अम्बा-अष्टक

लाख असी चव जोनिय मांझल जानिय मानव श्रेष्ठ जमारो।
धीर विवेक तुला पर तोल अमोल सतोल सुबोल उचारो।
तारन या भवसागर सों गजराज न दीखत और सहारो।
बार हि बार उचार अलौकिक अम्ब सुनाम उबारन वारो।। 01।।

धार तुं धार मनां निरधार सदा इक सार सुकारथ सारो।
लाख जतन्न अखन्न रहे नँह जीवन जोबन धन्न उधारो।
है गजराज सुकाज इलाज न नेकु अकाजन काज बिचारो।
बार हि बार उचार अलौकिक अंब सुनाम उबारन वारो।। 02।।

क्यों परनिंद करै पगला अगला पल को न जबै पतियारो।
क्यों दिल घात रखै दिनरात हियै धर हाथ सुबात बिचारो।
एकहि राज रखावन लाज कहै गजराज न और अधारो।
बार हि बार उचार अलौकिक अम्ब सुनाम उबारन वारो।। 03।।

दौडिय दौडिय लाख करोडिय जो धन जोडिय सौ न हमारो।
कोडिय कोडिय दान दियोडिय आवत ओडिय देत सहारो।
दान हुतें बड़ जान सुजान रखान इमान विधान विचारो।
बार हि बार उचार अलौकिक अम्ब सुनाम उबारन वारो।। 04।।

जो विपरीत बने सब मीत, सुरीत प्रतीत कबै न बिसारो।
है दिनमान महान जहान अमान समान सुथान रखारो।
यान विधान को जान सुजान कहै गजराज गुमान निवारो
बार हि बार उचार अलौकिक अम्ब सुनाम उबारन वारो।। 05।।

नाम यहे अभिराम अमाम रट्यो खुद राम तमाम चितारो।
कान परे अभिमान हरे अरु जीभ धरे सुधरेय जमारो।
आधि उपाधि वियाधि टरे गजराज भरे जगदंब भंडारो।
बार हि बार उचार अलौकिक अम्ब सुनाम उबारन वारो।। 06।।

~~डॉ. गजादान चारण ‘शक्तिसुत’

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