आवाहण गीत सपाखरु – कवि खोडीदान जी

।।गीत सपाखरु।।
बाइ आविए सँकटाँ पडये, तारवाँ चारणाँ बेडो।
नाम रा भामणाँ लियाँ, वधारणी नूर।।
चारणी पधारो मैया, सुधारणी कविसराँ।
हिँगऴाज आदि माता, हाजराहजूर।।1।।

जाऴँधरी गातराड, काळिका भवानी जपाँ।
रवेची अंबिका देवी, कथाँ जगराय।।
वडाँवडी आशापुरा, डुँगरेची थऴाँ वाळी।
माढराणी तुझ नमाँ, भुजाळी मोमाय।।2।।

ऊदा वाळी राजबाइ, करणी मेहारी अखाँ।
विजेसणी वाघेसणी, देवियाँ वडाइ।।
पावावाळी त्रिशूळाळी, भेळियाळी भजाँ प्रेमे।
तोतळा बेचराँ होल, कावळाँ तकाइ।।3।।

चावँड आवड गेल, खोडियार बुट साची।
व्रण उधारणी करे, सेवगाँ री वार।।
न आविए सूर न उगे, आविए तो रहे नेम।
अमाणो भरोसो एक, तमाणो आधार।।4।।

पडाइ आकाश तणी, मोगलाँ छूटते पटे।
मेलडी खुबडी देवी, सिधवडी माय।।
वरूडी चँखडा सधू, चरूडी चढाय बेगेँ।
स्हेज मै पोषिया क्रोड, कापडी सकाय।।5।।

भली आई देवबाइ, सिढायच कुळ भणाँ।
हरजोग जाइ माता, नागबाइ हेक।।
भलाभली चाँप बाइ, आविए जरुर भेरु।
तार तार तार बेडो, राख कवियाँ टेक।।6।।

कँडबाळ अँडबाळ, पीठड कात्रोडी कथाँ।
सुँदरी भीचरी देवी, रखाय सधीर।।
कविसराँ लाज राख, अरदास खोडो करे।
भुजाळी थेँ अठे आवो, चारणाँरी भीर।।7।।

~~कवि खोडीदान जी

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