रांमदेवजी रा छंद

।।छंद-नाराच।।
मुदै मरू ज देश मंझ, हार संत हालियो।
दयाल़धीस द्वारका, निपूत भक्त नाल़ियो।
अखीज वीणती अजै ज, राज गेह रम्मणा।
पिछम्म धांम रांम पीर, सांम भीर सम्भणा।।1[…]

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इसी जमर अग्नि से तूं जलेगा

(लाछांबाई खिड़ियांणी जानामेड़ी की जमर कथा) मयूर कितना सुंदर पक्षी होता है। शायद उसे अपनी इसी सुंदरता पर गर्व भी है लेकिन जब वो अपने फटे व धूसर पैरों को देखता है तो उसे अपनी सुंदरता विद्रूप लगने लगती है, और उसे रोना आ जाता है। तभी तो यह कहावत चली है कि ‘मोरियो घणो ई रूपाल़ो हुवै पण पगां कांनी देखै जणै रोवै।’ यही बात कमोबेश चारण इतिहास संबंधी शोध करते या लिखतें समय होती है। जिन लोगों ने दूसरों पर बहुत विस्तार से लिखा लेकिन स्वयं की बातें केवल श्रुति परंपरा में संजोकर रखी। श्रुति परंपरा में एक […]

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यशोश्वरी माँ का कवित्त

।।कवित्त।।
दुष्टन संहार कर संतन रुखार कर,
साद आद समै हूं से कष्ट सब टाल़िका।
भक्तन के भाव भाल़ जग के जंजाल जाल़,
प्रसन्न प्रसून आ पहन कंठ माल़िका।
यश को विस्तार देय कुयश को गार देय,
यशोश्वरी मेरी मात भाव दास भाल़िका।
चंडिका तुम्हारी आभ झंडी ओ सिंदूरी वर्ण,
कीरती अक्षुण्ण रहे शूल़पांणि काल़िका।।[…]

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होरी के पद

।।होरी पद-१।।

होली! खेलत श्री यदुबीर।
छिड़कत लाल गुलाल बाल पर, अनहद उड़त अबीर।।१

बरसाने की सब ब्रजबाला, आई होय अधीर।
भर भर डारी अंग पिचकारी, भीगै अंगिया चीर।।२[…]

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मोगल वंदना

!!छंद-नाराच (पंच चामर)!!

प्रणम्य !श्री गुरूं !पदाम्बुजं सुचित्त लाइके!
उमा-महेश पुत्र श्री गणेश को मनाइके!
स्मरामि धात्रि काव्य दात्रि श्वेतवस्त्र धारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी! सुचिंतयामि चारणी!! १[…]

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बसो नित मो चित श्री हरि : छंद – मत्तगयंद

!!छंद – मत्तगयंद!!
मंजुल श्यामल गात मनोहर नाथ दयानिधि देव मुरारी !
है लकुटी कर ;पीत धरे पट कामरि ओपत सुंदर कारी!
गुंजन माल गले बिच सोहत मोर पखा युत पाग सु धारी!
केशव नंद किशोर! बसो नित मो चित श्री हरि रासबिहारी!! १]…]

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मनरंगथली मझ मात रमें – छंद : रोमकंद

!!छंद – रोमकंद!!
शुभ-भाल विशाल! सुकुंकुम लाल सिंदूर कपाळ! निहाल करै!
जनु होठ प्रवाल, रु’चाल मराल, मृणाल डमाल कपाल धरै!
कच घुंघरियाळ, ज्यूॅं वासुकि व्याल, निहाळ छबि दिगपाळ नमें!
निशि पूनम चैत उजास नवेलख, रास मनोहर मात रमें!
सबही मिल जोगण साथ रमै!
मनरंगथली मझ मात रमें!
जिय आवड़ मां अवदात रमें!
रंग आवड़ मां जगमात रमें||१||[…]

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हनुमत वंदना

!!छंद-नाराच (पंच चामर) !!
अकूत शौर्य!अंजनी-प्रसूत! ज्ञानसागरं!
कपीश!राघवेन्द्रसैन्ययूथमुख्यवानरं!
सिया-सपूत!प्रेतभूतपूतनादिदंडनं!
श्रीरामदूत! वायुपूत! हे हनूंत वंदनं!! १[…]

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माँ मेलडी वंदना

!!छंद – नाराच!!
अजं सवार, मां उदार, नेह की निहारणी!
कुठार खप्र खाग धार सर्व काज सारणी!
“रही पधार मावडी, चलो पुकारिये छडी”
भजामि कष्ट भंजनी, नमामि मात मेलडी!! १[…]

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