तीनूं ताल़ा दे गया

गाय वैसे तो पूरे भारत के लिए श्रद्धा का कारण रही है लेकिन राजस्थान के संदर्भ में बात करें तो हमें विदित होता है कि मध्यकाल में यहां गौ रक्षार्थ युद्ध तो लड़े ही गए साथ ही चारण देवियों ने अपनी अथवा अपने समग्र गांव के गौधन की रक्षार्थ जमर की ज्वाला में अपने आपको समर्पित कर इतिहास में नाम अमर कर दिया। ऐसी ही कहानी है हड़वेचा गांव की सुअब माऊ की।

आजसे लगभग 250वर्ष पूर्व की बात है। हड़वा व हड़वेचा गांव की सीमा पर जहां अभी सुरलाई नाडी स्थित है, वहां पर सुअब माऊ ने जमर कर अन्याय व अत्याचार का प्रतिकार करते हुए एक उज्ज्वल इतिहास रचा था।[…]

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फिर मैं जीवित रहकर क्या करूंगी?

19वीं सदी का उत्तरार्द्ध व 20वीं सदी का पूर्वार्द्ध का समय संक्रमणकाल था। इस दौर में राजाओं की सत्ता पर पकड़ शिथिल पड़ गई थी। क्योंकि उस समय के शासकों का ध्यान या तो आमोद-प्रमोद में लगा रहा या घातों-प्रतिघातों से बचाव में संलग्न रहा। जिससे मातहत लोगों ने दूरदराज के क्षेत्रों में अपनी मनमर्जी से क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर अपने अधिकारों का दुरपयोग किया।

छोटे-छोटे अधिकारियों ने सामान्य जनता पर इस कद्र कहर ढ़ाया जिसके विरोध स्वरूप शिव (मारवाड़) के हाकिम के खिलाफ जनहितार्थ व अपने स्वाभिमान की रक्षार्थ तीन चार चारणों देवियों ने जमर कर अपना विरोध दर्ज करवाया।
उन देवियों की लोकहितैष्णा को जनसाधारण ने असाधारण रूप से अपने कंठों में संजोये रखा। ऐसी ही एक कहानी है हड़वेचा गांव की करमां माऊ के जमर की।[…]

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मैं हड़वेची बैठी हूं ना!

[…]जब यह बात जोमां की मा ने सुनी तो उन्होंने कहा कि-
“मैं हड़वेचा आई हुई हूं, जाई नहीं। जमर मैं नहीं करूंगी जमर मेरी बेटी जोमां करेगी। वो भी तो तो इसी उदर में लिटी है। ”

जब यह बात जोमां ने सुनी तो उन्होंने कहा कि-
“मिट्टी लेने के लिए हड़वेचा जाने की क्या आवश्यकता है? मैं खुद साक्षात हड़वेची यहां बैठी हूं तो फिर वहां जाने की क्या आवश्यकता है? वैसे भी हड़वेची मैं हूं मेरी मा नहीं! अतः जमर मेरी मा क्यों करेगी ? जमर तो मैं करूंगी।[…]

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Bhagwati Shri Karniji Maharaj – A Biography – Part-3

Chapter VII – Mahaprayan and Some Important Lifetime Miracles Shri Karniji devoted Her long pious life to the cause of righteousness and the establishment of Bharat dharma. Devotees in difficulty received help, warriors received sound advice and blessings and the general public enjoyed a peaceful life. Impressed by Her pious life, Her divine powers, and Her success in strengthening Hinduism and its defenses, numerous devotees, from mighty warriors like the Rathore and Bhati chiefs on the one hand to common householders like Ananda carpenter and Dashrath Meghwal on the other, paid homage to Her. She could have but did not utilize […]

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Bhagwati Shri Karniji Maharaj – A Biography – Part-2

Chapter IV – Deshnok-Rao Ridmal and Mandore Development of Deshnok and improvement of the surrounding pastures now engaged Her attention. The surrounding jungle mainly consisted of old Jal trees not very palatable to the cattle. Most trees were on the way to rapid decay because of age. Residents of the new fast-growing village used wood as fuel. Very often healthy branches and trees were damaged by women and children gathering fuel. The depletion of the forest had begun, and little imagination was needed for visualizing its fate. Apprehensive that the pasture, as also the forest, would become prey to human […]

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Bhagwati Shri Karniji Maharaj – A Biography – Part-1

Introduction Religion has profoundly influenced the Indian mind of all ages. Hindus have since time immemorial visualized the Supreme, Omnipotent, power as Shiva and Shakti. Shaivs worship the Universal Power as Shiva while adherents of the Shakti cult are called Shaktas, A Shakta obtains from Shakti the same affection, nourishment, and wish-fulfillment as a person gets from his mother. The Shakta, therefore, visualizes and worships the Supreme power as Mother. On the authority of the Puranas and other holy texts, it can be said that Shakti has appeared in a human form whenever impiety exceeded limits and the world was […]

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