अर्जनदान मूहड़ सनवाड़ा

आदरणीय अर्जुनदानसा मूहड़ सनवाड़ा रो नाम डिंगल़ रे वर्तमान कवियां मे हरोल़ है। आपरी मोकल़ी कवितावां काव्य प्रेमियां रे विचालै चावी है। पंचायण पच्चीसी, वाह वाह विज्ञान, करणीजी रा छंद, पाकिस्तान नै चेतावणी, कश्मीर रो मामलो, वड़लै रो मर्सियो आद रचनावां अर्जुनसा रे बहु पठित अर बहु श्रुत ज्ञान री परिचायक है। डिंगल़ काव्य नै जुगबोध सूं जोड़तां थकां अर्जुनसा समकालीन साहित्य री दौड़ मे डिंगल़ नै समवड़ ऊभी करणियै कवियां मे शुमार है। “वाह वाह विज्ञान” री कीं दूहा आपरी निजर कर रैयो हूं जिण मे कवि विज्ञान रे पेटै आधुनिक विकास नै दरसायो है

वाह वाह विज्ञान
(अर्जुनदान मूहड़ सनवाड़ा कृत)

हल़खड़ धोरी हाकता धर निपजातां धान
कल़्टी सूं खेती करै वाह वाह विज्ञान १

अरटां पाणी आवतो करतां श्रम किसान
नल़ कूपां जल़ नीसरै वाह वाह विज्ञान २

जद लाटां मे जोवता वायरियै री वाट
बैठ भरीजै बोरियां थ्रेसर वाल़ो थाट ३

तिण दिन हूतो तेल रो एकल़ दीप उजास
तणिया बीजल़ तार सूं पूरो ट्यूब प्रकाश ४

अमरीका अफगान री भारत कै भूटान
घर खबरां देखो घणी टेलीवीजन तान ५

खत पाती लिखता खरा कुशल़ कामना काज
वातां करो विदेश री ऐ मोबाईल आज ६

करत विलाणां कामणी हूती बीमारी हीन
अबै घरां मे आयगी माखण काढ मशीन ७

ऊंठ चढै जद आवता सजता घोड़ सवार
व्है रुपिया तो वापरो क्रोड़ां वाल़ी कार ८

लोह पंथ नीको लगै हरख रेल रो होय
वाताकूल डिब्बा वल़ै जिणमे चढणो जोय ९

पलक मांहे उडता फिरे जचै हवाई जाझ
भारत मे पूगो भले अमरीका सूं आज १०

प्रतख अंग जोड़ै परा रोग मिटावै राज
हिरदा वाल़ो होयगो अब तो सफल़ इलाज ११

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