आव गज़ल थुं आव अठे

छम छम करती पांव अठे।
आव गज़ल थुं आव अठे।
मन री बातां थनें सुणादूं,
नहीं कपट रा दाव अठे।
दाद ,कहकहा ,वाह वाह री,
अपणायत अणमाव अठे।
मन रा सुर थुं मांड मुळकती,
लय री झांझ बजाव अठे।
थाकी व्हैतो थुं सुस्ता लै,
बड पीपळ री छांव अठे।
जाजम जूनी महफिल माडां,
कोड करे अणमाव अठे।
लय री गहरी लहरी ठहरी
एहडा है घण गांव अठे।
रखसां थानै सिर रे माथै,
वळै पळोटूं पांव अठे।
आवै तो जाजै मत पाछी,
कर मन में ठहराव अठे।
नरपत रे मन रहै निरंतर,
मिळसी आदर भाव अठै॥

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