુનું નામ દીધું,
ચારણો જન્મથી પક્ષપાતી બની, શરણ જનનીતણું એક લીધું ;
તેં લડાવી ઘણાં લાડ મોટાં કર્યા, પ્રથમ સત્કાવ્યનાં દૂધ પાયાં ;
ખોળલે ખેલવ્યાં બાળને માવડી, આજ તરછોડ માં જોગમાયા ! ૧[…]

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देश भगती री जगमगती जोतः क्रांति रा जोरावर (पुस्तक समीक्षा)

(महान क्रांतिकारी केशरीसिंहजी बारठ री पुण्यतिथि माथै विशेष)
राजस्थानी भाषा रै साहित्यिक विगसाव सारु पद्य सिरजण सूं बती जरूरत गद्य रो गजरो गूंथण री है। आ बात आजरी युवा पीढी सूं घणी आपांरी पुराणी पीढी रा विद्वान सावल़सर जाणै। बै जाणै कै जितै तक आपांरी भाषा रो गद्य लेखन समृद्ध नीं होवैला जितै तक आपां भारतीय साहित्य रै समकालीन लेखन री समवड़ता नीं कर सकांला। इणी बात नैं दीठगत राखर कई विद्वानां कहाणी, निबंध अर उपन्यास लेखन कानी आपरी मेधा रो उपयोग करण अर गद्य भंडार भरण सारु ठावको काम कियो अर कर रैया है।[…]

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हंसा इती उतावल़ कांई

प्रमुख स्वामी महाराज को शब्दांजली

हंसा! इती उतावल़ कांई।
बैठौ सतसंग करां दुय घडी, लेजो पछै विदाई।
उडता उडता थकिया व्होला, राजहंस सुखदाई।
जाजम ढाली नेह नगर में, माणों राज! मिताई।।१
मोती मुकता चरो भजन रा, मनोसरोवर मांई
पांख पसारे, बैठो पाल़े, तोडो मत अपणाई।२[…]

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म्हूं तो मन माने ज्यूं राचूं

म्हूं तो मन मानें ज्यूं राचूं।
साँवरियो बण कागद लिख द्यूं, मीरां ह्वै फिर बांचूं।
कदे वेदना हँस हँस गाऊ, कदे खुशी में रोऊं।
मनोभाव मणिमुकता माल़ा, जोडूं तोडूं प्रोऊं।
लडियां कडियां आँच अनुभव, कर कर कुंदन जांचूं।
म्हूं तो मन मानें ज्यूं राचूं।
साँवरियो बण कागद लिख द्यूं, मीरां ह्वै फिर बांचूं।[…]

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संतो! वरे भाव री हेली!

संतो! वरे भाव री हेली!
तनडो भींज्यों मनडो भींज्यों, हरी हुई हिव वेली!
खल़कै खाल़ा, वहता व्हाल़ा, भरिया नद सरवरिया!
कोई उलीचै भर भर खोबा, डूबाणा केई तरिया!
बडी बडी झड़ लगी जोर री, नेवै धरो तपेली!
संतो वरे भाव री हेली!
तनडो भींज्यो मनडो भीज्यो हरी हुई हिव वेली![…]

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