चारण साहित्य का इतिहास – डॉ. मोहन लाल जिज्ञासु

| कड़ी – २४८ | आठवाँ अध्याय – चारण-काव्य का नवचरण (उपसंहार)
| धारावाहिक श्रंखला – प्रत्येक मंगल, शुक्र एवं रविवार को प्रेषित
| सन्दर्भ – कवि एवं कृतियाँ

७. देवकरण:- ये बारहठ शाखा में उत्पन्न हुए हैं (१९०९ ई०) और नागौर जिलान्तर्गत ग्राम इंदोकली के निवासी हैं।[…]

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ग़ज़ल – ख़ामख़ा ही क्यों किसी से वैर पाला आपने

ख़ामख़ा ही क्यों किसी से वैर पाला आपने,
क्यों किसी की आबरू पे कीच डाला आपने

बेवजह ही वहम पाला या अहम में पड़ गए,
खून अपना व्यर्थ में ही क्यों उबाला आपने

आपका ही का ‘हेड’ था ओ ‘टेल’ भी थी आपकी,
क्यों मगर हर बार फिर सिक्का उछाला आपने

छाँह में जिनके पली हैं पादपों की पीढियां,
प्रेम के उन बरगदों को ना संभाला आपने[…]

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