आज हमारी बेर इति करनादेय

दूहा

सिंवर सिंवर रसणा थकी अम्बे करी अबेर।
दुविधा मेटण दास री सगत आव चढ़ शेर।

छंद-सवैया

मामड़ियाल डस्यो अहि मैर को,जैर को होय सक्यो नहीं जारण।
आवड़ ऊगत आण दरायके ,भाण पे लोवड़ को पट डारण।
पाय पीयूष दियो झट लाय’र है निज भ्रात जीवारण।
आज हमारीय बैर इति करणादेय देर करी केहि कारण।।।1।।

मारग रोक लियो महराणने सिंध सूं आवत धर्म सुधारण।
हाकळ देय चळू भर हाकड़ो डोकरी दे डक हेक डकारण।
मार मलेच्छ कियो मढ़ मेर पै आपकूं तेमड़ा राय उचारण।
आज हमारीय बैर इति करणादेय देर करी केहि कारण।।2।।

बीस हथि बगसीस करी धर राव रिड़मल्ल वन्श बधारण।
कान महा अभिमानते कोपीयो ठाण लियो हठ प्राण गमावण।
लोपण कार कूँ बार लगी नहीं सिंह बणी दृष्टि हथ मारण।
आज हमारीय बैर इति करणादेय देर करी केहि कारण।।3।।

नीर बढ्यो उदधि बिच नाव में धीरज शाह कियो उण धारण।
हे करणी करणी मुख सूं कही पंगव बाण ते कीन पुकारण्।
धेन कुं दूहत टेर सुणी तुम देर करी नहीं पाण  पसारण।
आज हमारीय बैर इति करणादेय देर करी केहि कारण।।4।।

पूगळ राण तकयो मुल्तान पै कैद में आय गयो एहि कारण।
अम्ब तणी उडगी असमान में ताण डगां धवली तन धारण।
पूगळ लाय दियो पळ् हेकमें नेक नहीं तब जेज लगारण।
आज हमारीय बैर इति करणादेय देर करी केहि कारण।।5।।

टूटत लाव करी जद कोर में आणन्द आरत बाण उचारण।
लाव गई मुख दोय लगायर कूपते बायर कीन निकारण।
प्राण बचाय सुथार पसारियों तारियो दुम्भी बणी जग तारण।
आज हमारीय बैर इति करणादेय देर करी केहि कारण।।6।।

कोप मलेच्छ कियो कमरू दल बीक धरा लग राज बधारण।
जैत लिया संगमें दल रैत कुं पैदल आ मढ़ कीन पुकारण।
जीत दराय मराय मलेछ कुं जैत तणो जस कीन उजारण।
आज हमारीय बैर इति करणादेय देर करी केहि कारण।।7।।

लोवड़ियाल तुंही लज राखजे साख तेरी विच काज सुधारण।
मोरी कमी दिश मात न जावज्यो धावज्यो रावरो बिरध बधारण।
देर नहीं पल लावरी आवरी सोहनदान को मान उबारण।
आज हमारीय बेर इति करनादेय देर करी केहि कारण।।।8।।

छप्पय

बीत गया है बरस पुकारत पांचू पूरा,
सुण्यो न अजुं साद दिशा किण भागी दूरा।
जगदम्ब बिच में जाण दास बिश्वास बधारयो,
करबा पूरो काज धणी दिल में नी धारयो।
पकड़यो नीच हकनाक हट सठ कुं झट समझावजे,
सोनियो साद करे सगत,अम्बा बेगि आवजे।

~~सोहन दान जी सिंहढायच् कृत्

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