रामदेव पीर आवाहन

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🌺दोहा🌺

रे मन भजले रामदे!, बाबै री भर बीज।
संकट काटै सेवियां, जस वैभव दे रीझ।।
धाम रूणीचै रा धणी, नाम राम सा पीर।
काम भगत जन रा करै, राख ह्रदा मन धीर।।

🌺रामादेव पीर आह्वान🌺

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

वीरमदे सुगणा रा वीरा, अजमल सुत अवतारी!
मेणादे रा लाल लाडला, नेतल तो घर नारी! १

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

सिर धर सुंदर पाग सुरंगी, पीतांबर तन धारी!
जरकसी जामा प्हैरै ठाकर, अलख पुरूष अलगारी! २

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

करूं आरती चरण पखाल़ूं, कर ले कंचन झारी!
सामेल़ो हूं करूं रामसा! , थाल़ी ढोल बजा री! ३

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

हरजी भाटी, डाली बाई, संग खड़ा नरनारी!
तुँवर रामा! बजे दमामा, झड़ी लगी भजनां री! ४

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

कुम कुम केसर तिलक लगाऊँ, नकल़ंक नेजाधारी!
वारी वारी लेऊँ वारणा, नितप्रत रहूँ निहारी! ५

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

रूणीचै रा राज राजवी, धवल़ धजा रा धारी!
पिछम धरा रा पीर रामसा! , परचा थोंरा भारी! ६

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

कल़जुग रा केशव थें कहिया, महि जिम देव मुरारी!
वंदन अजमल नंदन लुल़ लुल़, जय जय हो बाबा री! ७

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

खलक मांय मशहूर खांण है, शोभा जग बिच सारी!
आसल़ नरपत करी आरती, रामदेव तँवरां री!

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

अंतिम दो पंक्ति मेरे काव्यमित्र मोहन सिंहजी रतनू की साभार
~~©वैतालिक

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