वेलि क्रिसन रुकमणी री – महाकवि पृथ्वीराज राठौड़

महाकवि पृथ्वीराज राठौड़ रचित अनुपम प्रबंध काव्य।
भावार्थ – श्री मातु सिंह राठोड़
छंद वेलियो

।।मंगलाचरण।।
परमेसर प्रणवि, प्रणवि सरसति पुणि
सदगुरु प्रणवि त्रिण्हे तत सार।
मंगळ-रूप गाइजै माहव
चार सु एही मंगळचार।।1।।

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