राजस्थानी शब्दकोश ऑनलाइन प्रोजेक्ट – सामान्य प्रश्न अथवा जिज्ञासाएं (FAQs)

प्रश्न: डिजिटाइज़ करने और ऑनलाइन करने में क्या अंतर है? उत्तर: डिजिटाइज़ करने का का अर्थ है किसी भी पुस्तक अथवा रचना को इलेक्ट्रॉनिक फॉरमेट में बदलना और ऑनलाइन करने का अर्थ है इस पुस्तक के डिजिटल फॉरमेट को इन्टरनेट के माध्यम से आम जनता को उपलब्ध करवाना। यह डिजिटल फॉर्मेट एक पीडीऍफ़ फाइल की तरह भी हो सकता है जिसे कोई डाउनलोड कर ले तथा यह एक वेब पेज की तरह भी हो सकता है जिसे कोई भी बिना डाउनलोड किये सीधे ब्राउज़र पर ही पढ़ सके। प्रश्न: एक शब्दकोश को डिजिटाइज़/ऑनलाइन बनाना एक सामान्य पुस्तक से बहुत अधिक […]

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राजस्थानी शब्दकोश ऑनलाइन प्रोजेक्ट


प्रोजेक्ट उद्देश्य: सम्पूर्ण राजस्थानी शब्दकोश (लगभग 2,50,000 शब्द) को एक वर्ष में ऑनलाइन करके इसकी मोबाइल एप तथा वेबसाइट बनाना[…]

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आजादी री ओट अठै…

आजादी री ओट अठै।
पल़र्या देखो झोट अठै।
अभिव्यक्ति री ओट ओल़ावै, पसर रही नित खोट अठै।।

भाषा रो पोखाल़ो कीनो।
संस्कृति नै पाणी दीनो।
भरी सभा में भलां देखलो, शिशुपाल़ रो मारग लीनो।।[…]

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अमर रहे गणतन्त्र हमारा – राजेश विद्रोही

भाई का दुश्मन है भाई
मन्दिर मस्जिद हाथापाई
हिन्दुस्तानी सिर्फ रह गये
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई
कौमी यकजहती रोती है
गया भाड़ में भाईचारा।
मगर हमें इन सब से क्या है
अमर रहे गणतंत्र हमारा।।[…]

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हर दिल हिंदुस्तान रहेगा

ना मिलती है अनायास ही,
ना मिलती उपहारों में
ना पैसे के बल आजादी,
मिलती कहीं बाजारों में

लाखों का सिंदूर पुँछा है,
लाखों सूनी हुई कलाई
लाखों कोख चढ़ी कुर्बानी,
तब जाकर आजादी आई[…]

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जे थूं म्हारो हाथ पकड़ले!

जे थूं म्हारो हाथ पकड़ले!
आथड़तो
पड़तो
थम जाऊं
रम जाऊं
नैणां गहर समंद में
लहर नेह री तिर जाऊं
जे थूं म्हारो हाथ पकड़लै!
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जाजम जमियोड़ी बातां में–

थांरी जीवटता
अर हूंस थांरली
कष्ट सहण री खिमता थांरी
अबखायां सूं हंस-हंस बंतल़
करी हथाई विपदावां सूं
परड़ां वाल़ै भांग फणां नै
बूझां वाल़ो तकियो दे नै
मगरां वाल़ी सैजां ऊपर
पलक बिंसाई
खा फूंकारो
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पुस्तक समीक्षा – प्रकृति-संस्कृति री ओपती सुकृति-‘रूंख रसायण’ – महेन्द्रसिंह सिसोदिया ‘छायण’

पुस्तक समीक्षा – प्रकृति-संस्कृति री ओपती सुकृति-‘रूंख रसायण’ – महेन्द्रसिंह सिसोदिया ‘छायण’
लेखक – डॉ. शक्तिदान कविया

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